गोपालगंज में 188 भूमिहीन-भवनहीन स्कूलों पर प्रशासन सख्त:1 सप्ताह में जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश, 37 स्कूलों को भूमि मिल चुकी

गोपालगंज में 188 भूमिहीन-भवनहीन स्कूलों पर प्रशासन सख्त:1 सप्ताह में जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश, 37 स्कूलों को भूमि मिल चुकी

गोपालगंज में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जिले के 188 भूमिहीन और भवनहीन विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा करते हुए भवन निर्माण और भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। 188 स्कूलों को जमीन और भवन की सुविधा देने पर जोर जिन विद्यालयों के पास अपनी जमीन या भवन नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराकर शिफ्ट करने या नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समीक्षा में सामने आया कि 37 विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। इनमें 17 नए प्राथमिक विद्यालय और 20 अपग्रेड किए गए हाई स्कूल शामिल हैं। 1 सप्ताह में जमीन की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश डीएम ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एसएसए) और जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित अंचलाधिकारियों के साथ समन्वय कर काम करने को कहा। उन्होंने एक सप्ताह के अंदर भूमि उपलब्धता से संबंधित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि भवन निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। विषयवार शिक्षक नहीं तो स्मार्ट क्लास में होगी कठिन विषयों में कमजोर छात्रों की पढ़ाई सुधारने के लिए स्मार्ट क्लासरूम का इस्तेमाल किया जाएगा। जिन स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी है, वहां लाइव क्लास के जरिए विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ाई कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे दूर-दराज के विद्यालयों के छात्रों को भी विशेषज्ञ शिक्षकों की कक्षाओं का लाभ मिल सकेगा। शिक्षक-अधिकारी होंगे कार्रवाई के दायरे में डीएम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य से किसी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई की अचानक जांच जारी रहेगी। पढ़ाई में लापरवाही मिलने पर संबंधित शिक्षक और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेहतर काम करने वाले शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को चिन्हित कर प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया। जर्जर भवन, छत और शौचालय की होगी मरम्मत जिन स्कूलों के भवन, छत, शौचालय या दरवाजे खराब हैं, वहां तत्काल मरम्मत का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यालयों में पीने का पानी, चालू शौचालय, बाउंड्रीवॉल और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया। स्कूल परिसर के आसपास उगी झाड़ियों और जंगल की भी सफाई कराने को कहा गया। सैनिक स्कूल के निर्माण में गुणवत्ता पर सख्ती बैठक में सैनिक स्कूल कुचायकोट में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। डीएम ने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान गुणवत्ताविहीन निर्माण मिलने पर संबंधित अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गोपालगंज में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जिले के 188 भूमिहीन और भवनहीन विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा करते हुए भवन निर्माण और भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। 188 स्कूलों को जमीन और भवन की सुविधा देने पर जोर जिन विद्यालयों के पास अपनी जमीन या भवन नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जमीन उपलब्ध कराकर शिफ्ट करने या नया भवन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समीक्षा में सामने आया कि 37 विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है। इनमें 17 नए प्राथमिक विद्यालय और 20 अपग्रेड किए गए हाई स्कूल शामिल हैं। 1 सप्ताह में जमीन की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश डीएम ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एसएसए) और जिला शिक्षा पदाधिकारी को संबंधित अंचलाधिकारियों के साथ समन्वय कर काम करने को कहा। उन्होंने एक सप्ताह के अंदर भूमि उपलब्धता से संबंधित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि भवन निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। विषयवार शिक्षक नहीं तो स्मार्ट क्लास में होगी कठिन विषयों में कमजोर छात्रों की पढ़ाई सुधारने के लिए स्मार्ट क्लासरूम का इस्तेमाल किया जाएगा। जिन स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी है, वहां लाइव क्लास के जरिए विशेषज्ञ शिक्षकों से पढ़ाई कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे दूर-दराज के विद्यालयों के छात्रों को भी विशेषज्ञ शिक्षकों की कक्षाओं का लाभ मिल सकेगा। शिक्षक-अधिकारी होंगे कार्रवाई के दायरे में डीएम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य से किसी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील की गुणवत्ता और साफ-सफाई की अचानक जांच जारी रहेगी। पढ़ाई में लापरवाही मिलने पर संबंधित शिक्षक और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेहतर काम करने वाले शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को चिन्हित कर प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया। जर्जर भवन, छत और शौचालय की होगी मरम्मत जिन स्कूलों के भवन, छत, शौचालय या दरवाजे खराब हैं, वहां तत्काल मरम्मत का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यालयों में पीने का पानी, चालू शौचालय, बाउंड्रीवॉल और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया। स्कूल परिसर के आसपास उगी झाड़ियों और जंगल की भी सफाई कराने को कहा गया। सैनिक स्कूल के निर्माण में गुणवत्ता पर सख्ती बैठक में सैनिक स्कूल कुचायकोट में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। डीएम ने कहा कि निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान गुणवत्ताविहीन निर्माण मिलने पर संबंधित अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

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