औरंगाबाद जिले में वज्रपात(आकाशीय बिजली) से होने वाली दुर्घटनाओं और जन-धन की क्षति को कम करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के विभिन्न पंचायतों में एलईडी युक्त जागरूकता वाहनों और सामुदायिक स्वयंसेवकों के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला आपदा प्रबंधन शाखा की निर्धारित कार्य योजना के अनुसार चार अंचलों की आठ पंचायतों में एलईडी जागरूकता वाहनों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इसके तहत औरंगाबाद अंचल की कुर्माहा, मंझार पंचायत, देव अंचल की दुलारे, पूर्वी केताकी पंचायत, गोह अंचल की भुरकुंडा, चापुक पंचायत और कुटुंबा अंचल की डुमरी, घेउरा पंचायत में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इन पंचायतों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से वज्रपात से बचाव संबंधी संदेशों का प्रसारण किया गया। वहीं, सामुदायिक स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को समझाया कि आकाशीय बिजली चमकने के दौरान किन स्थानों पर रहना खतरनाक हो सकता है और ऐसी परिस्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रामीणों को समझाए वज्रपात से बचाव के तरीके जागरूकता अभियान को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पपेट-शो यानी कठपुतली कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर लोगों तक आपदा से बचाव का संदेश सरल भाषा और मनोरंजक तरीके से पहुंचाना था। निर्धारित कार्यक्रम के तहत सरगवां, बेड़िनी, घोड़ा डिहरी एवं मनिका पंचायतों में पपेट-शो आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कठपुतलियों के प्रदर्शन द्वारा लोगों को बताया गया कि वज्रपात कितना खतरनाक हो सकता है। इससे बचने के लिए समय रहते सावधानी बरतना कितना जरूरी है। पपेट-शो के दौरान लोगों को समझाया गया कि बारिश, गरज-चमक के दौरान खुले मैदान में रहना, पेड़ों के नीचे शरण लेना, बिजली के खंभों के आसपास खड़े होना और असुरक्षित स्थानों पर मौजूद रहना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे समय में सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहना सबसे बेहतर उपाय है। आकाशीय बिजली चमकने पर बरतें सावधानी इसके अलावा मौसम संबंधी चेतावनियों और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपील की गई है। विशेष रूप से किसानों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। जिला प्रशासन के अनुसार वज्रपात से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार विकसित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिले की अलग-अलग पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि एलईडी वाहनों, सामुदायिक स्वयंसेवकों और पपेट-शो के माध्यम से जिले के अधिक से अधिक ग्रामीणों तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते सावधानी बरतकर बहुमूल्य मानव जीवन की रक्षा की जा सके। औरंगाबाद जिले में वज्रपात(आकाशीय बिजली) से होने वाली दुर्घटनाओं और जन-धन की क्षति को कम करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले के विभिन्न पंचायतों में एलईडी युक्त जागरूकता वाहनों और सामुदायिक स्वयंसेवकों के माध्यम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला आपदा प्रबंधन शाखा की निर्धारित कार्य योजना के अनुसार चार अंचलों की आठ पंचायतों में एलईडी जागरूकता वाहनों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इसके तहत औरंगाबाद अंचल की कुर्माहा, मंझार पंचायत, देव अंचल की दुलारे, पूर्वी केताकी पंचायत, गोह अंचल की भुरकुंडा, चापुक पंचायत और कुटुंबा अंचल की डुमरी, घेउरा पंचायत में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। इन पंचायतों में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से वज्रपात से बचाव संबंधी संदेशों का प्रसारण किया गया। वहीं, सामुदायिक स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को समझाया कि आकाशीय बिजली चमकने के दौरान किन स्थानों पर रहना खतरनाक हो सकता है और ऐसी परिस्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रामीणों को समझाए वज्रपात से बचाव के तरीके जागरूकता अभियान को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पपेट-शो यानी कठपुतली कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर लोगों तक आपदा से बचाव का संदेश सरल भाषा और मनोरंजक तरीके से पहुंचाना था। निर्धारित कार्यक्रम के तहत सरगवां, बेड़िनी, घोड़ा डिहरी एवं मनिका पंचायतों में पपेट-शो आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कठपुतलियों के प्रदर्शन द्वारा लोगों को बताया गया कि वज्रपात कितना खतरनाक हो सकता है। इससे बचने के लिए समय रहते सावधानी बरतना कितना जरूरी है। पपेट-शो के दौरान लोगों को समझाया गया कि बारिश, गरज-चमक के दौरान खुले मैदान में रहना, पेड़ों के नीचे शरण लेना, बिजली के खंभों के आसपास खड़े होना और असुरक्षित स्थानों पर मौजूद रहना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे समय में सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहना सबसे बेहतर उपाय है। आकाशीय बिजली चमकने पर बरतें सावधानी इसके अलावा मौसम संबंधी चेतावनियों और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपील की गई है। विशेष रूप से किसानों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। जिला प्रशासन के अनुसार वज्रपात से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार विकसित करना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से जिले की अलग-अलग पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशासन की कोशिश है कि एलईडी वाहनों, सामुदायिक स्वयंसेवकों और पपेट-शो के माध्यम से जिले के अधिक से अधिक ग्रामीणों तक सुरक्षा का संदेश पहुंचाया जाए, ताकि समय रहते सावधानी बरतकर बहुमूल्य मानव जीवन की रक्षा की जा सके।

