मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों और किशोरों का किताबों से जुड़ाव कम होता जा रहा है। ऐसे समय में शिक्षाविद् और लेखक पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘Teen in the Canteen’ किशोरों की दुनिया को उनकी अपनी भाषा में समझने और उनसे संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है। पुस्तक में दोस्ती, रिश्ते, भावनाएं, दबाव, असमंजस और किशोरावस्था के सवालों को सरल कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की खास बात इसका द्विभाषी स्वरूप है, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी का प्रयोग उसी अंदाज में किया गया है, जैसा आज के किशोर बातचीत में करते हैं। यह पुस्तक उपदेश देने के बजाय किशोरों की भावनाओं और अनुभवों को समझने का प्रयास करती है। पुनीत वशिष्ठ लंबे समय से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र से जुड़े हैं। ‘मृत्युंजय’ सहित कई पुस्तकों के बाद यह उनकी लगभग दसवीं-ग्यारहवीं पुस्तक है। वे GD Goenka Public School, Agra से जुड़े हैं, जहां विद्यार्थियों में साहित्य और लेखन को बढ़ावा देने की पहल लगातार की जा रही है। स्कूल में आयोजित होने वाले लिटरेचर फेस्ट और रचनात्मक गतिविधियों का असर यह रहा कि अब तक 100 से अधिक विद्यार्थी अपनी पुस्तकें लिख चुके हैं। वर्ष 2021 में स्कूल की छात्रा और युवा लेखिका इशिका बंसल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में पुनीत वशिष्ठ ‘Principal of Principles’ और ‘यात्रा’ नामक नई पुस्तकों पर भी कार्य कर रहे हैं। ‘Teen in the Canteen’ किशोरों और बड़ों के बीच संवाद का एक ऐसा माध्यम बनने का प्रयास है, जो नई पीढ़ी की भावनाओं और अनुभवों को साहित्य के जरिए सामने लाता है।

