मेरठ में प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान की रजिस्ट्री और कब्जा दिलाने के नाम पर छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए आवास एवं विकास परिषद के आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा की नौकरी पर संकट गहरा गया है। एंटी करप्शन टीम की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद परिषद के अफसरों ने मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही उस सेवा प्रदाता कंपनी मैसर्स निर्वाण ग्रुप को भी भेज दी है, जिसके माध्यम से अभिनव को परिषद में तैनात किया गया था। अब उसके खिलाफ कार्रवाई का अगला कदम सेवा प्रदाता फर्म को उठाना है। डिप्टी हाउसिंग कमिश्नर अनिल कुमार सिंह ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ भेजी है। रिपोर्ट में अभिनव के रिश्वत लेते पकड़े जाने और उसके खिलाफ हुई कार्रवाई का ब्योरा शामिल है। इसी रिपोर्ट को आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी को भी भेजा गया है। विभागीय स्तर पर अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों को भी भ्रष्टाचार के मामलों में किसी तरह की संलिप्तता से बचने की चेतावनी दी गई है। 76 हजार जमा, फिर भी रजिस्ट्री अटकी
किनानगर निवासी रंजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जागृति विहार क्षेत्र में फरवरी में मकान आवंटित हुआ था। आवंटन के बाद रंजना ने निर्धारित शर्तों के अनुसार करीब 76 हजार रुपये और कुछ किश्तें भी जमा कर दी थीं। इसके बावजूद मकान की रजिस्ट्री और कब्जे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। रंजना ने विभाग में संपर्क किया तो वहां आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव शर्मा से संपर्क हुआ। आरोप है कि अभिनव ने रजिस्ट्री और कब्जे की प्रक्रिया कराने के एवज में छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी। रंजना ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी। कार्यालय में ही बिछा जाल, छह हजार लेते पकड़ा
शिकायत के सत्यापन के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और अभिनव शर्मा को छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच अब अपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रही है। अभिनव की गिरफ्तारी के बाद आवास विकास परिषद कार्यालय में भी खलबली मच गई। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी है, जबकि सेवा प्रदाता फर्म को भी कार्रवाई के लिए अवगत कराया गया है। विभाग नहीं, फर्म लेगी नौकरी पर फैसला
अभिनव परिषद का नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि आउटसोर्स कर्मचारी है। इसलिए उसकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया नियमित सरकारी कर्मचारी की तरह विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई से नहीं चलेगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह मैसर्स निर्वाण ग्रुप के माध्यम से परिषद को उपलब्ध कराया गया था। ऐसे में उसके सेवा संबंधी मामले में संबंधित सेवा प्रदाता फर्म की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी और सेवा प्रदाता एजेंसी के बीच सेवा संबंध होते हैं, जबकि सरकारी विभाग को एजेंसी के माध्यम से मैन पॉवर उपलब्ध कराया जाता है। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था को अब उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। एक फर्म के छह कर्मचारी, पांच अभी तैनात
मैसर्स निर्वाण ग्रुप ने आवास विकास परिषद को कुल छह कर्मचारी उपलब्ध कराए थे। इनमें अभिनव शर्मा भी शामिल था। गिरफ्तारी के बाद अभिनव के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जबकि इसी फर्म के पांच कर्मचारी अभी परिषद में सेवाएं दे रहे हैं। रिश्वत प्रकरण के बाद इन कर्मचारियों की भूमिका और आचरण को लेकर भी विभाग सतर्क हो गया है।

