कटिहार के डूमर वाली मैया मंदिर में बलि नहीं चढ़ती:नारियल और चुनरी चढ़ाने की है परंपरा, बिहार-बंगाल-झारखंड से आते हैं श्रद्धालु

कटिहार के डूमर वाली मैया मंदिर में बलि नहीं चढ़ती:नारियल और चुनरी चढ़ाने की है परंपरा, बिहार-बंगाल-झारखंड से आते हैं श्रद्धालु

कटिहार के डूमर में स्थित डूमर वाली मैया मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। नवरात्र के दौरान यहां बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां पूरी होती है। मंदिर की खास बात यह है कि यहां बलि नहीं दी जाती, बल्कि मां को नारियल और चुनरी चढ़ाई जाती है। 1879 में शिव मंदिर के रूप में हुई थी शुरुआत डूमर वाली मैया मंदिर का इतिहास वर्ष 1879 से जुड़ा है। स्वर्गीय जोगश्वर प्रसाद सिन्हा ने यहां शिव मंदिर की शुरुआत की थी। उस समय आसपास के ग्रामीणों को दुर्गा पूजा के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए वर्ष 2010 में शिव मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा का मंदिर बनाया गया। इसके निर्माण में अंगिका भाषा के गायक सुनील छैला बिहारी की भी अहम भूमिका रही। नवरात्र में पहली पूजा से दशमी तक देवी भागवत कथा नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में पहली पूजा से दशमी तक श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष वृंदावन धाम से स्वामी संजय कृष्ण शास्त्री महाराज कथा सुनाने पहुंचे हैं। कथा सुनने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी बनाई जा रही हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में धार्मिक गतिविधियों के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ है। बिहार के अलावा बंगाल-झारखंड से भी आते हैं श्रद्धालु स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, डूमर वाली मैया मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। नवरात्र में दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां बलि की जगह नारियल और चुनरी चढ़ाने की परंपरा है। दुर्गापूजा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी और ग्रामीण आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। कटिहार के डूमर में स्थित डूमर वाली मैया मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। नवरात्र के दौरान यहां बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां पूरी होती है। मंदिर की खास बात यह है कि यहां बलि नहीं दी जाती, बल्कि मां को नारियल और चुनरी चढ़ाई जाती है। 1879 में शिव मंदिर के रूप में हुई थी शुरुआत डूमर वाली मैया मंदिर का इतिहास वर्ष 1879 से जुड़ा है। स्वर्गीय जोगश्वर प्रसाद सिन्हा ने यहां शिव मंदिर की शुरुआत की थी। उस समय आसपास के ग्रामीणों को दुर्गा पूजा के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए वर्ष 2010 में शिव मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा का मंदिर बनाया गया। इसके निर्माण में अंगिका भाषा के गायक सुनील छैला बिहारी की भी अहम भूमिका रही। नवरात्र में पहली पूजा से दशमी तक देवी भागवत कथा नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में पहली पूजा से दशमी तक श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष वृंदावन धाम से स्वामी संजय कृष्ण शास्त्री महाराज कथा सुनाने पहुंचे हैं। कथा सुनने के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी बनाई जा रही हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में धार्मिक गतिविधियों के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ है। बिहार के अलावा बंगाल-झारखंड से भी आते हैं श्रद्धालु स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, डूमर वाली मैया मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। नवरात्र में दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां बलि की जगह नारियल और चुनरी चढ़ाने की परंपरा है। दुर्गापूजा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी और ग्रामीण आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है।  

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