छपरा सदर अस्पताल में पहली बार हुआ हिप रिप्लेसमेंट:फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर की बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी से सर्जरी, 65 साल के भारत राम को मिली नई जिंदगी

छपरा सदर अस्पताल में पहली बार हुआ हिप रिप्लेसमेंट:फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर की बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी से सर्जरी, 65 साल के भारत राम को मिली नई जिंदगी

सारण के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई। छपरा सदर अस्पताल में पहली बार कूल्हे की हड्डी के गंभीर फ्रैक्चर से जूझ रहे 65 वर्षीय मरीज का सफल हिप रिप्लेसमेंट किया गया। अमनौर के रहने वाले भारत राम को गिरने के बाद कूल्हे में गंभीर चोट लगी थी। जांच में फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर की पुष्टि हुई। उम्र और फ्रैक्चर की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट का निर्णय लिया। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम ने बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से ऑपरेशन किया। खास बात यह रही कि जिस सर्जरी के लिए निजी अस्पताल में मरीज के परिवार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती थी, उसका पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। जांच के बाद डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट का लिया निर्णय 65 वर्षीय भारत राम अमनौर के रहने वाले हैं। कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और चिकित्सकीय परीक्षण कराए। रिपोर्ट में कूल्हे के जोड़ के पास जांघ की हड्डी के हिस्से यानी नेक ऑफ फीमर में फ्रैक्चर सामने आया। मरीज की उम्र, फ्रैक्चर की स्थिति और आगे होने वाली संभावित जटिलताओं को देखते हुए डॉक्टरों ने केवल प्लास्टर या सामान्य उपचार के बजाय हिप रिप्लेसमेंट को बेहतर विकल्प माना। इसके बाद सर्जरी की तैयारी शुरू की गई। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि अमृत ने बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। वहीं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अमरेश कुमार ने ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया देने के साथ मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी की। विशेषज्ञ टीम की देखरेख में पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। क्या है नेक ऑफ फीमर फ्रैक्चर, बुजुर्गों के लिए क्यों गंभीर नेक ऑफ फीमर जांघ की हड्डी का वह हिस्सा है, जो कूल्हे के जोड़ के ठीक पास होता है। उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य रूप से गिरने या चोट लगने पर भी इस हिस्से में फ्रैक्चर हो सकता है। इस तरह के फ्रैक्चर को बुजुर्गों के लिए गंभीर माना जाता है। चोट लगने के बाद यदि मरीज लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है तो कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक चलने-फिरने में असमर्थता से शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने के साथ अन्य जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसी वजह से मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और फ्रैक्चर के प्रकार का आकलन करने के बाद डॉक्टर सर्जरी का निर्णय लेते हैं। भारत राम के मामले में भी चिकित्सकों ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हेमीआर्थ्रोप्लास्टी की। बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी से बदला कूल्हे का क्षतिग्रस्त जोड़ हेमीआर्थ्रोप्लास्टी हिप रिप्लेसमेंट की एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें कूल्हे के जोड़ के क्षतिग्रस्त हिस्से को कृत्रिम इंप्लांट से बदला जाता है। बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी में कृत्रिम सिर वाला हिस्सा इस तरह डिजाइन किया जाता है कि जोड़ के भीतर गति हो सके। भारत राम की सर्जरी में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन पूरा किया और सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया। आयुष्मान कार्ड ने परिवार का आर्थिक बोझ किया कम इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू इलाज का निःशुल्क होना रहा। भारत राम का ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इससे मरीज के परिवार को हिप रिप्लेसमेंट जैसी महंगी सर्जरी के लिए अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ी। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरीज के परिवार को ऑपरेशन, इंप्लांट, अस्पताल में भर्ती और दवाइयों समेत कई तरह के खर्च का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में आयुष्मान योजना के माध्यम से यह सुविधा मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत है। पहली बार सदर अस्पताल में ऐसी सर्जरी, सरकारी व्यवस्था के लिए अहम कदम छपरा सदर अस्पताल में पहली बार इस तरह की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का सफल होना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब गंभीर ऑर्थोपेडिक मामलों के इलाज के लिए मरीजों को हर बार पटना या दूसरे बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सारण के अलावा आसपास के जिलों के मरीजों को भी इसका लाभ मिल सकता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आयुष्मान योजना के जरिए ऐसी सर्जरी उपलब्ध होना राहत की बात है। ऑपरेशन के बाद स्थिर है मरीज की हालत, अब फिजियोथेरेपी पर जोर सर्जरी के बाद भारत राम की हालत स्थिर बताई गई है। डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। ऑपरेशन के बाद रिकवरी के दौरान चिकित्सकीय देखभाल के साथ फिजियोथेरेपी भी महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे मरीज को चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों की ओर वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उम्रदराज मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट के बाद नियमित फिजियोथेरेपी और चिकित्सकीय सलाह का पालन रिकवरी के लिए अहम माना जाता है। छपरा सदर अस्पताल में हुई यह सर्जरी सिर्फ एक मरीज के सफल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। यह सारण के सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले समय में यदि ऐसी सुविधाएं लगातार उपलब्ध रहती हैं तो गंभीर हड्डी और जोड़ संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। सारण के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ी उपलब्धि जुड़ गई। छपरा सदर अस्पताल में पहली बार कूल्हे की हड्डी के गंभीर फ्रैक्चर से जूझ रहे 65 वर्षीय मरीज का सफल हिप रिप्लेसमेंट किया गया। अमनौर के रहने वाले भारत राम को गिरने के बाद कूल्हे में गंभीर चोट लगी थी। जांच में फ्रैक्चर नेक ऑफ फीमर की पुष्टि हुई। उम्र और फ्रैक्चर की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट का निर्णय लिया। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम ने बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से ऑपरेशन किया। खास बात यह रही कि जिस सर्जरी के लिए निजी अस्पताल में मरीज के परिवार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती थी, उसका पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। जांच के बाद डॉक्टरों ने हिप रिप्लेसमेंट का लिया निर्णय 65 वर्षीय भारत राम अमनौर के रहने वाले हैं। कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें इलाज के लिए छपरा सदर अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में चिकित्सकों ने आवश्यक जांच और चिकित्सकीय परीक्षण कराए। रिपोर्ट में कूल्हे के जोड़ के पास जांघ की हड्डी के हिस्से यानी नेक ऑफ फीमर में फ्रैक्चर सामने आया। मरीज की उम्र, फ्रैक्चर की स्थिति और आगे होने वाली संभावित जटिलताओं को देखते हुए डॉक्टरों ने केवल प्लास्टर या सामान्य उपचार के बजाय हिप रिप्लेसमेंट को बेहतर विकल्प माना। इसके बाद सर्जरी की तैयारी शुरू की गई। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. रवि अमृत ने बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी तकनीक से सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। वहीं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अमरेश कुमार ने ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया देने के साथ मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी की। विशेषज्ञ टीम की देखरेख में पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी हुई। क्या है नेक ऑफ फीमर फ्रैक्चर, बुजुर्गों के लिए क्यों गंभीर नेक ऑफ फीमर जांघ की हड्डी का वह हिस्सा है, जो कूल्हे के जोड़ के ठीक पास होता है। उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। ऐसे में सामान्य रूप से गिरने या चोट लगने पर भी इस हिस्से में फ्रैक्चर हो सकता है। इस तरह के फ्रैक्चर को बुजुर्गों के लिए गंभीर माना जाता है। चोट लगने के बाद यदि मरीज लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है तो कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक चलने-फिरने में असमर्थता से शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने के साथ अन्य जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसी वजह से मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और फ्रैक्चर के प्रकार का आकलन करने के बाद डॉक्टर सर्जरी का निर्णय लेते हैं। भारत राम के मामले में भी चिकित्सकों ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हेमीआर्थ्रोप्लास्टी की। बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी से बदला कूल्हे का क्षतिग्रस्त जोड़ हेमीआर्थ्रोप्लास्टी हिप रिप्लेसमेंट की एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें कूल्हे के जोड़ के क्षतिग्रस्त हिस्से को कृत्रिम इंप्लांट से बदला जाता है। बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी में कृत्रिम सिर वाला हिस्सा इस तरह डिजाइन किया जाता है कि जोड़ के भीतर गति हो सके। भारत राम की सर्जरी में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन पूरा किया और सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया। आयुष्मान कार्ड ने परिवार का आर्थिक बोझ किया कम इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू इलाज का निःशुल्क होना रहा। भारत राम का ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। इससे मरीज के परिवार को हिप रिप्लेसमेंट जैसी महंगी सर्जरी के लिए अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च नहीं करनी पड़ी। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरीज के परिवार को ऑपरेशन, इंप्लांट, अस्पताल में भर्ती और दवाइयों समेत कई तरह के खर्च का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में आयुष्मान योजना के माध्यम से यह सुविधा मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत है। पहली बार सदर अस्पताल में ऐसी सर्जरी, सरकारी व्यवस्था के लिए अहम कदम छपरा सदर अस्पताल में पहली बार इस तरह की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी का सफल होना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अब गंभीर ऑर्थोपेडिक मामलों के इलाज के लिए मरीजों को हर बार पटना या दूसरे बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सारण के अलावा आसपास के जिलों के मरीजों को भी इसका लाभ मिल सकता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और आयुष्मान योजना के जरिए ऐसी सर्जरी उपलब्ध होना राहत की बात है। ऑपरेशन के बाद स्थिर है मरीज की हालत, अब फिजियोथेरेपी पर जोर सर्जरी के बाद भारत राम की हालत स्थिर बताई गई है। डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। ऑपरेशन के बाद रिकवरी के दौरान चिकित्सकीय देखभाल के साथ फिजियोथेरेपी भी महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे मरीज को चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों की ओर वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उम्रदराज मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट के बाद नियमित फिजियोथेरेपी और चिकित्सकीय सलाह का पालन रिकवरी के लिए अहम माना जाता है। छपरा सदर अस्पताल में हुई यह सर्जरी सिर्फ एक मरीज के सफल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। यह सारण के सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले समय में यदि ऐसी सुविधाएं लगातार उपलब्ध रहती हैं तो गंभीर हड्डी और जोड़ संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिल सकेगा।  

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