पानीपत में कार चोरी होने के मामले में बीमा कंपनी की ओर से बीमित राशि का भुगतान नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता सेवा में कमी का जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को कार की बीमित राशि 4 लाख 15 हजार 861 रुपये के साथ शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा 11 हजार रुपये मुआवजा और 5500 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने होंगे। आयोग ने कंपनी को आदेश की पालना के लिए 45 दिन का समय दिया है। तय समय में भुगतान नहीं करने पर शिकायतकर्ता को शिकायत दाखिल करने की तारीख से 12 प्रतिशत सालाना ब्याज पाने का हक होगा। ये फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने सुनाया है। मामला समालखा के शास्त्री नगर, भापरा रोड निवासी दिनेश कुमार की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। नरेला में सड़क किनारे खड़ी कार चोरी हुई शिकायत के अनुसार, दिनेश कुमार के पास हुंडई ग्रैंड आई10 नियोस कार थी। कार का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से 27 फरवरी 2024 से 26 फरवरी 2025 तक बीमा कराया गया था। 25 फरवरी 2025 को शाम करीब छह बजे दिल्ली के नरेला स्थित माता मनसा मंदिर रोड के सामने से कार चोरी हो गई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद नरेला थाने में एफआईआर दर्ज की गई। कार चोरी होने की सूचना बीमा कंपनी को भी दी गई। कंपनी ने मामले में सर्वेयर नियुक्त किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी की ओर से 4 लाख 14 हजार 861 रुपये के दावे की मंजूरी के लिए ईमेल भी भेजा गया, लेकिन बीमा पॉलिसी में शामिल रिटर्न टू इनवॉइस अतिरिक्त कवर के तहत उन्होंने कार की पूरी बीमित राशि मांगी। रिटर्न टू इनवॉइस कवर के लिए दिया था अतिरिक्त प्रीमियम शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि बीमा पॉलिसी लेते समय रिटर्न टू इनवॉइस अतिरिक्त कवर के लिए 2495 रुपये का प्रीमियम भी लिया गया था। इस कवर के आधार पर उन्होंने कार की बीमित राशि का भुगतान मांगा, लेकिन कंपनी ने उनकी मांग पूरी नहीं की। इसके बाद उन्होंने 24 नवंबर 2025 को कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। दिनेश कुमार ने आयोग से बीमित कार की पूरी राशि, 18 प्रतिशत सालाना ब्याज, एक लाख रुपये मुआवजा और 33 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में दिलाने की मांग की थी। बीमा कंपनी के पेश नहीं होने पर एकतरफा सुनवाई नोटिस मिलने के बावजूद बीमा कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इसके चलते 19 मार्च 2026 को कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही का आदेश दिया गया। शिकायतकर्ता की ओर से पेश साक्ष्यों का कंपनी ने विरोध नहीं किया। आयोग ने रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करते हुए माना कि शिकायतकर्ता 4 लाख 15 हजार 861 रुपये की बीमित राशि पाने का हकदार है। आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से भुगतान नहीं किए जाने को सेवा में कमी मानते हुए शिकायत स्वीकार कर ली।

