गणेश चतुर्थी पर सोमवार को पूरा शहर गणपति बप्पा की भक्ति में रंगा नजर आया। गली-मोहल्लों, घरों और प्रमुख मंदिरों में विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। आकर्षक सजावट के साथ जगह-जगह पंडाल सजाए गए। शाम होते ही इन पंडालों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। कई स्थानों पर गणेश महोत्सव की शुरुआत के साथ अगले कई दिनों के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी की गई है।
शहर के टीकाराम मंदिर, वाष्र्णेय मंदिर समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़े स्तर पर गणपति प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन पूजा-अर्चना, आरती समेत विभिन्न धार्मिक गतिविधियां होंगी। गणपति पंडालों में शाम के समय श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। घरों में भी लोगों ने गणपति की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी।
कनवरी गंज में 11 दिवसीय गणेश महोत्सव
कनवरी गंज स्थित देवी वाली गली में हर वर्ष की तरह इस बार भी 11 दिवसीय गणेश महोत्सव शुरू हुआ है। गणपति बप्पा की भव्य स्थापना के बाद क्षेत्र में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंज रहे हैं। आयोजन को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है। आयोजकों के अनुसार 11 दिनों तक प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गणपति पंडाल में श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन-अर्चन कर रहे हैं। लोग सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। आयोजन स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। शाम के समय यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ रही है। गणेश महोत्सव के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विभव वार्ष्णेय और महावीर गंज मंडल अध्यक्ष गौरी आर्या उपस्थित रहीं। इस अवसर पर गणेश महोत्सव कमेटी के अध्यक्ष राजू बीपीएल, महामंत्री मनोज वार्ष्णेय, सेल्फी, प्रियांशु, लव वार्ष्णेय, लेखांश, विनय भैया जी, शैलेंद्र भैया जी, सक्षम गौतम, मनीषा वार्ष्णेय, कविता, रजनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
क्वार्सी चौराहे के पास भी सजा पंडाल
क्वार्सी चौराहे के पास गंगा सेवा समिति की ओर से भी गणपति पंडाल सजाया गया है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव की शुरुआत की गई। समिति की ओर से आने वाले दिनों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोमवार शाम से ही यहां श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
कहीं सात दिन तो कहीं 11 दिन रहेंगे गणपति
शहर में स्थापित गणपति प्रतिमाओं के साथ उत्सव की अवधि भी अलग-अलग है। कई घरों और पंडालों में गणपति बप्पा को करीब एक सप्ताह तक विराजित किया गया है, जबकि कनवरी गंज समेत कई स्थानों पर 11 दिवसीय महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। उत्सव की अवधि पूरी होने के बाद श्रद्धालु विधि-विधान से गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे।
प्रथम पूज्य हैं भगवान गणेश
सनातन परंपरा में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणपति की आराधना से बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। सार्वजनिक गणेश उत्सव को महाराष्ट्र में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में व्यापक रूप दिया था। इसके बाद यह पर्व देशभर में लोकप्रिय होता गया। अब गणेश महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक उत्सव का भी रूप ले चुका है।
अगले कई दिन शहर में गूंजेंगे जयकारे
गणेश चतुर्थी के साथ शुरू हुआ उत्सव अब अगले कई दिनों तक शहर में दिखाई देगा। सुबह-शाम पूजा और आरती के साथ विभिन्न पंडालों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इससे शहर के कई इलाकों में उत्सवी माहौल बना रहेगा। परिवारों के साथ लोग पंडालों में पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन कर रहे हैं और जयकारों के साथ उत्सव में शामिल हो रहे हैं।

