गोंडा जिले में घाघरा और सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इससे बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कुछ कम हुई हैं और गांवों के किनारे से पानी भी हट रहा है। हालांकि, बाढ़ प्रभावित लोगों की परेशानियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। रविवार सुबह 9:30 बजे तक दोनों तहसीलों के 20 गांवों की करीब 18 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। तरबगंज तहसील क्षेत्र के ब्योन्दा माझा, ऐली परसौली, दत्तनगर जबर नगर और परास पट्टी पुरवा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां ग्रामीणों को आने-जाने और रोजमर्रा का जीवन जीने में काफी परेशानी हो रही है। नवाबगंज क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों को भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से होकर खोया बेचने जा रहे हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है।
पानी घटा तो तटीय इलाकों में कटान तेज नदी का जलस्तर घटने से घरों में पानी कम हो रहा है, लेकिन तटीय इलाकों में कटान तेज हो गई है। पिछले 24 घंटे में घाघरा नदी 10 बीघे से ज्यादा फसल और जमीन काट चुकी है। नवाबगंज थाना क्षेत्र के दत्तानगर और बाणीमाझा में कई छप्पर के मकान कटान की चपेट में आ गए हैं। इन मकानों के कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है।
ऐली परसौली गांव अभी भी बाढ़ से प्रभावित है। यहां लोगों के घरों और गांव के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। रविवार सुबह 9:30 बजे घाघरा नदी खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। तीन बैराजों से छोड़ा गया 3 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी रविवार को तीन बैराजों से 3,06,505 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गोंडा में घाघरा और सरयू नदी का जलस्तर लगातार घट रहा है।
गोंडा बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता जय सिंह ने बताया कि कटान रोकने का काम किया जा रहा है। तटबंधों पर भी निगरानी रखी जा रही है। गोंडा जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाढ़ को लेकर स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से बाढ़ के पानी से होकर न जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पानी में जीव-जंतु हो सकते हैं, इसलिए नाव का सहारा लेकर ही सुरक्षित तरीके से आवागमन करें।

