गोंडा जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों द्वारा छात्रों और अभिभावकों पर स्कूल या किसी खास दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव बनाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. रामचंद्र ने बुधवार 12 अगस्त को सभी निजी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए चेतावनी दी कि किसी भी छात्र या अभिभावक को किसी विशेष प्रतिष्ठान से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करना कानून का उल्लंघन है। ऐसा पाए जाने पर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कार्यालय जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार, जिला शुल्क नियामक समिति की 30 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में भी निजी विद्यालयों को इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ स्ववित्तपोषित विद्यालयों में किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, टिफिन और पानी की बोतलें विद्यालय या उससे जुड़ी निर्धारित दुकानों से खरीदने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। 5 लाख तक जुर्माना और मान्यता रद्द करने की संस्तुति जिला प्रशासन ने इस तरह की व्यवस्था को उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के अध्याय-2 की धारा-4 का उल्लंघन बताया है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर दोषी विद्यालय प्रबंधन पर 5 लाख रुपए तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसके साथ ही विद्यालय की मान्यता या संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति और संबंधित बोर्ड या परिषद से मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। विद्यालयों में पहुंचकर जांच कर रहा विभाग डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने स्पष्ट किया कि यह बाध्यकारी निर्देश है और अब किसी भी विद्यालय की ओर से मनमानी सामने आने पर जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन की होगी। विभाग की ओर से विद्यालयों में पहुंचकर जांच भी की जा रही है। इस दौरान अभिभावकों और छात्रों से बातचीत कर यह जानकारी ली जा रही है कि उन्हें किसी विशेष दुकान या विद्यालय से ही शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य तो नहीं किया जा रहा। मनमानी मिली तो प्रबंधन पर होगी कार्रवाई जिला विद्यालय निरीक्षक ने निजी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों और अभिभावकों को सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र रखें। यदि किसी विद्यालय में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो अधिनियम के तहत आर्थिक दंड के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन की होगी।


