गणेश चौथ मेले का धर्म प्रतिनिधियों ने फीता काटा:संभल में 66 साल से चली आ रही भाईचारे की परंपरा, गणेश मंदिर रोशनी से जगमगाया

गणेश चौथ मेले का धर्म प्रतिनिधियों ने फीता काटा:संभल में 66 साल से चली आ रही भाईचारे की परंपरा, गणेश मंदिर रोशनी से जगमगाया

संभल के चंदौसी में श्रीगणेश चतुर्थी मेले का शुभारंभ शनिवार रात करीब 9 बजे हुआ। पांच धर्मों के प्रतिनिधियों ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा की स्थापना की गई। मेले में विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पांच धर्मों के प्रतिनिधियों ने किया उद्घाटन चंदौसी का गणेश चौथ मेला सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के लिए जाना जाता है। मेला कमेटी में भी सभी धर्मों के लोग शामिल हैं। इसी परंपरा के तहत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और बौद्ध धर्म के प्रतिनिधियों ने एक साथ मेले का उद्घाटन किया। गणेश मंदिर पर परंपरागत पूजा एसडीएम आशुतोष तिवारी और सीओ विवेक जावला ने की। पूजा के बाद भगवान श्रीगणेश की मुख्य प्रतिमा को गणेश मंदिर से फूलडोल में रखा गया। गाजे-बाजे के साथ फूलडोल शोभायात्रा गणेश मेला ग्राउंड पहुंची। इसके बाद सभी लोग मेला ग्राउंड स्थित गणेश स्तंभ पर पहुंचे। मंच पर बच्चों ने पेश किए सांस्कृतिक कार्यक्रम गणेश मंदिर के सामने बनाए गए मंच पर अलग-अलग स्कूलों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आयोजन स्थल पर विभिन्न प्रकार की दुकानें भी लगाई गई हैं। मेला कमेटी के सदस्यों के मुताबिक, चंदौसी में लोग अपने घरों में भी भगवान गणेश की स्थापना करते हैं और मेले में उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं। ‘देश को भाईचारे की जरूरत’ मेला कमेटी से जुड़े हाजी समीउद्दीन ने कहा कि उनके पिता हाजी निजामुद्दीन गणेश मेले के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज देश को भाईचारे की जरूरत है। चंदौसी में पिछले 66 साल से सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर इस मेले में भाग लेते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सर्वधर्म समभाव और आपसी भाईचारे का संदेश इस आयोजन से मिलता है। सभी धर्मों के लोगों का एक साथ मेले का शुभारंभ करना चंदौसी की एकता और सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है। आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है मेला’ बौद्ध धर्म के प्रतिनिधि एके सिंह ने कहा कि यह मेला आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के बाद उत्तरी भारत में चंदौसी में गणेश उत्सव की यह परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि चंदौसी में सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। इसी वजह से गणेश चौथ मेला शहर की सांप्रदायिक एकता की पहचान बन गया है।
मेवाराम शर्मा ने कहा कि गणेश चौथ मेला चंदौसी के गौरव का प्रतीक है। इसमें सभी धर्मों के लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के साथ आयोजन में सहयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि मेले के प्रति लोगों में हर साल उत्साह बढ़ रहा है और आयोजन लगातार प्रगति कर रहा है।

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