गयाजी के गुरुआ प्रखंड में ढाब नदी उफान पर है। जिसके चलते नगवां पंचायत के देवरिया टोला, हसनपुर में लोगों की परेशानी बढ़ गी है। नदी का पानी किनारे बसे घरों में घुस गया है। इससे बस्ती में रहने वाले करीब 30 दलित परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। नदी किनारे बसे इन परिवारों में अधिकांश मजदूर हैं। कई लोग ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। मेहनत की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चलता है। अब बाढ़ का पानी उनके घरों में घुसने से रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल हो गई है। घर के अंदर घुसा पानी दो परिवारों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सुजीत दास और संजीत दास के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पानी घर के अंदर तक पहुंच गया। इसके बाद दोनों परिवारों को रातभर घर से बाहर रहने को मजबूर होना पड़ा। घर में रखा अनाज भींग गया। कपड़े पानी में डूब गए। बर्तन और जरूरी सामान भी बर्बाद हो गए। परिवार के लोगों का कहना है कि घर में रखा अधिकांश सामान बर्बाद हो चुका है। सबसे बड़ी चिंता मिट्टी के घरों को लेकर है। लगातार पानी में डूबे रहने से इन घरों की दीवारें कमजोर हो सकती है। घर क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा तो परिवारों की परेशानी और बढ़ सकती है। प्रशासन से लगाई मदद की गुहार स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी किनारे बसे करीब 30 घरों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इन परिवारों के पास सुरक्षित जगह पर जाने का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। ऐसे में प्रशासन से तत्काल मदद की मांग की जा रही है। गुरुआ क्षेत्र के समाजसेवी प्रिंस कुमार ने बताया कि रात में जब अंचल अधिकारी मनीष कुमार को स्थिति की जानकारी देने के लिए फोन किया गया, तो संतोषजनक मदद नहीं मिली। पीड़ितों के अनुसार, अधिकारी की ओर से कहा गया कि हम भगवान हैं, हम क्या कर सकते हैं। पीड़ित परिवार के सामने भोजन की समस्या पीड़ित परिवारों का यह भी कहना है कि आपदा प्रबंधन विभाग को कई बार फोन किया गया। करीब 10 बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं किया गया। बाढ़ की स्थिति में सबसे जरूरी सुरक्षित स्थान और राहत है। घरों में पानी घुसने के बाद परिवारों के सामने भोजन की भी समस्या खड़ी हो गई है। अनाज और घरेलू सामान पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की जा रही है। मुआवजा और सहायता की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि मौके पर अधिकारी और राहत टीम भेजी जाए। दोनों प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। भोजन और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह मामला सिर्फ दो परिवारों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे बसे पूरी दलित बस्ती की सुरक्षा का सवाल है। मिट्टी के घरों में रहने वाले गरीब परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा डर घर ढहने का है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। सीओ ने दिया आश्वासन हालांकि सीओ मनीष कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार के लिए राशन की व्यवस्था की जा रही है। आपूर्ति विभाग को कहा गया है। साथ ही उन्हें बारिश से बचने लिए प्लास्टिक की भी व्यवस्था की गई है। गयाजी के गुरुआ प्रखंड में ढाब नदी उफान पर है। जिसके चलते नगवां पंचायत के देवरिया टोला, हसनपुर में लोगों की परेशानी बढ़ गी है। नदी का पानी किनारे बसे घरों में घुस गया है। इससे बस्ती में रहने वाले करीब 30 दलित परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। नदी किनारे बसे इन परिवारों में अधिकांश मजदूर हैं। कई लोग ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। मेहनत की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चलता है। अब बाढ़ का पानी उनके घरों में घुसने से रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल हो गई है। घर के अंदर घुसा पानी दो परिवारों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सुजीत दास और संजीत दास के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पानी घर के अंदर तक पहुंच गया। इसके बाद दोनों परिवारों को रातभर घर से बाहर रहने को मजबूर होना पड़ा। घर में रखा अनाज भींग गया। कपड़े पानी में डूब गए। बर्तन और जरूरी सामान भी बर्बाद हो गए। परिवार के लोगों का कहना है कि घर में रखा अधिकांश सामान बर्बाद हो चुका है। सबसे बड़ी चिंता मिट्टी के घरों को लेकर है। लगातार पानी में डूबे रहने से इन घरों की दीवारें कमजोर हो सकती है। घर क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा तो परिवारों की परेशानी और बढ़ सकती है। प्रशासन से लगाई मदद की गुहार स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी किनारे बसे करीब 30 घरों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इन परिवारों के पास सुरक्षित जगह पर जाने का भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। ऐसे में प्रशासन से तत्काल मदद की मांग की जा रही है। गुरुआ क्षेत्र के समाजसेवी प्रिंस कुमार ने बताया कि रात में जब अंचल अधिकारी मनीष कुमार को स्थिति की जानकारी देने के लिए फोन किया गया, तो संतोषजनक मदद नहीं मिली। पीड़ितों के अनुसार, अधिकारी की ओर से कहा गया कि हम भगवान हैं, हम क्या कर सकते हैं। पीड़ित परिवार के सामने भोजन की समस्या पीड़ित परिवारों का यह भी कहना है कि आपदा प्रबंधन विभाग को कई बार फोन किया गया। करीब 10 बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं किया गया। बाढ़ की स्थिति में सबसे जरूरी सुरक्षित स्थान और राहत है। घरों में पानी घुसने के बाद परिवारों के सामने भोजन की भी समस्या खड़ी हो गई है। अनाज और घरेलू सामान पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की जा रही है। मुआवजा और सहायता की मांग ग्रामीणों ने मांग की है कि मौके पर अधिकारी और राहत टीम भेजी जाए। दोनों प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। भोजन और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। साथ ही बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। यह मामला सिर्फ दो परिवारों तक सीमित नहीं है। नदी किनारे बसे पूरी दलित बस्ती की सुरक्षा का सवाल है। मिट्टी के घरों में रहने वाले गरीब परिवारों के सामने अब सबसे बड़ा डर घर ढहने का है। ऐसे में ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। सीओ ने दिया आश्वासन हालांकि सीओ मनीष कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार के लिए राशन की व्यवस्था की जा रही है। आपूर्ति विभाग को कहा गया है। साथ ही उन्हें बारिश से बचने लिए प्लास्टिक की भी व्यवस्था की गई है।

