गिरफ्तारी से पहले नोटिस नहीं दिया-जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई:कोर्ट ने कहा-7 साल तक की सजा के मामलों में नोटिस देना जरूरी, आरोपियों को दी जमानत

गिरफ्तारी से पहले नोटिस नहीं दिया-जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई:कोर्ट ने कहा-7 साल तक की सजा के मामलों में नोटिस देना जरूरी, आरोपियों को दी जमानत

झोटवाड़ा थाना क्षेत्र में सरस ब्रांड के नाम पर नकली पैकिंग सामग्री बनाने वाले दो आरोपियों को कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें जयपुर महानगर द्वितीय की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करके रिमांड मांगी थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने कानूनी प्रावधानों की पालना किए बिना आरोपियों को गिरफ्तार किया हैं। ऐसे में कोर्ट ने पुलिस रिमांड देने से इनकार करते हुए आरोपियों को तुरंत जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारी (एसीपी झोटवाड़ा) की घोर लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने के भी निर्देश दिए हैं। 7 साल तक की सजा के मामलों में नोटिस देना जरूरी
कोर्ट ने कहा कि अपवाद की स्थिति को छोड़कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत 7 साल तक की सजा के मामलों में आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले उसे नोटिस दिया जाना जरूरी हैं। लेकिन इस मामले में केस डायरी से ऐसा कोई आधार या पर्याप्त कारण जाहिर नहीं हुआ कि यह नोटिस क्यों नहीं दिया गया। अदालत ने इसे आरोपियों के विधिक व संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट हनन तथा अनुसंधानाधिकारी की ‘घोर लापरवाही’ माना। छापा मारकर की थी गिरफ्तारी
पुलिस थाना झोटवाड़ा में 29 सितंबर को दर्ज एफआईआर के अनुसार, सरस डेयरी जयपुर के गुणवत्ता नियंत्रण प्रभारी के मौखिक आदेश पर निवारू रोड, झोटवाड़ा स्थित एक स्थान पर औचक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान वहां सरस ब्रांड के नाम पर नकली मोनोकार्टन, पॉलिपैक, प्रिंटिंग मशीन और स्कैनर भारी मात्रा में तैयार किए जाते हुए पाए गए। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने नामजद आरोपी श्यामसुंदर उर्फ श्याम सिंह चौहान और प्रमोद कुमार खंडेलवाल को गिरफ्तार किया था।

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