पुरस्कृत होते प्रतिभगी। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. आर.एन. चौरसिया ने पत्रकारिता को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि यह गरीबों, वंचितों और आम लोगों की आवाज है। कार्यक्रम में डॉ. सियाराम मुखिया, पत्रकार पंकज कुमार झा सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे। अंत में पत्रकारिता एवं जनसंपर्क सर्टिफिकेट कोर्स के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी और शिक्षक मौजूद रहे। भास्कर न्यूज|दरभंगा हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के हिन्दी विभाग में शुक्रवार को “समाज, राष्ट्र और साहित्य के उन्नयन में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने की। इस मौके पर हिन्दी के विद्वान एवं विश्वविद्यालय सिंडिकेट सदस्य प्रो. हरिनारायण सिंह को पाग, चादर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि 30 मई 1826 को ‘उदंत मार्तंड’ के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी। आज भी पत्रकारिता समाज, राष्ट्र और साहित्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत बनाती है तथा जनहित की आवाज को बुलंद करती है। मुख्य अतिथि प्रो. हरिनारायण सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया और एआई के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पत्रकारिता का महत्व कभी कम नहीं होगा। पत्रकारिता जनतंत्र की प्रहरी है और समाज को जागरूक बनाने की सबसे प्रभावी विधा है। उन्होंने छात्रों को पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए पत्रकारिता को पैशन, कौशल और जिम्मेदारी का संगम बताया। प्रो. विजय कुमार ने पत्रकारिता को जनविश्वास और राष्ट्रहित से जोड़ते हुए कहा कि पत्रकारों को सिद्धांतों और मूल्यों के आधार पर काम करना चाहिए। वहीं डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि पत्रकारिता समाज निर्माण की शक्तिशाली विधा है, जो लोगों को जागरूक करने और सामाजिक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाती है। पुरस्कृत होते प्रतिभगी। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. आर.एन. चौरसिया ने पत्रकारिता को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि यह गरीबों, वंचितों और आम लोगों की आवाज है। कार्यक्रम में डॉ. सियाराम मुखिया, पत्रकार पंकज कुमार झा सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे। अंत में पत्रकारिता एवं जनसंपर्क सर्टिफिकेट कोर्स के विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी और शिक्षक मौजूद रहे। भास्कर न्यूज|दरभंगा हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के हिन्दी विभाग में शुक्रवार को “समाज, राष्ट्र और साहित्य के उन्नयन में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने की। इस मौके पर हिन्दी के विद्वान एवं विश्वविद्यालय सिंडिकेट सदस्य प्रो. हरिनारायण सिंह को पाग, चादर और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि 30 मई 1826 को ‘उदंत मार्तंड’ के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी। आज भी पत्रकारिता समाज, राष्ट्र और साहित्य को दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत बनाती है तथा जनहित की आवाज को बुलंद करती है। मुख्य अतिथि प्रो. हरिनारायण सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया और एआई के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पत्रकारिता का महत्व कभी कम नहीं होगा। पत्रकारिता जनतंत्र की प्रहरी है और समाज को जागरूक बनाने की सबसे प्रभावी विधा है। उन्होंने छात्रों को पढ़ने-लिखने की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए पत्रकारिता को पैशन, कौशल और जिम्मेदारी का संगम बताया। प्रो. विजय कुमार ने पत्रकारिता को जनविश्वास और राष्ट्रहित से जोड़ते हुए कहा कि पत्रकारों को सिद्धांतों और मूल्यों के आधार पर काम करना चाहिए। वहीं डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि पत्रकारिता समाज निर्माण की शक्तिशाली विधा है, जो लोगों को जागरूक करने और सामाजिक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाती है।


