इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 10 जुलाई से चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को भूख हड़ताल में बदल गया। छात्र छात्रसंघ भवन से अपना धरना स्थल बदलकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पहुंच गए। जहां आठ छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। आमरण अनशन बैठे छात्रों को पुलिस ने जबरन उठाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई। पुलिस ने छात्रों को मेन गेट की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। लेकिन छात्र नहीं माने गेट पर ही बैठे गए। मौके पर एसएचओ, एसीपी समेत कई पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। आमरण अनशन पर बैठे छात्र छात्रनेता प्रियांशु विद्रोही ने कहा कि गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने के अंतिम रास्ते के रूप में आठ साथी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगें माने या छात्र अपनी मांगों के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। आमरण अनशन पर आशुतोष मौर्या,आयुष महात्मा,रोशन माहिर,ऋषि,अमित यादव,राकेश,अंश और आकर्ष पटेल बैठे हैं। छात्रों का विरोध प्रवेश शुल्क बढ़ाने और विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या में भारी कटौती को लेकर है। उनका कहना है कि हर साल स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए फीस में 10% और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए 14% की वृद्धि की जा रही है, साथ ही विश्वविद्यालय में लगभग 6,000 सीटें कम कर दी गई हैं। छात्रों की प्रमुख मांगें इससे पहले भी छात्रों ने अपने विरोध को तीव्र करने के लिए अनोखे तरीके अपनाए हैं। कुछ दिन पहले छात्रों ने अपने रक्त से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की समस्याओं और प्रशासन के रवैये से अवगत कराया था। बीते जुलाई माह में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और उन्हें निलंबित कर दिया था, जब वे फीस वृद्धि और सीट कटौती के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।

