क्या ERO के अधिकार छीने गए? Voter List के SIR नियमों और Form 6 में बदलाव की वैधता पर पूर्व चुनाव आयुक्त Ashok Lavasa ने उठाए सवाल

क्या ERO के अधिकार छीने गए? Voter List के SIR नियमों और Form 6 में बदलाव की वैधता पर पूर्व चुनाव आयुक्त Ashok Lavasa ने उठाए सवाल

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने बुधवार को वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान अपनाई गई कुछ प्रक्रियाओं की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या फॉर्म 6 और ERO-Net सिस्टम में किए गए बदलावों के लिए सही प्रक्रिया का पालन किया गया था। उनकी यह टिप्पणी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट पर मचे विवाद के बीच आई है, जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। बताई गई आपत्तियों में नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ में बदलाव और वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज़ करना शामिल था। लवासा ने कहा कि इन मुद्दों की जांच होनी चाहिए, चाहे तीनों कमिश्नर इन बदलावों पर सहमत हुए हों या नहीं।

इसे भी पढ़ें: अगर वोट चोरी हुए, तो हम कैसे हारे? BJP ने बंगाल की किन सीटों का ज़िक्र कर दिया विपक्ष को जोरदार जवाब

एक निजी मीडिया को दिए इंटरव्यू में लवासा ने कहा कि भले ही तीनों कमिश्नर सहमत हो गए हों, लेकिन क्या ज़रूरी मंज़ूरी की प्रक्रिया से गुज़रे बिना ‘फॉर्म 6’ में बदलाव करना कानूनी था? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अभी भी विचार किया जा सकता है। लावासा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ERO-Net सिस्टम ने इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) की कानूनी शक्तियों पर असर डाला है, जो वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने के बारे में फैसले लेने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। गोवा के एक मामले का ज़िक्र करते हुए, जहाँ एक ERO कथित तौर पर 97 लोगों की पात्रता से संतुष्ट होने के बावजूद उन्हें फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं जोड़ पाया था, लावासा ने कहा कि ऐसी स्थिति चिंता पैदा करेगी। उन्होंने कहा अगर ERO को यह महसूस हुआ कि वे 97 लोगों की पात्रता के बारे में पक्का होने के बावजूद उन्हें शामिल नहीं कर सकते, तो यह निश्चित रूप से एक समस्या है

इसे भी पढ़ें: विचारों का मतभेद सामान्य बात…SIR पर खुलासे पर चुनाव आयोग की सफाई 10 प्वाइंट में समझें

लवासा ने सेंट्रलाइज़्ड वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सवाल उठाए

लवासा ने कहा कि वोटर लिस्ट डेटाबेस को सेंट्रलाइज़ करना अपने आप में कोई समस्या नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि EROs के पास अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की क्षमता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के चुनाव आयोग के पास किसी वोटर के भविष्य के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार नहीं है कि उसे लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। इसलिए, ERO ही वह अधिकारी है जिसके पास यह पूरा अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि एक सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस बनाए रखा जा सकता है, बशर्ते कानूनी रूप से अधिकृत ERO के पास सिस्टम के संबंधित हिस्से तक पहुँच हो और वे अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर वोटर लिस्ट में बदलाव कर सकें। लवासा ने कहा कानूनी रूप से अधिकृत व्यक्ति के पास अपने सीमित अधिकार क्षेत्र तक पहुँच होनी चाहिए, ताकि वह कानून के अनुसार वोटर लिस्ट में बदलाव कर सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *