चक्रवात से कटिहार में खेतों की जुताई पर असर:किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने की सलाह

चक्रवात से कटिहार में खेतों की जुताई पर असर:किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने की सलाह

कटिहार में अर्णव चक्रवात के कारण मौसम बदल रहा है। बादल छाने और रुक-रुककर बूंदाबांदी से खेतों की जुताई और समतलीकरण पर असर पड़ा है। किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसान रबी की मुख्य फसल मक्का की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन खेतों में ज्यादा नमी के कारण वे समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, खरीफ धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार है। स्थानीय मौसम देखकर खेती के काम करने की सलाह बारिश होने पर धान की कटाई, सुखाने और भंडारण में परेशानी हो सकती है। किसानों को आशंका है कि मक्का की बुवाई में देरी से उत्पादन घट सकता है और धान की गुणवत्ता खराब होने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने और स्थानीय मौसम देखकर खेती के काम करने की सलाह दी है। एक स्थानीय किसान के अनुसार, मक्का की अच्छी पैदावार के लिए समय पर खेत तैयार करना जरूरी है। लगातार नमी के कारण ट्रैक्टर से जुताई नहीं हो पा रही है। धान की फसल पर भी मौसम का असर तेज बारिश से खेतों में पानी भर सकता है और मक्का की बुवाई में पखवाड़े भर की देरी हो सकती है। इससे फसल चक्र और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। तैयार धान की फसल पर भी मौसम का असर पड़ सकता है। राजीव कुमार ने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को राज्यभर में मौसम खराब रह सकता है। 31 अक्टूबर को भी मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका है। पानी निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह उन्होंने किसानों से स्थानीय मौसम देखकर धान की कटाई, दौनी, सुखाने और सुरक्षित भंडारण की योजना बनाने को कहा। मक्का, गेहूं, मसूर और सरसों की बुवाई करने वाले किसानों को मिट्टी की नमी जांचने और पानी निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह दी। उन्होंने अनावश्यक सिंचाई से बचने और मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने को भी कहा। कटिहार में अर्णव चक्रवात के कारण मौसम बदल रहा है। बादल छाने और रुक-रुककर बूंदाबांदी से खेतों की जुताई और समतलीकरण पर असर पड़ा है। किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। किसान रबी की मुख्य फसल मक्का की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन खेतों में ज्यादा नमी के कारण वे समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, खरीफ धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार है। स्थानीय मौसम देखकर खेती के काम करने की सलाह बारिश होने पर धान की कटाई, सुखाने और भंडारण में परेशानी हो सकती है। किसानों को आशंका है कि मक्का की बुवाई में देरी से उत्पादन घट सकता है और धान की गुणवत्ता खराब होने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने किसानों को 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने और स्थानीय मौसम देखकर खेती के काम करने की सलाह दी है। एक स्थानीय किसान के अनुसार, मक्का की अच्छी पैदावार के लिए समय पर खेत तैयार करना जरूरी है। लगातार नमी के कारण ट्रैक्टर से जुताई नहीं हो पा रही है। धान की फसल पर भी मौसम का असर तेज बारिश से खेतों में पानी भर सकता है और मक्का की बुवाई में पखवाड़े भर की देरी हो सकती है। इससे फसल चक्र और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। तैयार धान की फसल पर भी मौसम का असर पड़ सकता है। राजीव कुमार ने बताया कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को राज्यभर में मौसम खराब रह सकता है। 31 अक्टूबर को भी मेघगर्जन और वज्रपात की आशंका है। पानी निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह उन्होंने किसानों से स्थानीय मौसम देखकर धान की कटाई, दौनी, सुखाने और सुरक्षित भंडारण की योजना बनाने को कहा। मक्का, गेहूं, मसूर और सरसों की बुवाई करने वाले किसानों को मिट्टी की नमी जांचने और पानी निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह दी। उन्होंने अनावश्यक सिंचाई से बचने और मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने को भी कहा।  

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