बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला बोला। ईवीएम पर सवाल उठाते हुए मायावती ने चंद्रशेखर की नगीना लोकसभा चुनाव में जीत का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चंद्रशेखर का नगीना में कोई खास जनाधार नहीं था, इसके बावजूद उन्हें ईवीएम में धांधली कर चुनाव जिताया गया। मायावती ने कहा कि बसपा ईवीएम के इस्तेमाल का शुरू से विरोध करती रही है। पार्टी ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था। मायावती ने चुनाव आयोग से मांग की कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए। मतदाता को वोट देने के बाद अपने वोट को लेकर भ्रम ठीक नहीं मायावती ने कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार दिया है। इसी अधिकार के जरिए जनता अपनी पसंद की सरकार चुनती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। चुनाव किस तरह और किन प्रक्रियाओं के तहत होंगे, इसके लिए कानून और नियम भी बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी सरकार चुनने के लिए चुनाव होते हैं, वहां प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। प्रत्येक मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार या पार्टी को वोट देने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और उसका वोट उसी के पक्ष में गिना जाना चाहिए, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया है। मतदाता के मन में यह संदेह नहीं होना चाहिए कि उसका वोट किसी दूसरे के खाते में चला गया या उसकी गिनती किसी और के पक्ष में हुई। ‘ऐसा हुआ तो लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा खत्म होगा’ मायावती ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर यदि मतदाता के मन में संदेह पैदा होता है तो इससे लोकतंत्र पर उसका भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को ऐसी सभी भ्रांतियों को दूर करना चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास चुनाव प्रक्रिया में बना रहे। बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में करीब पांच दशक तक बैलेट पेपर से चुनाव होते रहे। मतदान के बाद मतपत्रों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला और गिना जाता था। बाद में ईवीएम के जरिए मतदान की व्यवस्था शुरू हुई। ‘भाजपा ने विपक्ष में रहते ईवीएम पर सवाल उठाए थे’ मायावती ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक, भाजपा की ओर से तब यह कहा गया था कि ईवीएम एक मशीन है और इसमें लगी इलेक्ट्रॉनिक चिप को प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उस समय ईवीएम से संबंधित एक किताब भी प्रकाशित की गई थी और मशीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। मायावती ने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ईवीएम व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय इसे जारी रखा। बसपा प्रमुख ने दावा किया कि दुनिया के कई देशों में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ईवीएम के इस्तेमाल के खिलाफ रही है। ‘दलित-पिछड़ों का वोट प्रभावित होने की आशंका’ मायावती ने कहा कि बसपा देश के दबे-कुचले, दलित और अति पिछड़े वर्ग के लोगों के हितों के लिए बनी पार्टी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम के कारण इन वर्गों के वोटों को लेकर उनके मन में आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के समर्थकों के बीच ईवीएम को लेकर विश्वास की कमी के कारण मतदान के प्रति रुझान भी प्रभावित हो रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद का जिक्र किया। मायावती ने दावा किया कि चंद्रशेखर आजाद का नगीना में कोई खास जनाधार नहीं था, इसके बावजूद वे चुनाव जीत गए। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम में गड़बड़ी के जरिए उन्हें चुनाव जिताया गया। भाजपा के इशारे पर काम करते हैं चंद्रशेखर मायावती ने चंद्रशेखर पर भाजपा के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों से मिलने और धरना-प्रदर्शन करने पहुंच जाते हैं तथा युवाओं को गुमराह करते हैं। फिर ये युवा कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंस कर अपना भविष्य बर्बाद करने को मजबूर हो जाते हैं। मायावती ने दलित समाज के लोगों से ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आने की अपील की। वीवीपैट को लेकर भी उठाए सवाल बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने ईवीएम की चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद ईवीएम के साथ वीवीपैट की व्यवस्था लागू की गई। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इससे भी उनकी आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं। मायावती ने कहा कि ईवीएम से मतों की गिनती के दौरान वीवीपैट की सभी पर्चियों की गिनती नहीं होती। उनके मुताबिक, इससे मतदाता को यह पूरी तरह विश्वास दिलाना संभव नहीं है कि उसका वोट उसी उम्मीदवार या पार्टी के खाते में गया है, जिसके पक्ष में उसने मतदान किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मशीन को लेकर आशंका पैदा हो सकती है। इसलिए चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे मतदाता को अपने वोट की शुचिता और सही गिनती को लेकर पूरा भरोसा हो। ‘विपक्ष में गुस्सा है, ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए’ मायावती ने कहा कि चुनाव से जुड़े कई मुद्दों को लेकर लोगों के बीच भ्रांतियां बनी हुई हैं। इन्हें दूर करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में भी इसे लेकर नाराजगी है और ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। बसपा प्रमुख ने उम्मीद जताई कि चुनाव आयोग उनकी बातों पर गंभीरता से विचार करेगा और ऐसी व्यवस्था करेगा, जिससे देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को लेकर सभी लोगों का विश्वास कायम रह सके। बसपा की दो प्रमुख मांगें मायावती ने कहा कि बसपा की मांग है कि ईवीएम से मतदान बंद कराकर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराया जाए। इसके साथ ही एसआईआर को लेकर जो भी भ्रांतियां और आशंकाएं लोगों के बीच हैं, उन्हें भी चुनाव आयोग स्पष्ट करे। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का भ्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। आयोग को सभी संबंधित मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि मतदाताओं का विश्वास बना रहे। कानून-व्यवस्था पर भी टिप्पणी मायावती ने देश की राजधानी दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में विभिन्न मुद्दों को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संबंधित राज्य सरकारों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने इसे जनहित में जरूरी बताया। नगीना में 1.5 लाख से ज्यादा वोट से जीते थे चंद्रशेखर नगीना लोकसभा सीट पर 2024 के चुनाव में चंद्रशेखर आजाद ने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 5,12,552 वोट हासिल किए थे। उन्होंने भाजपा के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों के अंतर से हराया था। चंद्रशेखर को करीब 51.19% वोट मिले थे। इस चुनाव में सपा के मनोज कुमार को 1,02,374 और बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह को 1,32,455 वोट मिले थे। नगीना सीट पर चंद्रशेखर की जीत के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ा और वे लोकसभा पहुंचे। पहली बार बसपा प्रमुख ने चंद्रशेखर का नाम लेकर हमला बोला मायावती का चंद्रशेखर पर यह हमला दलित राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। चंद्रशेखर आजाद 2024 में नगीना से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। वहीं, मायावती लगातार बसपा के परंपरागत दलित वोट बैंक को पार्टी के साथ बनाए रखने पर जोर देती रही हैं। चंद्रशेखर का नाम लेकर मायावती ने एक तरफ ईवीएम पर अपने पुराने रुख को दोहराया, तो दूसरी तरफ उनके राजनीतिक प्रभाव और दलित युवाओं के बीच उनकी सक्रियता पर भी सवाल उठाए। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पश्चिमी यूपी में चंद्रशेखर से बसपा को अपने कोर वोट बैंक छीनने का खतरा महसूस होने लगा है।

