ग्वालियर नगर निगम परिषद का विशेष सम्मेलन शुक्रवार को DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) पर विवादों में घिर गया। भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने DPC में नियमों की अनदेखी और अनियमितताओं के आरोप लगाए। हालांकि, उनकी ही पार्टी के अन्य पार्षदों ने इसका विरोध किया। उन्होंने DPC के बजाय शहर की सड़क, पानी, बिजली और दीपावली पर सफाई जैसे मुद्दों को ज्यादा जरूरी बताया। सदन में आपसी मतभेद बढ़ने पर सभापति मनोज सिंह तोमर ने बैठक 29 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी। बृजेश श्रीवास ने आरोप लगाया कि DPC में पैसे का लेन-देन हुआ और पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित रखा गया। भाजपा पार्षद अपर्णा पाटील ने सवाल उठाया कि जब मामला हाईकोर्ट में है, तो सदन में चर्चा क्यों? एमआईसी सदस्य देवेंद्र कौरव ने DPC प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह विभागीय जांच के बाद शासन को भेजी जाती है। सभापति बोले- जल्दबाजी में निर्णय उचित नहीं सभापति मनोज सिंह तोमर ने कहा कि विशेष सम्मेलन बुलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों सहित प्रभारी सदस्यों के हस्ताक्षर थे। 28 पार्षदों ने लिखित में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कराने की मांग की थी। पार्षदों का कहना था कि जांच के नाम पर कई अधिकारी-कर्मचारियों की DPC रोकी गई, जिससे उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान विरोधाभास की स्थिति बनने पर पार्षदों को विषय का और अध्ययन करने का समय देना उचित समझा गया। निगम के अधिकारी-कर्मचारी परिवार के सदस्य हैं और सभी को नियमानुसार पदोन्नति मिलनी चाहिए।
29 अक्टूबर को फिर होगी चर्चा परिषद की बैठक में पहले ही मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच मतभेद सामने आ गए। DPC में कथित अनियमितताओं की जांच और कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर उठे सवालों के बीच बैठक स्थगित करनी पड़ी। अब 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक में देखना होगा कि पार्षद इस मुद्दे पर एकमत हो पाते हैं या फिर सदन में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है।

