जगराओं बस अड्डे पर हुड़दंगबाजी से परेशान बस ऑपरेटर:बोले- कुछ युवक-युवतियां कुर्सियों किए रहते कब्जा, विरोध करने पर देते धमकी

जगराओं बस अड्डे पर हुड़दंगबाजी से परेशान बस ऑपरेटर:बोले- कुछ युवक-युवतियां कुर्सियों किए रहते कब्जा, विरोध करने पर देते धमकी

लुधियाना जिले के जगराओं बस अड्डे पर दिनभर जमावड़ा लगाने वाले असामाजिक तत्वों और युवक-युवतियों की कथित हुड़दंगबाजी से मिनी बस ऑपरेटर बेहद परेशान हैं। इस स्थिति से तंग आकर मिनी बस ऑपरेटरों ने पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों सहित वरिष्ठ पुलिस कप्तान (SSP) जगराओं को लिखित शिकायत सौंपकर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। पुलिस को भेजी शिकायत में बस ऑपरेटरों ने बताया कि कुछ युवक-युवतियां दिनभर बस अड्डे पर बनी कुर्सियों और शेडों पर बेवजह कब्जा जमाकर बैठे रहते हैं। इसके कारण दूर-दराज जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं व बुजुर्गों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। ऑपरेटरों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये तत्व बस अड्डे में नशा करते हैं और विरोध करने पर यात्रियों व बस चालकों-कंडक्टरों के साथ अमर्यादित व बुरा बर्ताव करते हैं। तेजधार हथियार और बसें रोकने की धमकियां शिकायत में यह खुलासा भी किया गया है कि हुड़दंगबाजी करने वाले कुछ युवकों के पास तेजधार हथियार भी मौजूद रहते हैं। जब बस ऑपरेटर या कर्मचारी उन्हें सार्वजनिक स्थान पर ऐसा करने से रोकते हैं, तो वे गाली-गलौज पर उतर आते हैं। इसके अलावा वे बसों को रास्ते में जबरन रोकने और देख लेने की धमकियां भी देते हैं, जिससे ऑपरेटरों में भारी रोष और डर का माहौल है। 26 सितंबर को फैली अफवाह का किया जिक्र ऑपरेटरों ने अपनी शिकायत में बीते 26 सितंबर 2026 को बस अड्डे में गोली चलने की फैली अफवाह का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि गोली चलने की खबर पूरी तरह गलत और झूठी निकली थी, लेकिन बस अड्डे के मौजूदा माहौल को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। ऑपरेटरों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि बस अड्डे में विशेष निगरानी बढ़ाई जाए। पुलिसकर्मी तैनात करने की मांग, दी चेतावनी बस ऑपरेटरों ने एसएसपी जगराओं से मांग की है कि बस अड्डे पर स्थायी रूप से पुलिस कर्मचारियों की तैनाती की जाए ताकि असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन संदिग्ध युवकों की हुड़दंगबाजी और धमकियों पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो बस ऑपरेटरों को मजबूरन कड़ा रुख अपनाने और संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए विवश होना पड़ेगा।

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