किशनगंज में विश्वकर्मा पूजा की तैयारी तेज:कल 17 सितंबर को होगी पूजा, मूर्तियों को दिया जा रहा अंतिम रूप

किशनगंज में विश्वकर्मा पूजा की तैयारी तेज:कल 17 सितंबर को होगी पूजा, मूर्तियों को दिया जा रहा अंतिम रूप

किशनगंज जिले में विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। हर साल की तरह इस साल भी कल गुरुवार, 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से की जाएगी। इसके लिए मंदिरों, कारखानों और पूजा पंडालों में सजावट का काम आखिरी दौर में है। मूर्तिकार भी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। सजाने और रंगने का काम लगभग पूरा शहर के कुम्हार टोली और दूसरे इलाकों में भगवान विश्वकर्मा की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। मूर्तिकारों ने बताया कि इस साल 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की छोटी-बड़ी मूर्तियां तैयार की गई हैं। वर्कशॉप, फैक्ट्री, गैराज और दुकानों के लिए लोग पहले से ही मूर्तियों की बुकिंग करवा रहे हैं। मूर्तियों को सजाने और रंगने का काम लगभग पूरा हो चुका है। हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इस दिन औजारों, मशीनों और निर्माण से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है। सृजन और शिल्प के देवता के रूप में पूजा पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और नगर निर्माता कहा जाता है। माना जाता है कि रावण की सोने की लंका, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्र की इंद्रपुरी और पुष्पक विमान का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। उनके अद्भुत शिल्प कौशल के कारण ही उन्हें विश्वकर्मा की उपाधि मिली। तभी से उन्हें सृजन और शिल्प के देवता के रूप में पूजा जाता है। किशनगंज जिले में विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। हर साल की तरह इस साल भी कल गुरुवार, 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा धूमधाम से की जाएगी। इसके लिए मंदिरों, कारखानों और पूजा पंडालों में सजावट का काम आखिरी दौर में है। मूर्तिकार भी मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। सजाने और रंगने का काम लगभग पूरा शहर के कुम्हार टोली और दूसरे इलाकों में भगवान विश्वकर्मा की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। मूर्तिकारों ने बताया कि इस साल 1,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की छोटी-बड़ी मूर्तियां तैयार की गई हैं। वर्कशॉप, फैक्ट्री, गैराज और दुकानों के लिए लोग पहले से ही मूर्तियों की बुकिंग करवा रहे हैं। मूर्तियों को सजाने और रंगने का काम लगभग पूरा हो चुका है। हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इस दिन औजारों, मशीनों और निर्माण से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है। सृजन और शिल्प के देवता के रूप में पूजा पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का वास्तुकार और नगर निर्माता कहा जाता है। माना जाता है कि रावण की सोने की लंका, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्र की इंद्रपुरी और पुष्पक विमान का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। उनके अद्भुत शिल्प कौशल के कारण ही उन्हें विश्वकर्मा की उपाधि मिली। तभी से उन्हें सृजन और शिल्प के देवता के रूप में पूजा जाता है।  

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