(फाइल फोटो के साथ)
लखनऊ, 26 अक्टूबर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा शासन में उत्तर प्रदेश के दंगा-मुक्त राज्य बन जाने का दावा करते हुए सोमवार को कहा कि पहले इस राज्य का नाम सुनकर उद्योगपति आने से कतराते थे लेकिन अब यह निवेशकों का मनपसंद गंतव्य बन गया है। उन्होंने कहा कि हालत यह थी कि 2015-16 का ‘इन्वेस्टर्स समिट’ दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में करानी पड़ी थी यानी निवेश उत्तर प्रदेश में होना था, लेकिन निवेशकों को बुलाने के लिए दिल्ली का सहारा लेना पड़ा। मुख्यमंत्री ने सोमवार को यहां ‘जीसीसी इनोवेशन समिट-2026’ में उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए एक आदर्श गंतव्य बताया, जहां कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि अब स्थिति बिल्कुल उलट है। उत्तर प्रदेश में 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सत्ता में आयी थी। इसके बाद योगी ने 2022 में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की।
इससे उन्होंने एक दुर्लभ उपलब्धि हासिल की, क्योंकि किसी भी मुख्यमंत्री के लिए एक पूर्ण पांच वर्षीय कार्यकाल के बाद लगातार दूसरा कार्यकाल जीतना असामान्य है। योगी ने कहा कि 2017 से पहले, किसी भी त्योहार या उत्सव से पहले दंगे भड़क जाते थे लेकिन अब उत्तर प्रदेश दंगा-मुक्त है। उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, हाल में संपन्न शारदीय नवरात्रि को ही ले लीजिए।
क्या आपने किसी दंगे के बारे में सुना? अब दंगे नहीं होते, क्योंकि दंगाई दस बार सोचते हैं।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तस्वीर बदल चुकी है, उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इनमें 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दस साल पहले कोई कहता कि लखनऊ में ‘जीसीसी इनोवेशन समिट’ होगी तो शायद यहां मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों में से कोई आने को तैयार नहीं होता क्योंकि निवेशकों के मन में यहां की कानून व्यवस्था को लेकर आशंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ही सुरक्षित नहीं होगा तो उसकी पूंजी कैसे सुरक्षित रहेगी, यही वजह थी कि निवेशक उत्तर प्रदेश आने से बचते थे। योगी ने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश की पहचान उपद्रव, अराजकता और माफिया प्रवृत्ति के तत्वों के वर्चस्व से होती थी तथा राज्य नीतिगत पंगुता का शिकार था एवं उत्तर प्रदेश अपनी पहचान खो चुका था।
उन्होंने कहा कि लेकिन आज प्रदेश निवेश और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के लिए केवल नीतियां घोषित करना पर्याप्त नहीं होता, निवेशकों को अपनी पूंजी और कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ बेहतर कारोबारी माहौल का भरोसा भी चाहिए। योगी ने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बदलने के लिए कानून व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और नीतिगत सुधारों पर एक साथ काम किया गया जिसका परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसरों में बदलना है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 क्षेत्रवार नीतियां बनाई गई हैं तथा निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर’ का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम हो रहा है तथा 2030-31 तक प्रदेश में 500 नए जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए चार करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने की योजना है।
समिट में प्रदर्शित लघु फिल्म में बताया गया कि प्रदेश में पहले से 200 से अधिक जीसीसी, 400 से ज्यादा एसटीपीआई-पंजीकृत आईटी एवं आईटीईएस इकाइयां और 4.3 करोड़ वर्ग फीट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है। नोएडा जीसीसी के स्थापित केंद्र के रूप में उभरा है, जबकि लखनऊ में भी इस क्षेत्र का तेजी से विस्तार हो रहा है। कानपुर एवं अन्य शहरों में भी संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष बड़ी संख्या में तकनीकी स्नातक तैयार हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य छह लाख एसटीईएम स्नातकों की प्रतिभा क्षमता तैयार करना है, ताकि वैश्विक कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

