कानपुर के यतीमखाना स्थित राधा-कृष्ण मंदिर आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल बना हुआ है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं। जन्माष्टमी के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग भी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। मंदिर में श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर विशेष आयोजन किए जाते हैं, जिसमें दोनों समुदायों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी का कार्यक्रम भी यहां धूमधाम से आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में भी हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ शामिल होकर खुशियां मनाते हैं। यतीमखाना स्थित यह राधा-कृष्ण मंदिर लंबे समय से आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश देता आ रहा है। यहां दोनों समुदायों के लोगों का मिलकर धार्मिक पर्व मनाना सामाजिक एकता की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है। यह मंदिर आज भी कानपुर में हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत मिसाल बना हुआ है।

