जमुई में शिवखोरी गुफा जैसा 160 फीट लंबा पंडाल:30 लाख की लागत से निर्माण, वाराणसी के कारीगरों ने दिया मंदिर का अनुभव

जमुई में शिवखोरी गुफा जैसा 160 फीट लंबा पंडाल:30 लाख की लागत से निर्माण, वाराणसी के कारीगरों ने दिया मंदिर का अनुभव

जम्मू के प्रसिद्ध शिवखोरी गुफा मंदिर तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं है। अधिक दूरी, यात्रा में लगने वाला समय और खर्च के कारण ग्रामीण क्षेत्र के कई लोग वहां दर्शन करने नहीं जा पाते। ऐसे ही श्रद्धालुओं को शिवखोरी गुफा का अहसास कराने के लिए खैरा प्रखंड के धरमपुर गांव में दुर्गा पूजा के अवसर पर भव्य गुफा पंडाल बनाया गया है। यहां पहुंचकर लोग गुफा के भीतर देवी-देवताओं के दर्शन कर रहे हैं। अनोखी बनावट और भव्यता के कारण यह पंडाल आसपास के गांवों के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 160 फीट लंबी गुफा, 30 लाख रुपये खर्च धरमपुर गांव में जम्मू के प्रसिद्ध शिवखोरी गुफा मंदिर की तर्ज पर करीब 160 फीट लंबा गुफानुमा पंडाल तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए वाराणसी से कारीगर बुलाए गए थे। पंडाल के निर्माण पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसकी बनावट ऐसी है कि प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को गुफा के भीतर पहुंचने जैसा अनुभव होता है। दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पंडाल का प्रवेश द्वार बाघ के खुले मुंह के आकार में बनाया गया है। इसके भीतर मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ भगवान शिव की प्रतिमा और उनकी जटाओं की आकर्षक सजावट की गई है। गुफा की बनावट, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और विशेष सजावट लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान यहां दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। ग्रामीणों को शिवखोरी का अहसास कराने की पहल दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अंजनी कुमार सिन्हा ने बताया कि समिति के लोगों ने ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं को शिवखोरी गुफा मंदिर का अहसास कराने के उद्देश्य से इस बार यह विशेष पंडाल बनाने का संकल्प लिया था। जम्मू जाकर मंदिर के दर्शन करने में दूरी और खर्च की परेशानी होती है। ऐसे में गांव में ही शिवखोरी गुफा की तर्ज पर पंडाल बनाकर लोगों को दर्शन का अवसर देने का प्रयास किया गया है। मंदिर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुफा उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के बाद भस्मासुर उन्हीं को भस्म करने के लिए दौड़ा था। इस दौरान भगवान शिव ने शिवखोरी गुफा में शरण ली थी। इसी धार्मिक प्रसंग को ध्यान में रखकर गुफा की थीम पर पंडाल तैयार किया गया है। समिति के सदस्यों के अनुसार, शिवखोरी गुफा मंदिर माता वैष्णो देवी के मंदिर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव में पहली बार बना ऐसा भव्य पंडाल धरमपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का भव्य और अनोखा पंडाल पहली बार तैयार किया गया है। इसकी चर्चा आसपास के इलाकों में भी हो रही है। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु इसे देखने पहुंच रहे हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर तैयार यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में पर्यटन और सांस्कृतिक आकर्षण का भी केंद्र बन गया है। जम्मू के प्रसिद्ध शिवखोरी गुफा मंदिर तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं है। अधिक दूरी, यात्रा में लगने वाला समय और खर्च के कारण ग्रामीण क्षेत्र के कई लोग वहां दर्शन करने नहीं जा पाते। ऐसे ही श्रद्धालुओं को शिवखोरी गुफा का अहसास कराने के लिए खैरा प्रखंड के धरमपुर गांव में दुर्गा पूजा के अवसर पर भव्य गुफा पंडाल बनाया गया है। यहां पहुंचकर लोग गुफा के भीतर देवी-देवताओं के दर्शन कर रहे हैं। अनोखी बनावट और भव्यता के कारण यह पंडाल आसपास के गांवों के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 160 फीट लंबी गुफा, 30 लाख रुपये खर्च धरमपुर गांव में जम्मू के प्रसिद्ध शिवखोरी गुफा मंदिर की तर्ज पर करीब 160 फीट लंबा गुफानुमा पंडाल तैयार किया गया है। इसे बनाने के लिए वाराणसी से कारीगर बुलाए गए थे। पंडाल के निर्माण पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसकी बनावट ऐसी है कि प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को गुफा के भीतर पहुंचने जैसा अनुभव होता है। दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पंडाल का प्रवेश द्वार बाघ के खुले मुंह के आकार में बनाया गया है। इसके भीतर मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ भगवान शिव की प्रतिमा और उनकी जटाओं की आकर्षक सजावट की गई है। गुफा की बनावट, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और विशेष सजावट लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। दुर्गा पूजा के दौरान यहां दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। ग्रामीणों को शिवखोरी का अहसास कराने की पहल दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष अंजनी कुमार सिन्हा ने बताया कि समिति के लोगों ने ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं को शिवखोरी गुफा मंदिर का अहसास कराने के उद्देश्य से इस बार यह विशेष पंडाल बनाने का संकल्प लिया था। जम्मू जाकर मंदिर के दर्शन करने में दूरी और खर्च की परेशानी होती है। ऐसे में गांव में ही शिवखोरी गुफा की तर्ज पर पंडाल बनाकर लोगों को दर्शन का अवसर देने का प्रयास किया गया है। मंदिर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुफा उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव से वरदान प्राप्त करने के बाद भस्मासुर उन्हीं को भस्म करने के लिए दौड़ा था। इस दौरान भगवान शिव ने शिवखोरी गुफा में शरण ली थी। इसी धार्मिक प्रसंग को ध्यान में रखकर गुफा की थीम पर पंडाल तैयार किया गया है। समिति के सदस्यों के अनुसार, शिवखोरी गुफा मंदिर माता वैष्णो देवी के मंदिर से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गांव में पहली बार बना ऐसा भव्य पंडाल धरमपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का भव्य और अनोखा पंडाल पहली बार तैयार किया गया है। इसकी चर्चा आसपास के इलाकों में भी हो रही है। स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु इसे देखने पहुंच रहे हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर तैयार यह पंडाल धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में पर्यटन और सांस्कृतिक आकर्षण का भी केंद्र बन गया है।  

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