औरंगाबाद- शहादत दिवस पर शहीद जगतपति को किया नमन:लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी, स्कूली पाठ्यक्रम में जीवनी शामिल करने की मांग

औरंगाबाद- शहादत दिवस पर शहीद जगतपति को किया नमन:लोगों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी, स्कूली पाठ्यक्रम में जीवनी शामिल करने की मांग

औरंगाबाद में स्वतंत्रता सेनानी जगतपति कुमार को उनके शहादत दिवस पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन और रमेश चौक के पास उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोगों ने शहीद जगतपति अमर रहे और वंदे मातरम के नारे लगाकर उनके बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि देश की आजादी के लिए शहीद जगतपति कुमार का बलिदान युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देशभर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन तेज था, उसी क्रम में पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के प्रयास में जगतपति कुमार अपने छह अन्य साथियों के साथ अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए थे। उनके बलिदान की स्मृति में औरंगाबाद में स्थापित प्रतिमाओं पर लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में एनसीसी तथा स्काउट एवं गाइड के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया और शहीद को सम्मान दिया। ‘स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो जीवनी’ इस अवसर पर जेपी सेनानी अजय कुमार श्रीवास्तव और लोक अभियोजक अजय कुमार संतोष ने शहीद जगतपति कुमार की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहीदों की स्मृतियों को केवल विशेष अवसरों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है। जगतपति कुमार के जीवन और बलिदान की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि बच्चे देश के स्वतंत्रता संग्राम के स्थानीय नायकों के योगदान को समझ सके। वक्ताओं ने कहा कि शहीद जगतपति की राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है। उनकी जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्र-छात्राओं में देश के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने और उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया। औरंगाबाद में स्वतंत्रता सेनानी जगतपति कुमार को उनके शहादत दिवस पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन और रमेश चौक के पास उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोगों ने शहीद जगतपति अमर रहे और वंदे मातरम के नारे लगाकर उनके बलिदान को याद किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि देश की आजादी के लिए शहीद जगतपति कुमार का बलिदान युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब देशभर में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन तेज था, उसी क्रम में पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के प्रयास में जगतपति कुमार अपने छह अन्य साथियों के साथ अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए थे। उनके बलिदान की स्मृति में औरंगाबाद में स्थापित प्रतिमाओं पर लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में एनसीसी तथा स्काउट एवं गाइड के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया और शहीद को सम्मान दिया। ‘स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो जीवनी’ इस अवसर पर जेपी सेनानी अजय कुमार श्रीवास्तव और लोक अभियोजक अजय कुमार संतोष ने शहीद जगतपति कुमार की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शहीदों की स्मृतियों को केवल विशेष अवसरों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है। जगतपति कुमार के जीवन और बलिदान की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि बच्चे देश के स्वतंत्रता संग्राम के स्थानीय नायकों के योगदान को समझ सके। वक्ताओं ने कहा कि शहीद जगतपति की राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है। उनकी जीवनी को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्र-छात्राओं में देश के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने और उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया।  

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