गयाजी में पितृपक्ष मेले का आज(08 अक्टूबर 2026) 14वां दिन है। देश-विदेश से पिंडदान के लिए लगातार तीर्थ यात्री पहुंच रहे हैं। गुरुवार को रूस से पांच महिला श्रद्धालु देवघाट पहुंची। सनातनी वेशभूषा में जमीन पर बैठकर पूरे विधि-विधान से पिंडदान किया। अपने पितरों की मोक्ष और आत्मा की शांति की कामना की। फल्गु नदी के देवघाट पर विदेशी महिलाओं को सनातनी परंपरा के अनुसार कर्मकांड करते देख लोग भी कुछ देर के लिए ठहर गए। महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। पिंडदान की 2 तस्वीरें देखिए… जुलाई में इस्कॉन मंदिर आई थीं विदेशी महिलाएं इस्कॉन के पुजारी ने बताया कि जुलाई में रूस से कुछ विदेशी पर्यटक गयाजी आए थे। वे इस्कॉन मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्हें जिले की धार्मिक महत्ता और पिंडदान की परंपरा के बारे में जानकारी दी गई। पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड के महत्व को जानने के बाद रूस की इन महिलाओं ने यहां आकर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करने का फैसला किया। पिंडदान की परंपरा जानने विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु विदेशी श्रद्धालुओं में भी यहां की धार्मिक परंपराओं को लेकर रुचि बढ़ी है। इस्कॉन के पुजारी ने बताया कि विदेशी श्रद्धालु अब केवल पर्यटन के लिए गयाजी नहीं आ रहे हैं। वे भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को समझने और उन्हें अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। पिछले दिनों फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और रूस समेत कई देशों के श्रद्धालु गयाजी पहुंच थे। इनमें कुछ ने पिंडदान और तर्पण भी किया। देवघाट पर दिखी देश की सीमा से परे आस्था रूस की पांच महिलाओं का पिंडदान देवघाट पर आकर्षण का केंद्र रहा। भाषा और देश अलग होने के बावजूद उनके कर्मकांड में भारतीय परंपरा की झलक दिखी। गयाजी में पितरों की मुक्ति के लिए किया गया यह अनुष्ठान विदेशी श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का अनुभव बना। पितृपक्ष में ऐसे दृश्य जिले की धार्मिक पहचान को देश से बाहर तक पहुंचने का मजबूत संकेत दे रहे हैं। गयाजी में पितृपक्ष मेले का आज(08 अक्टूबर 2026) 14वां दिन है। देश-विदेश से पिंडदान के लिए लगातार तीर्थ यात्री पहुंच रहे हैं। गुरुवार को रूस से पांच महिला श्रद्धालु देवघाट पहुंची। सनातनी वेशभूषा में जमीन पर बैठकर पूरे विधि-विधान से पिंडदान किया। अपने पितरों की मोक्ष और आत्मा की शांति की कामना की। फल्गु नदी के देवघाट पर विदेशी महिलाओं को सनातनी परंपरा के अनुसार कर्मकांड करते देख लोग भी कुछ देर के लिए ठहर गए। महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी की। पिंडदान की 2 तस्वीरें देखिए… जुलाई में इस्कॉन मंदिर आई थीं विदेशी महिलाएं इस्कॉन के पुजारी ने बताया कि जुलाई में रूस से कुछ विदेशी पर्यटक गयाजी आए थे। वे इस्कॉन मंदिर पहुंचे थे। यहां उन्हें जिले की धार्मिक महत्ता और पिंडदान की परंपरा के बारे में जानकारी दी गई। पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड के महत्व को जानने के बाद रूस की इन महिलाओं ने यहां आकर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करने का फैसला किया। पिंडदान की परंपरा जानने विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु विदेशी श्रद्धालुओं में भी यहां की धार्मिक परंपराओं को लेकर रुचि बढ़ी है। इस्कॉन के पुजारी ने बताया कि विदेशी श्रद्धालु अब केवल पर्यटन के लिए गयाजी नहीं आ रहे हैं। वे भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को समझने और उन्हें अनुभव करने में भी रुचि ले रहे हैं। पिछले दिनों फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और रूस समेत कई देशों के श्रद्धालु गयाजी पहुंच थे। इनमें कुछ ने पिंडदान और तर्पण भी किया। देवघाट पर दिखी देश की सीमा से परे आस्था रूस की पांच महिलाओं का पिंडदान देवघाट पर आकर्षण का केंद्र रहा। भाषा और देश अलग होने के बावजूद उनके कर्मकांड में भारतीय परंपरा की झलक दिखी। गयाजी में पितरों की मुक्ति के लिए किया गया यह अनुष्ठान विदेशी श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का अनुभव बना। पितृपक्ष में ऐसे दृश्य जिले की धार्मिक पहचान को देश से बाहर तक पहुंचने का मजबूत संकेत दे रहे हैं।

