चक्रवात प्रभावित किसानों को राहत देने में नाकाम नायडू सरकार, YSRCP नेता कन्नाबाबू ने उठाए सवाल

चक्रवात प्रभावित किसानों को राहत देने में नाकाम नायडू सरकार, YSRCP नेता कन्नाबाबू ने उठाए सवाल

Chandrababu Naidu Government: आंध्र प्रदेश में चक्रवात से प्रभावित किसानों और परिवारों को राहत देने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के क्षेत्रीय समन्वयक कुरासाला कन्नाबाबू ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार पर प्रभावित लोगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार जमीन पर राहत पहुंचाने के बजाय समीक्षा बैठकों, तस्वीरों और वीडियो पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

गुरुवार को काकीनाडा स्थित अपने कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कन्नाबाबू ने सवाल उठाया कि चक्रवात को लेकर पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद प्रभावित इलाकों में मंत्रियों को क्यों नहीं भेजा गया। उन्होंने सरकार की राहत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को वास्तविक मदद देने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

फसल नुकसान की तस्वीरें ऐप पर अपलोड करने के निर्देश पर सवाल

कन्नाबाबू ने किसानों से फसल नुकसान की तस्वीरें एक ऐप के जरिए अपलोड करने के निर्देश की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया कि कितने किसानों को ऐप इस्तेमाल करने की तकनीकी जानकारी है और अगर किसानों को खुद ही नुकसान का विवरण दर्ज करना है, तो कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि चक्रवात से प्रभावित किसानों को राहत देने की जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की है। ऐसे में किसानों पर तकनीकी प्रक्रिया का अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय अधिकारियों को प्रभावित खेतों तक पहुंचकर नुकसान का आकलन करना चाहिए।

मुआवजा देने की समयसीमा घोषित करने की मांग

YSRCP नेता ने राज्य सरकार से चक्रवात प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए स्पष्ट समयसीमा घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को यह पता होना चाहिए कि उन्हें राहत राशि कब तक मिलेगी। कन्नाबाबू ने धान किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में 14 नवंबर 2023 को जारी सरकारी आदेश संख्या 5 (G.O. No. 5) के तहत संशोधित सहायता मानकों के अनुसार किसानों को राहत दी जानी चाहिए।

8.30 लाख एकड़ में फसल नुकसान का अनुमान

कन्नाबाबू के अनुसार, सरकार ने लगभग 8.30 लाख एकड़ क्षेत्र में फसल नुकसान का अनुमान लगाया है। इसमें करीब 7.60 लाख एकड़ में धान की फसल प्रभावित होने की बात कही गई है। उन्होंने सवाल किया कि जब इतने बड़े क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचने का अनुमान है, तो धान किसानों के लिए मुआवजे की राशि क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है। उन्होंने सरकार से प्रभावित किसानों की स्थिति को देखते हुए पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की अपील की।

जगन मोहन रेड्डी सरकार के कार्यकाल का किया जिक्र

कन्नाबाबू ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान लागू की गई योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय रायथु भरोसा केंद्रों (Rythu Bharosa Kendras) के माध्यम से फसलों का पंजीकरण किया जाता था और किसानों को मुफ्त फसल बीमा की सुविधा दी गई थी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों को प्रति एकड़ 23,000 से 29,000 रुपये तक बीमा मुआवजा दिया गया था। उनके मुताबिक, पिछली सरकार में अगली फसल के मौसम से पहले इनपुट सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जाती थी। कन्नाबाबू ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अपने हिस्से का बीमा प्रीमियम जमा करने में विफल रही है, जिसके कारण किसानों को प्रभावी मुफ्त फसल बीमा और समय पर इनपुट सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, ये आरोप YSRCP नेता ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित सरकारी आंकड़ों से की जानी बाकी है।

मछुआरों और जलीय कृषि करने वालों के लिए भी मांगी राहत

कन्नाबाबू ने कहा कि चक्रवात से प्रभावित केवल कृषि क्षेत्र ही नहीं, बल्कि मछुआरों और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) से जुड़े लोगों को भी नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की कि जिन मछुआरों की नावें और जाल क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, उन्होंने उन एक्वाकल्चर किसानों को भी आर्थिक सहायता देने की मांग की, जिनके तालाबों को नुकसान पहुंचा है या बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण उनका कारोबार प्रभावित हुआ है।

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