क्या छात्रों के आंदोलन को भाजपा ने हाईजैक कर लिया:छात्रों ने कहा- हमारे बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे; फायदा किसको, 3 पॉइंट में समझिए

क्या छात्रों के आंदोलन को भाजपा ने हाईजैक कर लिया:छात्रों ने कहा- हमारे बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे; फायदा किसको, 3 पॉइंट में समझिए

झारखंड के रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्र पिछले 18 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। वे परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और सामने आई गड़बड़ियों की जांच समेत अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। कई छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन के 17वें दिन सोमवार को छात्रों ने विधानसभा का घेराव किया। इस दौरान हंगामा हुआ। छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने मंगलवार को झारखंड बंद रखा। छात्र संगठन ABVP ने भी विधानसभा घेराव किया। भाजपा ने सरकार को सवालों के घेरे में रखा। वहीं, सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि भाजपा ने अपने राजनीतिक इरादों से पूरी प्रक्रिया को लटकाने-भटकाने की कोशिश की। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण छात्रों ने आंदोलन वापस नहीं लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छात्रों के इस आंदोलन को भाजपा ने हाईजैक कर लिया है? आंदोलन के दौरान बने राजनीतिक हालात, एक्सपर्ट की राय और छात्रों से हुई बातचीत के आधार पर भास्कर रिपोर्टर ने इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले भाजपा-ABVP के प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें देखिए.. जानिए छात्रों पर क्यों हुआ लाठीचार्ज? सोमवार को छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान अलग-अलग समय पर पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई। वाटर कैनन छोड़े गए, आंसू गैस के गोले दागे गए, विधानसभा गेट तक पहुंचे छात्रों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया गया। इसे लेकर हमने छात्रों से बात की। JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच के रविंद्र कुमार ने कहा, “जब हम विधानसभा गेट पर पहुंचे, तो हम चाहते थे कि मुख्यमंत्री की ओर से कुछ न कुछ कहा जाए। नैतिकता के तौर पर ही सही, उन्हें कुछ तो कहना चाहिए था, ताकि छात्रों को भी लगता कि हमारा आंदोलन सफल हुआ है। जब ऐसा नहीं हुआ, तो हमने तय किया कि हम वहीं बैठेंगे। हमने अपना संदेश पुलिस के माध्यम से भी भिजवाया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। इसी बीच हमें हटाने के लिए पुलिस ने लाठियां चलानी शुरू कर दीं। हम मानते हैं कि पुलिस पर भी दबाव रहा होगा, लेकिन उन्होंने कोई चेतावनी नहीं दी। छात्रों के उग्र होने के सवाल पर JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच का कहना है कि अगर हमें बदमाशी या तोड़फोड़ करनी होती, तो हम वॉलंटियर क्यों बनाते? घेराव शुरू होने से लेकर हंगामा होने तक हम लगातार माइक से अपील करते रहे कि कोई उग्र नहीं होगा। छात्रों का कहना है कि निश्चित रूप से हमारे बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे, जो चाहते थे कि हंगामा हो। हम यह नहीं कहते कि वे किसी खास राजनीतिक दल से जुड़े थे, लेकिन वे मौजूद थे।” तीन सीन से समझिए क्यों कहा जा रहा कि BJP ने आंदोलन हाईजैक किया… सीन-1: 5 अगस्त को छात्रों के समर्थन में उतरे भाजपा विधायक नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में 14 विधायक 5 अगस्त को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए JPSC-JSSC की परीक्षाएं रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा सड़क से विधानसभा तक छात्रों के साथ खड़ी है। इस मुद्दे को सदन में जोरदार तरीके से उठाएगी। सीन-2: 6 से 10 अगस्त तक सदन और सड़क पर तेज हुआ आंदोलन 6 अगस्त को विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही JPSC-JSSC का मुद्दा सदन में छा गया। भाजपा विधायकों ने तख्तियां लेकर विरोध जताया। 8 अगस्त को ABVP कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास घेरने की कोशिश की, जहां पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। 7 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। 10 अगस्त को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी विधायक सीएम आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर सभी गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर खेलगांव गेस्टहाउस भेज दिया। सीन-3: 11 अगस्त को लाठीचार्ज के विरोध में विधानसभा में प्रदर्शन 10 अगस्त को आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में 11 अगस्त को भाजपा विधायकों ने विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदर्शन किया। विधायकों ने छात्रों के समर्थन में सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और परीक्षा विवाद पर कार्रवाई की मांग की। इसी दिन ABVP ने विधानसभा घेराव की घोषणा की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पुराने विधानसभा के पास ही रोक दिया। ये तीन अहम परिस्थितियां हैं, जो यह साबित करती हैं कि छात्रों का आंदोलन छात्रों से हाथों से निकल कर भाजपा के हाथों चला गया। भाजपा ने छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया। हालांकि आंदोलन कर रहे छात्र अब भी यह कह रहे हैं कि हमारा आंदोलन अब भी केवल छात्र आंदोलन है। सच यह भी है कि छात्रों के मंच पर बीजेपी भी दिखी, कांग्रेस भी पहुंची, AJSU भी आई, लेकिन मंच पर किसी के बैनर या झंछा नहीं लगा। यही वजह है कि झारखंड में चल छात्र आंदोलन को देशभर में सराहना मिली है। अब एक्सपर्ट की राय जानिए… हाईजैक नहीं किया..लाभ जरूर लेना चाह रही है भाजपा ने आंदोलन हाईजैक किया? इसे लेकर सीनियर जर्नलिस्ट शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, ‘आंदोलन का राजनीतिकरण हुआ या नहीं इसे समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह आक्रोश राजनीतिक पार्टियों की ओर से बनाई गई व्यवस्था की खामियों से पैदा हुई है। इस आंदोलन को लगभग 20 दिनों तक चलाने वाले केवल छात्र हैं। उनका यह आंदोलन स्वत:स्फूर्त है। जहां तक रही बात भाजपा के आंदोलन हाईजैक करने की तो भाजपा इसका लाभ लेना चाह रही है। भाजपा को लग रहा है कि यह आंदोलन हेमंत सोरेन के खिलाफ है। आप देखेंगे कि बीते पांच छह सालों में झारखंड भाजपा कोई ऐसा मुद्दे खड़ा नहीं कर पाई, जिससे हेमंत सोरेन सरकार को चुनौती मिले। आप यह भी देखेंगे कि इस आंदोलन में जो शामिल हैं, उन्हें भाजपा से कोई सहानुभूति नहीं है। वो जितना नाराज अभी हेमंत सोरेन से हैं, उतना ही दूसरी पार्टियों से भी।” भाजपा ने हाईजैक नहीं किया सरकार नरैटिव बना रही सीनियर जर्नलिस्ट आनंद कुमार कहते हैं, “ऐसा नहीं कि भाजपा हाईजैक कर रही है। यह तो सरकार नरैटिव बना रही है। आप देखेंगे कि इस घेराव-प्रदर्शन में जो लोग थे वे केवल स्टूडेंट थे। इसमें कोई पॉलिटिकल लोग तो थे नहीं। छात्रों का जो मुद्दा है वो है ही इतना बड़ा की, कोई भी विपक्ष राजनीति करेगा। सरकार को घेरेगा। उन्हें घेरना भी चाहिए। दरअसल, पॉलिटिकल लोग यही चाहते हैं कि मुद्दे को राजनीति में उलझा दिया जाए ताकि मुद्दा ही गौण हो जाए। आप इसे ऐसे भी देखिए कि जंतर-मंतर पर भी डंडा चला, उसकी राजनीति राहुल गांधी अब भी कर रहे हैं। यह हो सकता है कि भाजपा ने आंदोलन को साधन-संसाधन मुहैया कराया हो पर इसमें गलत कुछ भी नहीं है। अगर आंदोलन सत्ता के खिलाफ हो तो उसे खाद-पानी देना विपक्ष का काम है।” झारखंड के रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्र पिछले 18 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। वे परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और सामने आई गड़बड़ियों की जांच समेत अन्य मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। कई छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन के 17वें दिन सोमवार को छात्रों ने विधानसभा का घेराव किया। इस दौरान हंगामा हुआ। छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने मंगलवार को झारखंड बंद रखा। छात्र संगठन ABVP ने भी विधानसभा घेराव किया। भाजपा ने सरकार को सवालों के घेरे में रखा। वहीं, सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि भाजपा ने अपने राजनीतिक इरादों से पूरी प्रक्रिया को लटकाने-भटकाने की कोशिश की। राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण छात्रों ने आंदोलन वापस नहीं लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छात्रों के इस आंदोलन को भाजपा ने हाईजैक कर लिया है? आंदोलन के दौरान बने राजनीतिक हालात, एक्सपर्ट की राय और छात्रों से हुई बातचीत के आधार पर भास्कर रिपोर्टर ने इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले भाजपा-ABVP के प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें देखिए.. जानिए छात्रों पर क्यों हुआ लाठीचार्ज? सोमवार को छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान अलग-अलग समय पर पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हुई। वाटर कैनन छोड़े गए, आंसू गैस के गोले दागे गए, विधानसभा गेट तक पहुंचे छात्रों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया गया। इसे लेकर हमने छात्रों से बात की। JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच के रविंद्र कुमार ने कहा, “जब हम विधानसभा गेट पर पहुंचे, तो हम चाहते थे कि मुख्यमंत्री की ओर से कुछ न कुछ कहा जाए। नैतिकता के तौर पर ही सही, उन्हें कुछ तो कहना चाहिए था, ताकि छात्रों को भी लगता कि हमारा आंदोलन सफल हुआ है। जब ऐसा नहीं हुआ, तो हमने तय किया कि हम वहीं बैठेंगे। हमने अपना संदेश पुलिस के माध्यम से भी भिजवाया, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। इसी बीच हमें हटाने के लिए पुलिस ने लाठियां चलानी शुरू कर दीं। हम मानते हैं कि पुलिस पर भी दबाव रहा होगा, लेकिन उन्होंने कोई चेतावनी नहीं दी। छात्रों के उग्र होने के सवाल पर JSSC-JPSC रिफॉर्म मंच का कहना है कि अगर हमें बदमाशी या तोड़फोड़ करनी होती, तो हम वॉलंटियर क्यों बनाते? घेराव शुरू होने से लेकर हंगामा होने तक हम लगातार माइक से अपील करते रहे कि कोई उग्र नहीं होगा। छात्रों का कहना है कि निश्चित रूप से हमारे बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल थे, जो चाहते थे कि हंगामा हो। हम यह नहीं कहते कि वे किसी खास राजनीतिक दल से जुड़े थे, लेकिन वे मौजूद थे।” तीन सीन से समझिए क्यों कहा जा रहा कि BJP ने आंदोलन हाईजैक किया… सीन-1: 5 अगस्त को छात्रों के समर्थन में उतरे भाजपा विधायक नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में 14 विधायक 5 अगस्त को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए JPSC-JSSC की परीक्षाएं रद्द करने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा सड़क से विधानसभा तक छात्रों के साथ खड़ी है। इस मुद्दे को सदन में जोरदार तरीके से उठाएगी। सीन-2: 6 से 10 अगस्त तक सदन और सड़क पर तेज हुआ आंदोलन 6 अगस्त को विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही JPSC-JSSC का मुद्दा सदन में छा गया। भाजपा विधायकों ने तख्तियां लेकर विरोध जताया। 8 अगस्त को ABVP कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास घेरने की कोशिश की, जहां पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। 7 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। 10 अगस्त को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में पार्टी विधायक सीएम आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं होने पर सभी गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर खेलगांव गेस्टहाउस भेज दिया। सीन-3: 11 अगस्त को लाठीचार्ज के विरोध में विधानसभा में प्रदर्शन 10 अगस्त को आंदोलनरत छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में 11 अगस्त को भाजपा विधायकों ने विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदर्शन किया। विधायकों ने छात्रों के समर्थन में सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और परीक्षा विवाद पर कार्रवाई की मांग की। इसी दिन ABVP ने विधानसभा घेराव की घोषणा की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पुराने विधानसभा के पास ही रोक दिया। ये तीन अहम परिस्थितियां हैं, जो यह साबित करती हैं कि छात्रों का आंदोलन छात्रों से हाथों से निकल कर भाजपा के हाथों चला गया। भाजपा ने छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया। हालांकि आंदोलन कर रहे छात्र अब भी यह कह रहे हैं कि हमारा आंदोलन अब भी केवल छात्र आंदोलन है। सच यह भी है कि छात्रों के मंच पर बीजेपी भी दिखी, कांग्रेस भी पहुंची, AJSU भी आई, लेकिन मंच पर किसी के बैनर या झंछा नहीं लगा। यही वजह है कि झारखंड में चल छात्र आंदोलन को देशभर में सराहना मिली है। अब एक्सपर्ट की राय जानिए… हाईजैक नहीं किया..लाभ जरूर लेना चाह रही है भाजपा ने आंदोलन हाईजैक किया? इसे लेकर सीनियर जर्नलिस्ट शंभूनाथ चौधरी कहते हैं, ‘आंदोलन का राजनीतिकरण हुआ या नहीं इसे समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि यह आक्रोश राजनीतिक पार्टियों की ओर से बनाई गई व्यवस्था की खामियों से पैदा हुई है। इस आंदोलन को लगभग 20 दिनों तक चलाने वाले केवल छात्र हैं। उनका यह आंदोलन स्वत:स्फूर्त है। जहां तक रही बात भाजपा के आंदोलन हाईजैक करने की तो भाजपा इसका लाभ लेना चाह रही है। भाजपा को लग रहा है कि यह आंदोलन हेमंत सोरेन के खिलाफ है। आप देखेंगे कि बीते पांच छह सालों में झारखंड भाजपा कोई ऐसा मुद्दे खड़ा नहीं कर पाई, जिससे हेमंत सोरेन सरकार को चुनौती मिले। आप यह भी देखेंगे कि इस आंदोलन में जो शामिल हैं, उन्हें भाजपा से कोई सहानुभूति नहीं है। वो जितना नाराज अभी हेमंत सोरेन से हैं, उतना ही दूसरी पार्टियों से भी।” भाजपा ने हाईजैक नहीं किया सरकार नरैटिव बना रही सीनियर जर्नलिस्ट आनंद कुमार कहते हैं, “ऐसा नहीं कि भाजपा हाईजैक कर रही है। यह तो सरकार नरैटिव बना रही है। आप देखेंगे कि इस घेराव-प्रदर्शन में जो लोग थे वे केवल स्टूडेंट थे। इसमें कोई पॉलिटिकल लोग तो थे नहीं। छात्रों का जो मुद्दा है वो है ही इतना बड़ा की, कोई भी विपक्ष राजनीति करेगा। सरकार को घेरेगा। उन्हें घेरना भी चाहिए। दरअसल, पॉलिटिकल लोग यही चाहते हैं कि मुद्दे को राजनीति में उलझा दिया जाए ताकि मुद्दा ही गौण हो जाए। आप इसे ऐसे भी देखिए कि जंतर-मंतर पर भी डंडा चला, उसकी राजनीति राहुल गांधी अब भी कर रहे हैं। यह हो सकता है कि भाजपा ने आंदोलन को साधन-संसाधन मुहैया कराया हो पर इसमें गलत कुछ भी नहीं है। अगर आंदोलन सत्ता के खिलाफ हो तो उसे खाद-पानी देना विपक्ष का काम है।”  

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