एग्जाम के लिए खूब तैयारी की, परीक्षा कैंसिल हो गई:बाढ़ के कारण बेगूसराय 169 और भोजपुर के 277 स्कूल बंद, आज से थी अर्धवार्षिक परीक्षा

एग्जाम के लिए खूब तैयारी की, परीक्षा कैंसिल हो गई:बाढ़ के कारण बेगूसराय 169 और भोजपुर के 277 स्कूल बंद, आज से थी अर्धवार्षिक परीक्षा

‘बाढ़ के कारण 15 दिनों से स्कूल बंद है। मंगलवार से हमारी अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा होनी थी। हमने एग्जाम के लिए खूब तैयारी की थी, लेकिन अब एग्जाम कैसे दे। बाढ़ में स्कूल डूबा है। आने-जाना का रास्ता नहीं है। परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। सर ने कहा कि अब बाद में एग्जाम होगा।’ ये बातें बेगूसराय के सचिन कुमार ने कही है। जो क्लास 4 का छात्र है। सिर्फ सचिन ही नहीं, बल्कि और भी कई स्टूडेंट्स है जिनकी यही आपबीती है। दरअसल, बिहार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से क्लास 1 से 8 तक के छात्रों के लिए अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का शेड्यूल जारी किया गया था। पर बाढ़ के कारण बेगूसराय के 169 स्कूल बंद हैं, इन स्कूलों के लिए परीक्षा रद्द कर दी गई है। जिस कारण 40 हजार से अधिक बच्चे एग्जाम नहीं दे पाएंगे। वहीं, भोजपुर के 277 स्कूल भी सोमवार तक बंद रहे। जिसमें से करीब 40 प्रतिशत स्कूल आज खुल जाएंगे यहां पानी कम हुआ है। जो स्कूल खुलेंगे वहां आज परीक्षा होगी।
बेगूसराय और भोजपुर में कैसी है स्थिति, स्टूडेंट्स ने क्या कहा, किन परेशानियों से जूझना पड़ रहा है, पढ़ें रिपोर्ट… पहले बेगूसराय से स्कूलों की तस्वीरें… अब सिलसिलेवार पढ़ें बेगूसराय में स्टूडेंट्स ने क्या कहा… ‘स्कूल-घर दोनों जगह पानी, कैसे पढ़ाई करें’ क्लास 8 का स्टूडेंट प्रिंस कुमार ने कहा कि हमारे स्कूल के साथ-साथ घर में भी घुटना भर पानी है। 2 सितंबर से ही स्कूल में मेरी पढ़ाई-लिखाई बंद है, पर मैंने घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी की है, पर अब लगता है कि सारी मेहनत बेकार हो गई है। स्कूल में भी पानी और घर में भी पानी, पढ़ाई करे तो कैसे करे। बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बोर्ड परीक्षा के 5 महीने बचे हैं, पता नहीं कैसे होगी तैयारी सिगेंश्वर सिंह +2 उच्च विद्यालय चमथा के आकाश कुमार ने बताया कि मैट्रिक (10वीं) की बोर्ड परीक्षा में अब केवल 5 महीने का समय बचा है। बाढ़ के कारण स्कूल-कोचिंग सब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। सड़क पर पानी है। पानी कम होगा तब ही परीक्षा दे पाएंगे उत्क्रमित उच्च विद्यालय चमथा बादपुर के छात्र आदित्य कुमार और बादल कुमार ने बताया कि रास्तों पर पानी भरा है। न तो स्कूल जा पा रहे हैं और न ही ट्यूशन। परीक्षा की तैयारी आधी-अधूरी रह गई है। अब जब पानी उतरेगा और स्कूल खुलेगा, तभी हम परीक्षा दे पाएंगे।
‘स्कूल के सामान को ऊपर वाले फ्लोर पर सुरक्षित रखा है’ बलहपुर के पंचायत समिति सदस्य चंदन कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों की हालत बेहद गंभीर है। हमारे गांव के विद्यालय परिसर और नीचे के सभी कमरों में लगभग 3 से 4 फीट तक पानी भरा हुआ है। हमने शिक्षकों की मदद से स्कूल के जरूरी सामान, बेंच-डेस्क और दस्तावेजों को 2 मंजिला इमारत पर सुरक्षित रखवाया है। उपरी मंजिल पर कई बाढ़ प्रभावित परिवार भी शरण लिए हुए हैं। स्कूल पहुंचने वाले रास्तों पर कमर से ऊपर तक पानी भरा है। ऐसे में छोटे बच्चों को स्कूल बुलाना उनकी जान को जोखिम में डालना होगा। बच्चे सुरक्षित रहेंगे, तभी तो पढ़ेंगे। कई परिवार अपने बच्चों को लेकर दूसरे सुरक्षित स्थानों या रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। ‘टीचर ऑनलाइन अटेंडेंस बना रहे हैं’ चंदन कुमार कहते हैं कि फिलहाल बाढ़ के कारण प्रशासनिक निर्देशानुसार शिक्षकों को दूसरे गैर-प्रभावित स्कूलों में टैग कर दिया गया है, जहां वे जाकर ऑनलाइन अटेंडेंस बना रहे हैं, लेकिन स्कूल जलमग्न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा पूरी तरह ठप है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से बछवाड़ा और शाम्हो प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शाम्हो प्रखंड तो पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है, जिससे वहां के सभी स्कूल बंद हैं।
जिन बच्चों का एग्जाम नहीं हुआ, उनके लिए अलग से शेड्यूल जारी होगा- डीईओ बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) मनोज कुमार ने बताया कि जिले के 8 प्रखंडों के 147 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में चारों तरफ गंगा नदी का पानी भरा हुआ है। इसके अलावा 22 अन्य विद्यालयों में बाढ़ पीड़ितों के लिए आश्रय स्थल और सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में कुल 169 विद्यालयों में मंगलवार से अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का संचालन संभव नहीं है। इसकी पूरी रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक को भेज दी गई है। बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन स्कूलों में पानी नहीं है, वहां परीक्षा अपने समय पर होगी। 169 स्कूलों के 40 हजार से अधिक बच्चों के लिए स्थिति सामान्य होने और पानी घटने के बाद अलग से विशेष परीक्षा शेड्यूल जारी किया जाएगा।

अब पढें भोजपुर में स्कूलों की क्या स्थिति है, बच्चों ने क्या कहा… भोजपुर से तस्वीर…
स्कूल मर्ज किए, पर बच्चे दूरी के कारण नहीं जा पा रहे भोजपुर में भी क्लास 1 से 8 तक बच्चों के लिए आज से परीक्षा है। सोमवार तक यहां 277 स्कूल बंद थे, पर पानी कम होने के बाद इनमें से करीब 40 प्रतिशत स्कूलों को आज खोला जाएगा। वहां आज से परीक्षा होगी, पर जो स्कूल बंद हैं वहां के बच्चे एग्जाम नहीं दे पाएंगे। शिक्षा विभाग ने बाढ़ प्रभावित स्कूलों को आसपास के दूसरे स्कूलों में मर्ज कर परीक्षा और पढ़ाई कराने की व्यवस्था की है, लेकिन कई जगह यह व्यवस्था भी बच्चों के लिए राहत के बजाय नई परेशानी बन गई है। स्कूल दूर होने के कारण बच्चे वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। दूसरी ओर, बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी भी ठीक से नहीं हो पा रही है।
भोजपुर के टीचर और स्टूडेंट ने बताई परेशानी…. ‘मोबाइल में नेटवर्क नहीं होने से पढ़ाई नहीं कर पा रहा’ खवासपुर के राकेश ने बताया कि मैं 7वीं कक्षा में पढ़ता हूं और बाढ़ के कारण कई दिनों से घर में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा है। मोबाइल नेटवर्क नहीं रहता तो पढ़ाई रुक जाती है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान डाउट भी क्लियर नहीं हो पाते।
‘स्कूल दूर है, घर पर ही पढ़ाई कर रहे’ बिराहिमपुर की अंशु ने कहा कि मैट्रिक परीक्षा के फॉर्म भरने की चुनौती है। गांव के स्कूल में पानी भरने के बाद बबुरा स्कूल में मर्ज कर दिया गया है। स्कूल दूर होने के कारण वहां पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में घर पर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चे बताते हैं, नेटवर्क नहीं मिला रहा- टीचर शिक्षक नीरज कुमार ने बताया कि बबुरा स्कूल दूर होने के कारण कई बच्चों ने फोन कर अपनी परेशानी बताई। इसके बाद बच्चों की सुविधा के लिए यात्री शेड में बैठकर मैट्रिक और इंटर के फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि मंगलवार को जिले के करीब 40 प्रतिशत स्कूल खुलने की संभावना है। जो स्कूल बाढ़ के कारण बंद रहेंगे, वहां विभाग के निर्देश के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई और परीक्षाएं कराई जाएंगी। ‘बाढ़ के कारण 15 दिनों से स्कूल बंद है। मंगलवार से हमारी अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा होनी थी। हमने एग्जाम के लिए खूब तैयारी की थी, लेकिन अब एग्जाम कैसे दे। बाढ़ में स्कूल डूबा है। आने-जाना का रास्ता नहीं है। परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। सर ने कहा कि अब बाद में एग्जाम होगा।’ ये बातें बेगूसराय के सचिन कुमार ने कही है। जो क्लास 4 का छात्र है। सिर्फ सचिन ही नहीं, बल्कि और भी कई स्टूडेंट्स है जिनकी यही आपबीती है। दरअसल, बिहार राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से क्लास 1 से 8 तक के छात्रों के लिए अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का शेड्यूल जारी किया गया था। पर बाढ़ के कारण बेगूसराय के 169 स्कूल बंद हैं, इन स्कूलों के लिए परीक्षा रद्द कर दी गई है। जिस कारण 40 हजार से अधिक बच्चे एग्जाम नहीं दे पाएंगे। वहीं, भोजपुर के 277 स्कूल भी सोमवार तक बंद रहे। जिसमें से करीब 40 प्रतिशत स्कूल आज खुल जाएंगे यहां पानी कम हुआ है। जो स्कूल खुलेंगे वहां आज परीक्षा होगी।
बेगूसराय और भोजपुर में कैसी है स्थिति, स्टूडेंट्स ने क्या कहा, किन परेशानियों से जूझना पड़ रहा है, पढ़ें रिपोर्ट… पहले बेगूसराय से स्कूलों की तस्वीरें… अब सिलसिलेवार पढ़ें बेगूसराय में स्टूडेंट्स ने क्या कहा… ‘स्कूल-घर दोनों जगह पानी, कैसे पढ़ाई करें’ क्लास 8 का स्टूडेंट प्रिंस कुमार ने कहा कि हमारे स्कूल के साथ-साथ घर में भी घुटना भर पानी है। 2 सितंबर से ही स्कूल में मेरी पढ़ाई-लिखाई बंद है, पर मैंने घर पर रहकर परीक्षा की तैयारी की है, पर अब लगता है कि सारी मेहनत बेकार हो गई है। स्कूल में भी पानी और घर में भी पानी, पढ़ाई करे तो कैसे करे। बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बोर्ड परीक्षा के 5 महीने बचे हैं, पता नहीं कैसे होगी तैयारी सिगेंश्वर सिंह +2 उच्च विद्यालय चमथा के आकाश कुमार ने बताया कि मैट्रिक (10वीं) की बोर्ड परीक्षा में अब केवल 5 महीने का समय बचा है। बाढ़ के कारण स्कूल-कोचिंग सब पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। सड़क पर पानी है। पानी कम होगा तब ही परीक्षा दे पाएंगे उत्क्रमित उच्च विद्यालय चमथा बादपुर के छात्र आदित्य कुमार और बादल कुमार ने बताया कि रास्तों पर पानी भरा है। न तो स्कूल जा पा रहे हैं और न ही ट्यूशन। परीक्षा की तैयारी आधी-अधूरी रह गई है। अब जब पानी उतरेगा और स्कूल खुलेगा, तभी हम परीक्षा दे पाएंगे।
‘स्कूल के सामान को ऊपर वाले फ्लोर पर सुरक्षित रखा है’ बलहपुर के पंचायत समिति सदस्य चंदन कुमार सिंह ने बताया कि स्कूलों की हालत बेहद गंभीर है। हमारे गांव के विद्यालय परिसर और नीचे के सभी कमरों में लगभग 3 से 4 फीट तक पानी भरा हुआ है। हमने शिक्षकों की मदद से स्कूल के जरूरी सामान, बेंच-डेस्क और दस्तावेजों को 2 मंजिला इमारत पर सुरक्षित रखवाया है। उपरी मंजिल पर कई बाढ़ प्रभावित परिवार भी शरण लिए हुए हैं। स्कूल पहुंचने वाले रास्तों पर कमर से ऊपर तक पानी भरा है। ऐसे में छोटे बच्चों को स्कूल बुलाना उनकी जान को जोखिम में डालना होगा। बच्चे सुरक्षित रहेंगे, तभी तो पढ़ेंगे। कई परिवार अपने बच्चों को लेकर दूसरे सुरक्षित स्थानों या रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। ‘टीचर ऑनलाइन अटेंडेंस बना रहे हैं’ चंदन कुमार कहते हैं कि फिलहाल बाढ़ के कारण प्रशासनिक निर्देशानुसार शिक्षकों को दूसरे गैर-प्रभावित स्कूलों में टैग कर दिया गया है, जहां वे जाकर ऑनलाइन अटेंडेंस बना रहे हैं, लेकिन स्कूल जलमग्न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा पूरी तरह ठप है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से बछवाड़ा और शाम्हो प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शाम्हो प्रखंड तो पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है, जिससे वहां के सभी स्कूल बंद हैं।
जिन बच्चों का एग्जाम नहीं हुआ, उनके लिए अलग से शेड्यूल जारी होगा- डीईओ बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) मनोज कुमार ने बताया कि जिले के 8 प्रखंडों के 147 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में चारों तरफ गंगा नदी का पानी भरा हुआ है। इसके अलावा 22 अन्य विद्यालयों में बाढ़ पीड़ितों के लिए आश्रय स्थल और सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में कुल 169 विद्यालयों में मंगलवार से अर्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा का संचालन संभव नहीं है। इसकी पूरी रिपोर्ट बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक को भेज दी गई है। बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन स्कूलों में पानी नहीं है, वहां परीक्षा अपने समय पर होगी। 169 स्कूलों के 40 हजार से अधिक बच्चों के लिए स्थिति सामान्य होने और पानी घटने के बाद अलग से विशेष परीक्षा शेड्यूल जारी किया जाएगा।

अब पढें भोजपुर में स्कूलों की क्या स्थिति है, बच्चों ने क्या कहा… भोजपुर से तस्वीर…
स्कूल मर्ज किए, पर बच्चे दूरी के कारण नहीं जा पा रहे भोजपुर में भी क्लास 1 से 8 तक बच्चों के लिए आज से परीक्षा है। सोमवार तक यहां 277 स्कूल बंद थे, पर पानी कम होने के बाद इनमें से करीब 40 प्रतिशत स्कूलों को आज खोला जाएगा। वहां आज से परीक्षा होगी, पर जो स्कूल बंद हैं वहां के बच्चे एग्जाम नहीं दे पाएंगे। शिक्षा विभाग ने बाढ़ प्रभावित स्कूलों को आसपास के दूसरे स्कूलों में मर्ज कर परीक्षा और पढ़ाई कराने की व्यवस्था की है, लेकिन कई जगह यह व्यवस्था भी बच्चों के लिए राहत के बजाय नई परेशानी बन गई है। स्कूल दूर होने के कारण बच्चे वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। दूसरी ओर, बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण ऑनलाइन पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी भी ठीक से नहीं हो पा रही है।
भोजपुर के टीचर और स्टूडेंट ने बताई परेशानी…. ‘मोबाइल में नेटवर्क नहीं होने से पढ़ाई नहीं कर पा रहा’ खवासपुर के राकेश ने बताया कि मैं 7वीं कक्षा में पढ़ता हूं और बाढ़ के कारण कई दिनों से घर में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा है। मोबाइल नेटवर्क नहीं रहता तो पढ़ाई रुक जाती है। ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान डाउट भी क्लियर नहीं हो पाते।
‘स्कूल दूर है, घर पर ही पढ़ाई कर रहे’ बिराहिमपुर की अंशु ने कहा कि मैट्रिक परीक्षा के फॉर्म भरने की चुनौती है। गांव के स्कूल में पानी भरने के बाद बबुरा स्कूल में मर्ज कर दिया गया है। स्कूल दूर होने के कारण वहां पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में घर पर ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बच्चे बताते हैं, नेटवर्क नहीं मिला रहा- टीचर शिक्षक नीरज कुमार ने बताया कि बबुरा स्कूल दूर होने के कारण कई बच्चों ने फोन कर अपनी परेशानी बताई। इसके बाद बच्चों की सुविधा के लिए यात्री शेड में बैठकर मैट्रिक और इंटर के फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि मंगलवार को जिले के करीब 40 प्रतिशत स्कूल खुलने की संभावना है। जो स्कूल बाढ़ के कारण बंद रहेंगे, वहां विभाग के निर्देश के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई और परीक्षाएं कराई जाएंगी।  

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