जमुई का मोहनपुर गांव अब बिहार को सस्ती बिजली देने में खास भूमिका निभा रहा है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के मोहनपुर का यह सोलर पावर प्लांट हर दिन सूरज की रोशनी से बिजली बना रहा है। करीब 342 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना की क्षमता 75 मेगावाट है। यहां बनी बिजली बिहार सरकार के बिजली विभाग को 2.96 रुपए प्रति यूनिट की दर से मिल रही है। बिजली मंत्रालय की कंपनी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने इसे बनाया है। इस प्लांट से सालाना करीब 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। मोहनपुर में लगभग 300 एकड़ जमीन पर यह प्लांट लगा है। इसमें 550 वाट क्षमता के करीब 1.90 लाख सोलर पैनल लगे हैं। इन पैनलों से डीसी बिजली बनती है, जिसे 14 बड़े इनवर्टर एसी बिजली में बदलते हैं। फिर इसे ग्रिड से जोड़ा जाता है। मोहनपुर में बनी बिजली झाझा स्थित पावर ग्रिड तक भेजी जाती है। वहां से 132 केवी की बिजली व्यवस्था से जमुई समेत बिहार के कई इलाकों में सप्लाई होती है। यह सस्ती दर राज्य को बिजली उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर सौर ऊर्जा के जरिए बिजली उत्पादन होने से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलता है। यह परियोजना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब बिजली की मांग पूरी करने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। मोहनपुर सोलर प्लांट का लाभ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इस परियोजना से रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। कंपनी स्तर पर करीब 20 लोग कार्यरत हैं, जबकि एजेंसी के माध्यम से लगभग 100 लोग काम कर रहे हैं। इस तरह परियोजना में करीब 120 लोगों को रोजगार मिला है। प्लांट के संचालन और रखरखाव से जुड़े कार्यों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान मोहनपुर का सोलर पावर प्लांट दिखाता है कि बिहार में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है। 342 करोड़ रुपए की परियोजना, 75 मेगावाट की क्षमता और सालाना 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान इसे महत्वपूर्ण बनाता है। सस्ती बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और रोजगार के अवसरों के कारण यह परियोजना जमुई के साथ-साथ राज्य के विकास में भी योगदान दे रही है। जमुई का मोहनपुर गांव अब बिहार को सस्ती बिजली देने में खास भूमिका निभा रहा है। लक्ष्मीपुर प्रखंड के मोहनपुर का यह सोलर पावर प्लांट हर दिन सूरज की रोशनी से बिजली बना रहा है। करीब 342 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस परियोजना की क्षमता 75 मेगावाट है। यहां बनी बिजली बिहार सरकार के बिजली विभाग को 2.96 रुपए प्रति यूनिट की दर से मिल रही है। बिजली मंत्रालय की कंपनी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने इसे बनाया है। इस प्लांट से सालाना करीब 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। मोहनपुर में लगभग 300 एकड़ जमीन पर यह प्लांट लगा है। इसमें 550 वाट क्षमता के करीब 1.90 लाख सोलर पैनल लगे हैं। इन पैनलों से डीसी बिजली बनती है, जिसे 14 बड़े इनवर्टर एसी बिजली में बदलते हैं। फिर इसे ग्रिड से जोड़ा जाता है। मोहनपुर में बनी बिजली झाझा स्थित पावर ग्रिड तक भेजी जाती है। वहां से 132 केवी की बिजली व्यवस्था से जमुई समेत बिहार के कई इलाकों में सप्लाई होती है। यह सस्ती दर राज्य को बिजली उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। पर्यावरण संरक्षण पर दिया जोर सौर ऊर्जा के जरिए बिजली उत्पादन होने से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलता है। यह परियोजना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब बिजली की मांग पूरी करने के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। मोहनपुर सोलर प्लांट का लाभ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। इस परियोजना से रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। कंपनी स्तर पर करीब 20 लोग कार्यरत हैं, जबकि एजेंसी के माध्यम से लगभग 100 लोग काम कर रहे हैं। इस तरह परियोजना में करीब 120 लोगों को रोजगार मिला है। प्लांट के संचालन और रखरखाव से जुड़े कार्यों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान मोहनपुर का सोलर पावर प्लांट दिखाता है कि बिहार में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है। 342 करोड़ रुपए की परियोजना, 75 मेगावाट की क्षमता और सालाना 9 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान इसे महत्वपूर्ण बनाता है। सस्ती बिजली, नवीकरणीय ऊर्जा और रोजगार के अवसरों के कारण यह परियोजना जमुई के साथ-साथ राज्य के विकास में भी योगदान दे रही है।

