किशनगंज के ठाकुरगंज में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी रिपोर्ट में सरकारी भूमि के मूल्यांकन का विवरण छूटने का मामला सामने आया है। कुल 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से संबंधित प्रतिवेदन में 1.68 एकड़ सरकारी भूमि की न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) की राशि दर्ज नहीं थी। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन की MVR राशि प्रतिवेदन में क्यों दर्ज नहीं की गई। फिलहाल, इस मामले में किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। 188 एकड़ रैयती और 1.68 एकड़ सरकारी जमीन प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए कुल 189.68 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 188 एकड़ रैयती और 1.68 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है। किशनगंज के अपर समाहर्ता ने 23 सितंबर 2026 को पत्रांक 3836 के जरिए कुल जमीन का उल्लेख किया था। प्रतिवेदन की समीक्षा के दौरान सरकारी भूमि की MVR राशि का विवरण दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। तीन दिनों में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश अंचल अधिकारी ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को तीन दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा है। इसमें सरकारी जमीन के मूल्यांकन का विवरण छूटने के कारण स्पष्ट करने होंगे। जांच के दौरान जमीन के रकबे, प्रकृति और निर्धारित न्यूनतम मूल्यांकन दर से जुड़े राजस्व अभिलेखों की समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरी सुधार करते हुए संशोधित प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। अक्टूबर 2025 से चल रही अधिग्रहण की प्रक्रिया ठाकुरगंज में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से आगे बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर 2025 को मुख्यालय 111 एरिया की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 7 नवंबर 2025 को रक्षा संपदा अधिकारी ने 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से संबंधित पत्र जारी किया था। इसमें परियोजना की सैद्धांतिक स्वीकृति (IPA) का उल्लेख था। इसके बाद जिलाधिकारी, किशनगंज और ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी के स्तर पर जमीन से जुड़े प्रशासनिक पत्राचार हुए और अधिग्रहण संबंधी प्रतिवेदन तैयार किए गए। अब सरकारी भूमि की MVR राशि का विवरण छूटने के बाद संबंधित दस्तावेजों में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान मूल्यांकन संबंधी विवरण को दुरुस्त करने पर है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि मूल प्रतिवेदन में यह जानकारी क्यों छूटी और संशोधित प्रतिवेदन के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया में आगे क्या कार्रवाई होगी। किशनगंज के ठाकुरगंज में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ी रिपोर्ट में सरकारी भूमि के मूल्यांकन का विवरण छूटने का मामला सामने आया है। कुल 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से संबंधित प्रतिवेदन में 1.68 एकड़ सरकारी भूमि की न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) की राशि दर्ज नहीं थी। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी जमीन की MVR राशि प्रतिवेदन में क्यों दर्ज नहीं की गई। फिलहाल, इस मामले में किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। 188 एकड़ रैयती और 1.68 एकड़ सरकारी जमीन प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए कुल 189.68 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें 188 एकड़ रैयती और 1.68 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है। किशनगंज के अपर समाहर्ता ने 23 सितंबर 2026 को पत्रांक 3836 के जरिए कुल जमीन का उल्लेख किया था। प्रतिवेदन की समीक्षा के दौरान सरकारी भूमि की MVR राशि का विवरण दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। तीन दिनों में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश अंचल अधिकारी ने संबंधित राजस्व कर्मचारी को तीन दिनों के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने को कहा है। इसमें सरकारी जमीन के मूल्यांकन का विवरण छूटने के कारण स्पष्ट करने होंगे। जांच के दौरान जमीन के रकबे, प्रकृति और निर्धारित न्यूनतम मूल्यांकन दर से जुड़े राजस्व अभिलेखों की समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जरूरी सुधार करते हुए संशोधित प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा। अक्टूबर 2025 से चल रही अधिग्रहण की प्रक्रिया ठाकुरगंज में प्रस्तावित सैन्य स्टेशन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया अक्टूबर 2025 से आगे बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1 अक्टूबर 2025 को मुख्यालय 111 एरिया की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 7 नवंबर 2025 को रक्षा संपदा अधिकारी ने 189.68 एकड़ जमीन के अधिग्रहण से संबंधित पत्र जारी किया था। इसमें परियोजना की सैद्धांतिक स्वीकृति (IPA) का उल्लेख था। इसके बाद जिलाधिकारी, किशनगंज और ठाकुरगंज के अंचल अधिकारी के स्तर पर जमीन से जुड़े प्रशासनिक पत्राचार हुए और अधिग्रहण संबंधी प्रतिवेदन तैयार किए गए। अब सरकारी भूमि की MVR राशि का विवरण छूटने के बाद संबंधित दस्तावेजों में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान मूल्यांकन संबंधी विवरण को दुरुस्त करने पर है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होगा कि मूल प्रतिवेदन में यह जानकारी क्यों छूटी और संशोधित प्रतिवेदन के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया में आगे क्या कार्रवाई होगी।

