बालाघाट जिले की बैहर तहसील में 62 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना पर केंद्र सरकार ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। केंद्रीय वन सलाहकार समिति (FAC) ने पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए इस फैसले को टाल दिया है और मध्य प्रदेश सरकार से कई सवालों के जवाब मांगे हैं। यह खनन प्रोजेक्ट मेसर्स निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड को दिया जाना था। 117.51 हेक्टेयर के इस पूरे प्रोजेक्ट में 62 हेक्टेयर हिस्सा घने जंगलों का है। अगर यह प्रोजेक्ट शुरू होता, तो इलाके के 16,648 पेड़ों की बलि देनी पड़ती। समिति ने पाया कि यह क्षेत्र कान्हा-पेंच कॉरिडोर से सिर्फ 21 किलोमीटर दूर है और यहां बाघ, तेंदुआ, भालू और गौर जैसे जानवरों का बसेरा है। आदिवासियों का कड़ा विरोध और ग्रामसभा की अनदेखी इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय आदिवासियों में भारी गुस्सा है। 12 फरवरी को उकवा में हुए एक प्रदर्शन में आदिवासियों ने आरोप लगाया था कि सरकार ने बिना ग्रामसभा की अनुमति लिए खनन के लिए कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए क्षेत्र में लगातार आंदोलन चल रहा है। कंपनी पर लगे गंभीर आरोप- तेंदुए की हत्या और साक्ष्य मिटाना एक तरफ केंद्र ने तकनीकी आधार पर फाइल रोकी है, वहीं दूसरी तरफ जबलपुर के एक वकील ने कंपनी के खिलाफ पर्यावरण मंत्रालय में गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के परिसर में एक तेंदुए की संदिग्ध मौत हुई थी, जिसके बाद उसके अंगों के साथ छेड़छाड़ की गई और सबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस वन्यजीव अपराध की जांच फिलहाल लंबित है और कंपनी के पट्टे निरस्त करने की मांग उठ रही है। इन कमियों की वजह से रुका प्रोजेक्ट वन सलाहकार समिति ने परियोजना को रोकने के लिए कई आपत्तियां जताई हैं- कंपनी ने बदले में पेड़ लगाने के लिए जो जमीन दिखाई, वह छोटे-छोटे टुकड़ों में है, जिसे समिति ने नामंजूर कर दिया। वाइल्डलाइफ विंग की आधिकारिक रिपोर्ट अभी तक जमा नहीं की गई है। प्रस्तावित क्षेत्र से गुजर रही बिजली की ट्रांसमिशन लाइन को लेकर संबंधित विभाग से अनुमति नहीं ली गई है। समिति ने साफ कर दिया है कि जब तक इन सभी बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब और वन्यजीव अपराध के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल यह प्रोजेक्ट ‘स्थगित’ श्रेणी में डाल दिया गया है।


