औरंगाबाद में धान खरीद नहीं करेंगे पैक्स अध्यक्ष:जिले की सभी समितियों ने बैठक में लिया फैसला; 15 नवंबर से शुरू होनी है सरकारी खरीद

औरंगाबाद में धान खरीद नहीं करेंगे पैक्स अध्यक्ष:जिले की सभी समितियों ने बैठक में लिया फैसला; 15 नवंबर से शुरू होनी है सरकारी खरीद

धान खरीद का सीजन शुरू होने से पहले ही औरंगाबाद में विवाद खड़ा हो गया है। जिले के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने पांच मांगें पूरी नहीं होने तक सरकारी धान खरीद नहीं करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई जिलास्तरीय बैठक में सभी समितियों के अध्यक्षों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। इससे 15 नवंबर से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। पांच मांगों को लेकर समितियों ने बनाई रणनीति आगामी एक नवंबर से उत्तर बिहार और 15 नवंबर से दक्षिण बिहार के जिलों में धान की सरकारी खरीद शुरू होनी है। इसी बीच औरंगाबाद के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने अपनी समस्याओं को लेकर बैठक की। इसमें पांच सूत्री मांगों पर चर्चा हुई और सरकार से इन्हें पूरा करने की मांग की गई। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जिले में धान अधिप्राप्ति शुरू नहीं की जाएगी। अध्यक्षों का कहना है कि पिछले वर्षों की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान किए बिना नई खरीद की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल है। अतिरिक्त ब्याज वापस करने समेत ये हैं मांगें पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की पांच प्रमुख मांगें हैं। इनमें पिछले साल धान खरीद के दौरान समितियों पर लगाए गए अतिरिक्त ब्याज को वापस करना शामिल है। इसके अलावा राज्य खाद्य निगम, पैक्स और मिलर के बीच त्रिपक्षीय समझौता कराने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। अन्य मांगों में मिल टैगिंग की प्रक्रिया में पैक्स को अपनी पसंद से निर्णय लेने की छूट देना, प्रबंधकीय अनुदान और बोरे की राशि बढ़ाना शामिल है। साथ ही जिले में खरीदे गए धान की 50 प्रतिशत मात्रा की उसना और 50 प्रतिशत मात्रा की अरवा मिलिंग कराने का प्रावधान करने की मांग की गई है। समिति अध्यक्षों का कहना है कि इन बदलावों से धान खरीद की प्रक्रिया आसान होगी और समितियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। चार-पांच महीने का अतिरिक्त ब्याज बना नाराजगी की वजह सेंट्रल को-ऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पिछले साल धान खरीद के दौरान समितियों पर चार से पांच महीने का अतिरिक्त ब्याज लगाया गया था। इससे पैक्स अध्यक्षों को आर्थिक परेशानी हुई। उनका कहना है कि जब तक पिछले साल का बकाया और अतिरिक्त ब्याज वापस नहीं किया जाता, तब तक इस वर्ष धान खरीद करना संभव नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औरंगाबाद में 15 नवंबर से धान खरीद प्रस्तावित है, लेकिन पांचों मांगें पूरी होने तक समितियां इसमें हिस्सा नहीं लेंगी। यह फैसला किसी एक समिति का नहीं, बल्कि जिले के सभी पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की सहमति से लिया गया है। बैठक में कई समितियों के अध्यक्ष रहे मौजूद जिलास्तरीय बैठक में सेंट्रल को-ऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, श्रीराम शर्मा, उपाध्यक्ष अमरेंद्र सिंह उर्फ छोटू, पैक्स अध्यक्ष महेश्वर सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष पीयूष रंजन, मिथिलेश कुमार दीपक, कपिल सिंह, पैक्स अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता, उपेंद्र यादव, शंभू यादव, अरविंद कुमार सिंह, मनमोहन सिंह, अभिजीत सिंह, ओमप्रकाश सिंह और अनिल कुमार सिंह समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। पैक्स अध्यक्षों के इस फैसले से जिले में सरकारी धान खरीद प्रभावित होने की आशंका है। यदि 15 नवंबर तक मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो किसानों को अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में अब सरकार और सहकारिता विभाग के अगले कदम पर नजर है। धान खरीद का सीजन शुरू होने से पहले ही औरंगाबाद में विवाद खड़ा हो गया है। जिले के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने पांच मांगें पूरी नहीं होने तक सरकारी धान खरीद नहीं करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को हुई जिलास्तरीय बैठक में सभी समितियों के अध्यक्षों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। इससे 15 नवंबर से सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। पांच मांगों को लेकर समितियों ने बनाई रणनीति आगामी एक नवंबर से उत्तर बिहार और 15 नवंबर से दक्षिण बिहार के जिलों में धान की सरकारी खरीद शुरू होनी है। इसी बीच औरंगाबाद के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने अपनी समस्याओं को लेकर बैठक की। इसमें पांच सूत्री मांगों पर चर्चा हुई और सरकार से इन्हें पूरा करने की मांग की गई। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जिले में धान अधिप्राप्ति शुरू नहीं की जाएगी। अध्यक्षों का कहना है कि पिछले वर्षों की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान किए बिना नई खरीद की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल है। अतिरिक्त ब्याज वापस करने समेत ये हैं मांगें पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की पांच प्रमुख मांगें हैं। इनमें पिछले साल धान खरीद के दौरान समितियों पर लगाए गए अतिरिक्त ब्याज को वापस करना शामिल है। इसके अलावा राज्य खाद्य निगम, पैक्स और मिलर के बीच त्रिपक्षीय समझौता कराने का आदेश जारी करने की मांग की गई है। अन्य मांगों में मिल टैगिंग की प्रक्रिया में पैक्स को अपनी पसंद से निर्णय लेने की छूट देना, प्रबंधकीय अनुदान और बोरे की राशि बढ़ाना शामिल है। साथ ही जिले में खरीदे गए धान की 50 प्रतिशत मात्रा की उसना और 50 प्रतिशत मात्रा की अरवा मिलिंग कराने का प्रावधान करने की मांग की गई है। समिति अध्यक्षों का कहना है कि इन बदलावों से धान खरीद की प्रक्रिया आसान होगी और समितियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। चार-पांच महीने का अतिरिक्त ब्याज बना नाराजगी की वजह सेंट्रल को-ऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पिछले साल धान खरीद के दौरान समितियों पर चार से पांच महीने का अतिरिक्त ब्याज लगाया गया था। इससे पैक्स अध्यक्षों को आर्थिक परेशानी हुई। उनका कहना है कि जब तक पिछले साल का बकाया और अतिरिक्त ब्याज वापस नहीं किया जाता, तब तक इस वर्ष धान खरीद करना संभव नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि औरंगाबाद में 15 नवंबर से धान खरीद प्रस्तावित है, लेकिन पांचों मांगें पूरी होने तक समितियां इसमें हिस्सा नहीं लेंगी। यह फैसला किसी एक समिति का नहीं, बल्कि जिले के सभी पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की सहमति से लिया गया है। बैठक में कई समितियों के अध्यक्ष रहे मौजूद जिलास्तरीय बैठक में सेंट्रल को-ऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, श्रीराम शर्मा, उपाध्यक्ष अमरेंद्र सिंह उर्फ छोटू, पैक्स अध्यक्ष महेश्वर सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष पीयूष रंजन, मिथिलेश कुमार दीपक, कपिल सिंह, पैक्स अध्यक्ष राजेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता, उपेंद्र यादव, शंभू यादव, अरविंद कुमार सिंह, मनमोहन सिंह, अभिजीत सिंह, ओमप्रकाश सिंह और अनिल कुमार सिंह समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। पैक्स अध्यक्षों के इस फैसले से जिले में सरकारी धान खरीद प्रभावित होने की आशंका है। यदि 15 नवंबर तक मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो किसानों को अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में अब सरकार और सहकारिता विभाग के अगले कदम पर नजर है।  

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