गयाजी के मगध मेडिकल अस्पताल में एक बार फिर मारपीट हुई है। मंगलवार को अस्पताल परिसर में परिजन और सुरक्षा गार्ड आपस में भिड़ गए। नवजात बच्चे की हालत जानने डॉक्टर से मिलने पहुंचे परिजनों को गार्डों ने रोका था। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गया। अधीक्षक कार्यालय के बाहर पोर्टिको में दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी, लात और घूसे चले। जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के रहने वाले परिजन अपने नवजात बच्चे को इलाज के लिए मगध मेडिकल अस्पताल लाए थे। बच्चे को दो सितंबर को अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार के कई सदस्य लगातार अस्पताल पहुंचकर बच्चे की स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। मंगलवार को भी बच्चे के परिजन उसके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए डॉक्टर से मिलना चाहते थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोक दिया। इस बात को लेकर परिजनों और गार्डों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों में बहस होने लगी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। 20 मीटर दूर बैठे थे उपाधीक्षक, बोले- मुझे जानकारी नहीं
जिस स्थान पर मारपीट हुई, वहां से करीब 20 मीटर की दूरी पर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीके अग्रवाल अपने चेंबर में मौजूद थे। घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई घटना के बारे में बताएगा, तभी उन्हें जानकारी हो सकेगी। उनके पास मारपीट की घटना की सूचना नहीं पहुंची थी।
बीमार मरीज के परिजन तनाव में, गार्डों से भी बढ़ रहा टकराव
मगध मेडिकल अस्पताल में परिजनों और सुरक्षा गार्डों के बीच विवाद कोई नई बात नहीं है। अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि गंभीर मरीज के परिजन पहले से ही मानसिक तनाव में रहते हैं। वे अपने मरीज की हालत और इलाज को लेकर परेशान रहते हैं। दूसरी ओर, गार्ड और अस्पताल कर्मचारी भी कई बार परिजनों के व्यवहार से नाराज हो जाते हैं। ऐसे में छोटी-सी बात देखते ही देखते बड़े विवाद का रूप ले लेती है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो मरीजों को समय पर सुविधाएं नहीं मिलने, जानकारी हासिल करने में परेशानी और व्यवस्था संबंधी समस्याओं के कारण भी कई बार परिजनों में नाराजगी होती है। यही नाराजगी विवाद का कारण बन जाती है। विभागाध्यक्ष ने दोनों पक्षों को समझाकर कराया शांत
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि नवजात को दो सितंबर को औरंगाबाद से लाकर भर्ती कराया गया था। परिजन और गार्ड के बीच विवाद की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की और मामला शांत कराया। उन्होंने बताया कि नवजात की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर रख रही है और उसे बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। गयाजी के मगध मेडिकल अस्पताल में एक बार फिर मारपीट हुई है। मंगलवार को अस्पताल परिसर में परिजन और सुरक्षा गार्ड आपस में भिड़ गए। नवजात बच्चे की हालत जानने डॉक्टर से मिलने पहुंचे परिजनों को गार्डों ने रोका था। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गया। अधीक्षक कार्यालय के बाहर पोर्टिको में दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी, लात और घूसे चले। जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद के रहने वाले परिजन अपने नवजात बच्चे को इलाज के लिए मगध मेडिकल अस्पताल लाए थे। बच्चे को दो सितंबर को अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार के कई सदस्य लगातार अस्पताल पहुंचकर बच्चे की स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं। मंगलवार को भी बच्चे के परिजन उसके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए डॉक्टर से मिलना चाहते थे। इसी दौरान सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोक दिया। इस बात को लेकर परिजनों और गार्डों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों में बहस होने लगी और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। 20 मीटर दूर बैठे थे उपाधीक्षक, बोले- मुझे जानकारी नहीं
जिस स्थान पर मारपीट हुई, वहां से करीब 20 मीटर की दूरी पर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पीके अग्रवाल अपने चेंबर में मौजूद थे। घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई घटना के बारे में बताएगा, तभी उन्हें जानकारी हो सकेगी। उनके पास मारपीट की घटना की सूचना नहीं पहुंची थी।
बीमार मरीज के परिजन तनाव में, गार्डों से भी बढ़ रहा टकराव
मगध मेडिकल अस्पताल में परिजनों और सुरक्षा गार्डों के बीच विवाद कोई नई बात नहीं है। अस्पताल से जुड़े लोगों का कहना है कि गंभीर मरीज के परिजन पहले से ही मानसिक तनाव में रहते हैं। वे अपने मरीज की हालत और इलाज को लेकर परेशान रहते हैं। दूसरी ओर, गार्ड और अस्पताल कर्मचारी भी कई बार परिजनों के व्यवहार से नाराज हो जाते हैं। ऐसे में छोटी-सी बात देखते ही देखते बड़े विवाद का रूप ले लेती है। अस्पताल सूत्रों की मानें तो मरीजों को समय पर सुविधाएं नहीं मिलने, जानकारी हासिल करने में परेशानी और व्यवस्था संबंधी समस्याओं के कारण भी कई बार परिजनों में नाराजगी होती है। यही नाराजगी विवाद का कारण बन जाती है। विभागाध्यक्ष ने दोनों पक्षों को समझाकर कराया शांत
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रवींद्र कुमार ने बताया कि नवजात को दो सितंबर को औरंगाबाद से लाकर भर्ती कराया गया था। परिजन और गार्ड के बीच विवाद की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की और मामला शांत कराया। उन्होंने बताया कि नवजात की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर रख रही है और उसे बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

