किशनगंज के उत्तर कुढ़ेली स्कूल में निपुण पथ मीटिंग हुई:बच्चों की पढ़ाई, राइटिंग और मैथ्स को मजबूत करने पर फोकस

किशनगंज के उत्तर कुढ़ेली स्कूल में निपुण पथ मीटिंग हुई:बच्चों की पढ़ाई, राइटिंग और मैथ्स को मजबूत करने पर फोकस

किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में शनिवार को माता-पिता और शिक्षकों की एक खास बैठक हुई। इस बैठक का नाम ‘निपुण पथ’ रखा गया था। इसका मतलब है बच्चों को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गिनती-हिसाब सिखाना। इस बैठक का मुख्य मकसद था कि बच्चे पढ़ाई में आगे बढ़ें और स्कूल व घर के बीच अच्छा तालमेल बने। बैठक में शिक्षकों ने माता-पिता से बच्चों की पढ़ाई को लेकर खुलकर बात की। बच्चे किताब कैसे पढ़ते हैं, उनकी लिखावट कैसी है और गणित में वे कितने अच्छे हैं, इस पर चर्चा हुई। स्टूडेंट ऑफ द मंथ का पुरस्कार दिया इसके अलावा बच्चे रोज स्कूल आ रहे हैं या नहीं, होमवर्क कर रहे हैं या नहीं और घर पर पढ़ाई में क्या दिक्कत आ रही है, इस पर भी बात हुई। शिक्षकों ने माता-पिता से कहा कि सिर्फ स्कूल में पढ़ाने से काम नहीं चलेगा। घर पर भी बच्चों को रोज थोड़ा समय पढ़ने, लिखने और गिनती का अभ्यास कराना जरूरी है। इससे बच्चे जल्दी सीखेंगे। माता-पिता ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वे बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल का पूरा साथ देंगे और घर पर भी ध्यान देंगे। बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए इस दौरान कुछ बच्चों को ‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’ का पुरस्कार दिया गया। शिक्षक और माता-पिता मौजूद ये वे बच्चे हैं जिन्होंने पढ़ाई में अच्छा काम किया। साथ ही एक माता-पिता को स्कूल की मदद करने के लिए ‘पेरेंट ऑफ द मंथ’ का सम्मान भी मिला। स्कूल के प्रधानाध्यापक विक्रम मिश्रा ने कहा कि बच्चा सिर्फ स्कूल में नहीं सीखता। जब शिक्षक और माता-पिता दोनों मिलकर मदद करते हैं, तो बच्चा तेजी से निपुण बनता है। बैठक में स्कूल के सभी शिक्षक और माता-पिता मौजूद थे। अंत में सबने नारा लगाया – ‘पढ़ेंगे, लिखेंगे, गिनती करेंगे, निपुण बनकर आगे बढ़ेंगे।’ किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय उत्तर कुढ़ेली में शनिवार को माता-पिता और शिक्षकों की एक खास बैठक हुई। इस बैठक का नाम ‘निपुण पथ’ रखा गया था। इसका मतलब है बच्चों को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गिनती-हिसाब सिखाना। इस बैठक का मुख्य मकसद था कि बच्चे पढ़ाई में आगे बढ़ें और स्कूल व घर के बीच अच्छा तालमेल बने। बैठक में शिक्षकों ने माता-पिता से बच्चों की पढ़ाई को लेकर खुलकर बात की। बच्चे किताब कैसे पढ़ते हैं, उनकी लिखावट कैसी है और गणित में वे कितने अच्छे हैं, इस पर चर्चा हुई। स्टूडेंट ऑफ द मंथ का पुरस्कार दिया इसके अलावा बच्चे रोज स्कूल आ रहे हैं या नहीं, होमवर्क कर रहे हैं या नहीं और घर पर पढ़ाई में क्या दिक्कत आ रही है, इस पर भी बात हुई। शिक्षकों ने माता-पिता से कहा कि सिर्फ स्कूल में पढ़ाने से काम नहीं चलेगा। घर पर भी बच्चों को रोज थोड़ा समय पढ़ने, लिखने और गिनती का अभ्यास कराना जरूरी है। इससे बच्चे जल्दी सीखेंगे। माता-पिता ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वे बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल का पूरा साथ देंगे और घर पर भी ध्यान देंगे। बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए इस दौरान कुछ बच्चों को ‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’ का पुरस्कार दिया गया। शिक्षक और माता-पिता मौजूद ये वे बच्चे हैं जिन्होंने पढ़ाई में अच्छा काम किया। साथ ही एक माता-पिता को स्कूल की मदद करने के लिए ‘पेरेंट ऑफ द मंथ’ का सम्मान भी मिला। स्कूल के प्रधानाध्यापक विक्रम मिश्रा ने कहा कि बच्चा सिर्फ स्कूल में नहीं सीखता। जब शिक्षक और माता-पिता दोनों मिलकर मदद करते हैं, तो बच्चा तेजी से निपुण बनता है। बैठक में स्कूल के सभी शिक्षक और माता-पिता मौजूद थे। अंत में सबने नारा लगाया – ‘पढ़ेंगे, लिखेंगे, गिनती करेंगे, निपुण बनकर आगे बढ़ेंगे।’  

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