Trisha Vijay controversy: तमिलनाडु के CM सी. जोसेफ विजय इन दिनों एक साथ दो विवादों को लेकर चर्चा में हैं। एक तरफ डीएमके के एडिटोरियल ‘मुरासोली’ ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक्ट्रेस त्रिशा कृष्णन की मौजूदगी को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। दूसरी तरफ विधानसभा में वन मंत्री आर. वी. रंजीत कुमार द्वारा दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि का नाम बिना सम्मानजनक संबोधन के लिए जाने पर हंगामा हुआ। विवाद बढ़ने पर सीएम विजय ने मंत्री की ओर से माफी मांगी।
त्रिशा के साथ सैल्यूट पर भी उठे सवाल
15 अगस्त को चेन्नई के फोर्ट सेंट जॉर्ज में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सीएम विजय ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। कार्यक्रम में एक्ट्रेस त्रिशा कृष्णन अपने माता-पिता के साथ आगे की कतार में बैठी थीं। समारोह के दौरान विजय और त्रिशा के एक-दूसरे को सैल्यूट करने को लेकर भी चर्चा हुई। बता दें, डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ ने अपने एडिटोरियल में इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला किया। एडिटोरियल का शीर्षक था, ‘तीन महीने में CM को आया डर’। इसमें त्रिशा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन एक्ट्रेस की मौजूदगी का स्पष्ट जिक्र करते हुए सवाल उठाए गए।
एडिटोरियल में लिखा कि एक्ट्रेस का सबसे आगे की कतार में बैठना और मुख्यमंत्री के साथ उनका एक-दूसरे को सैल्यूट करना उन लोगों को पसंद नहीं आया, जिन्होंने विजय को वोट दिया था। एडिटोरियल में ये भी कहा गया कि जो व्यक्ति इसे सम्मान की बात बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, वो आज तमिलनाडु का सीएम है।
विधानसभा में एम. करुणानिधि के नाम पर विवाद
इसी बीच सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया। राज्य के वन मंत्री आर. वी. रंजीत कुमार सदन में स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कथित कैश-फॉर-वोट की राजनीति पर बोल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने विवादित ‘थिरुमंगलम फॉर्मूला’का जिक्र किया।
रंजीत कुमार ने दावा किया कि पिछले चुनावों में उनके कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में एक वोट के लिए 1,500 रुपये तक बांटे गए थे। उन्होंने मौजूदा सरकार की तुलना करते हुए कहा कि उनकी सरकार बिना पैसे बांटे सत्ता में आई है।
‘कलैगनार’ नहीं कहा तो भड़के DMK विधायक
पुराने चुनावी तरीकों का जिक्र करते हुए रंजीत कुमार ने एम. करुणानिधि का नाम सिर्फ ‘करुणानिधि’ के तौर पर लिया। उन्होंने उनके नाम के साथ पारंपरिक सम्मानजनक संबोधन ‘कलैगनार’ या ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ का इस्तेमाल नहीं किया। इस पर पूर्व मंत्री के. के. एस. एस. आर. रामचंद्रन के नेतृत्व में डीएमके सदस्यों ने आपत्ति जताई। उन्होंने सदन में सम्मानित नेताओं के नाम के साथ सम्मानजनक संबोधन इस्तेमाल करने की परंपरा का हवाला दिया।
विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री विजय ने वन मंत्री का भाषण रोक दिया और मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने मंत्री की ओर से माफी मांगते हुए कहा, “मैं उनकी तरफ से माफी मांगता हूं।” मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद विवाद को शांत कराने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम ने ऐसे समय में राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है, जब डीएमके का मुखपत्र स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर भी विजय सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है। दरअसल, इस तरह स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा विवाद और विधानसभा में करुणानिधि के नाम पर हुआ हंगामा, दोनों ही मामलों में सीएम विजय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

