ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है जो एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद और गंभीर हो गई। अमेरिका ने जहाँ ईरान के लारक आइलैंड (Larak Island) में दो रॉकेट लॉन्चर्स पर बमबारी की, तो इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन (Jordan) और संयुक्त अरब अमीरात – यूएई (United Arab Emirates- UAE) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। करीब एक महीने में यह पहला मौका था जब दोनों देशों की तरफ से एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। इसी बीच अब ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जवाब दे दिया है।
ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से सवाल पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की संभावना को खारिज कर दिया है? इसके जवाब में ट्रंप ने कहा, “ईरान सैन्य रूप से पूरी तरह हार चुका है। मैंने उन्हें हरा दिया और अब मुझे उन पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल करना चाहिए? यह कितना बेवकूफी भरा सवाल है।”
ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं ट्रंप
ईरान पर दबाव बनाकर उसे अमेरिका के साथ डील करने के लिए मजबूर करने के लिए ट्रंप हर संभव कोशिश कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की भी घोषणा की। होर्मुज स्ट्रेट पर भी ट्रंप अक्सर बयानबाजी करने से पीछे नहीं हटते। इस रणनीतिक जलमार्ग पर तो अमेरिका का कंट्रोल भी बता चुके हैं।
अमेरिका को करना होगा वादों को पूरा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका से बातचीत करने के लिए ईरान तैयार है, लेकिन वो इस मामले में सतर्क भी है। जब ईरानी राष्ट्रपति से पूछा गया था कि क्या चल रही कूटनीतिक कोशिशों से जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते को फिर से शुरू किया जा सकता है और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों को बहाल किया जा सकता है, तब इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह आगे बढ़ सकते हैं अगर ईरान के कदमों के जवाब में दूसरी तरफ से भी उसी के बराबर और उचित कदम उठाए जाएं। पेज़ेशकियान ने आगे कहा कि शांति समझौते के तहत ईरान अपने वादों को तभी पूरा करेगा जब अमेरिका की तरफ से भी ऐसा ही किया जाएगा। हालांकि इस दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी माना कि हो सकता है कि दोनों पक्ष अपने सभी मकसद हासिल न कर पाएं।

