चंदौली जिला मुख्यालय को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए गए दो दिवसीय अभियान का असर अभियान खत्म होते ही खत्म होता नजर आ रहा है। कार्रवाई के दौरान हटाए गए अतिक्रमण के स्थानों पर दोबारा कब्जा हो गया है। सड़कों और फुटपाथों पर फिर से दुकानदारों और ठेले-खोमचे वालों ने जगह घेर ली है। अतिक्रमण की वजह से राहगीरों और वाहन चालकों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। अभियान के तुरंत बाद ही स्थिति पहले जैसी होने से प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुरानी बाजार में बड़े अधिकारियों के बंगलों के सामने से लेकर जिला अस्पताल और कचहरी तक कई स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण दिखाई दे रहा है। दुकानदार और ठेले-खोमचे वाले सड़क और फुटपाथ के हिस्से में कब्जा जमाए हुए हैं। सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण आवागमन का रास्ता संकरा हो गया है। खासकर जिला अस्पताल और कचहरी के आसपास अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। इससे मरीजों, तीमारदारों, कर्मचारियों और आम राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों ने कार्रवाई को बताया खानापूर्ति स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की जाती। कार्रवाई के कुछ समय बाद ही अतिक्रमणकारी दोबारा उसी स्थान पर कब्जा कर लेते हैं। लोगों का कहना है कि केवल अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित निगरानी की जरूरत है, ताकि दोबारा कब्जा न हो सके। नियमित निगरानी और कड़ी कार्रवाई की मांग स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित न रखने की मांग की है। उन्होंने अभियान के बाद नियमित निगरानी कराने और दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि जिला मुख्यालय की सड़कों और फुटपाथों पर आवागमन सुचारु रह सके। है।

