गोरखपुर में शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य विभाग, एम्स गोरखपुर और जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं और प्रसव के बाद महिलाओं की मौत क्यों होती है और इसे कैसे रोका जा सकता है? इन सवालों को लेकर समीक्षा बैठक की। इसमें मातृ मृत्यु के कारणों पर चर्चा की गई। साथ ही यह तय किया गया कि गंभीर हालत में गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज मिले और अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें। बैठक में सभी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया। मातृ मृत्यु के कारणों पर हुई चर्चा बैठक में स्वास्थ्य विभाग, एम्स गोरखपुर और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट और अनुभव साझा किए। इसमें उन कारणों पर चर्चा हुई, जिनकी वजह से गर्भवती महिलाओं की हालत गंभीर हो जाती है। डॉक्टरों ने कहा कि गर्भावस्था, प्रसव और बच्चे के जन्म के बाद होने वाले खतरे के लक्षणों को समय पर पहचानना जरूरी है। इसके लिए महिलाओं और उनके परिवारों को जागरूक किया जाएगा, ताकि परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचा जा सके। रेफर होने के बाद भी मरीज की होगी निगरानी बैठक में मातृ सेवा कार्यक्रम के कामकाज की भी जानकारी दी गई। यह कार्यक्रम 21 मई 2026 को शुरू हुआ था। इसके तहत गंभीर हालत वाली गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल में भेजने के बाद भी उसकी निगरानी की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला के इलाज और सुरक्षित प्रसव के लिए मदद करती है। विभाग के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत अब तक 1008 मामले रेफर किए जा चुके हैं। खून और वेंटिलेटर की सुविधा पर जोर डॉक्टरों ने कहा कि प्रसव के दौरान जरूरत पड़ने पर महिला को समय से खून मिलना जरूरी है। इसके लिए स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही स्त्री रोग विशेषज्ञों को अल्ट्रासाउंड की ट्रेनिंग देने और अस्पतालों के वार्डों में वेंटिलेटर की व्यवस्था बेहतर करने पर भी चर्चा हुई। इन सुविधाओं से गंभीर हालत में पहुंचने वाली महिलाओं को समय पर इलाज देने में मदद मिलेगी। तीन महीने में मातृ मृत्यु के मामले घटकर 19 हुए स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मातृ सेवा कार्यक्रम के तहत करीब तीन महीने में मातृ मृत्यु के मामले 50 के मुकाबले घटकर 19 रह गए। इस काम में योगदान देने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया गया। CMO डॉ. राजेश झा ने कहा कि मातृ मृत्यु रोकने के लिए सभी अस्पतालों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि हर तीन महीने में कार्यक्रम की समीक्षा होगी और अच्छा काम करने वाले डॉक्टरों व कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। बैठक में एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. रूमा, जिला महिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके झा, डीपीएम पंकज आनंद सहित कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

