बेतिया की मझौलिया-महनागन्नी मुख्य सड़क का शिलान्यास 6 महीने पहले हुआ था, लेकिन इसकी स्थिति अब भी बदहाल है। इस सड़क के साथ कई अन्य छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण और विकास कार्यों का भी शिलान्यास किया गया था, पर उनमें भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है। मझौलिया और चैलाभार को जोड़ने वाली इन प्रमुख सड़कों पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। सड़क की सतह जर्जर हो चुकी है और गिट्टियां उखड़ गई हैं, जिससे राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। दिन में वाहन चालक सावधानी से निकलते हैं, लेकिन रात के समय यह मार्ग अधिक खतरनाक हो जाता है। रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था न होने के कारण गड्ढे स्पष्ट दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए कई बार आश्वासन दिए गए थे। शिलान्यास के समय लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी यह समस्या अब हल हो जाएगी, लेकिन छह माह बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव से पूर्व विकास के दावे और शिलान्यास तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य की गति धीमी है। मझौलिया और चैलाभार की यह बदहाल सड़क क्षेत्र में विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति पर सवाल उठा रही है। निवासियों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से जल्द सड़क का निर्माण कराने तथा गड्ढों को भरकर आवागमन सुचारु करने की मांग की है। बेतिया की मझौलिया-महनागन्नी मुख्य सड़क का शिलान्यास 6 महीने पहले हुआ था, लेकिन इसकी स्थिति अब भी बदहाल है। इस सड़क के साथ कई अन्य छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण और विकास कार्यों का भी शिलान्यास किया गया था, पर उनमें भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है। मझौलिया और चैलाभार को जोड़ने वाली इन प्रमुख सड़कों पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। सड़क की सतह जर्जर हो चुकी है और गिट्टियां उखड़ गई हैं, जिससे राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। दिन में वाहन चालक सावधानी से निकलते हैं, लेकिन रात के समय यह मार्ग अधिक खतरनाक हो जाता है। रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था न होने के कारण गड्ढे स्पष्ट दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और गंभीर हो जाती है, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क के निर्माण और जीर्णोद्धार के लिए कई बार आश्वासन दिए गए थे। शिलान्यास के समय लोगों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी यह समस्या अब हल हो जाएगी, लेकिन छह माह बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव से पूर्व विकास के दावे और शिलान्यास तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य की गति धीमी है। मझौलिया और चैलाभार की यह बदहाल सड़क क्षेत्र में विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति पर सवाल उठा रही है। निवासियों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से जल्द सड़क का निर्माण कराने तथा गड्ढों को भरकर आवागमन सुचारु करने की मांग की है।


