इराक के कुर्दिस्तान में आधी रात भीषण ड्रोन अटैक, निशाने पर थे मसरूर बरजानी, जानिए किसने किया था हमला?

इराक के कुर्दिस्तान में आधी रात भीषण ड्रोन अटैक, निशाने पर थे मसरूर बरजानी, जानिए किसने किया था हमला?

Kurdistan Region Drone Attack: इराक के कुर्दिस्तान में सोमवार तड़के एक बड़े ड्रोन हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उत्तरी इराक के एरबिल प्रांत में दो विस्फोटक ड्रोन ने कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट (KRG) के प्रधानमंत्री मसरूर बरजानी के निजी ऑफिस को निशाना बनाया गया। इसी हमले में स्थानीय सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख के घर को भी टारगेट किया गया।

कुर्दिस्तान रीजन काउंटर-टेररिज्म डायरेक्टरेट के मुताबिक, यह हमला 17 अगस्त 2026 को रात 12:28 बजे पिरमाम जिले में हुआ। अधिकारियों का दावा है कि दोनों ड्रोन ईरानी इलाके से लॉन्च किए गए थे। इनकी पहचान ईरानी डिजाइन वाले ‘हदीद-110’ कामिकेज़ ड्रोन के रूप में की गई है। हालांकि, इस हमले में किसी के घायल होने या जान जाने की खबर नहीं है। इसके बावजूद मसरूर बरज़ानी के ऑफिस को निशाना बनाए जाने से पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है।

होर्मुज को लेकर ईरान-ओमान की बातचीत में देरी की वजह

दूसरी तरफ मिडिल-ईस्ट में ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देश सुरक्षित कमर्शियल नेविगेशन के लिए एक नया सिस्टम बनाना चाहते हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बातचीत में देरी की तीन बड़ी वजहें बताई हैं। उन्होंने कहा कि मामला काफी जटिल है। इसके अलावा कई पक्ष इस प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ पार्टियां ऐसी भी हैं, जिनके इरादे नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना

बघाई ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में असुरक्षा ईरान या क्षेत्र ने पैदा नहीं की। उनके मुताबिक, यह स्थिति अमेरिका की गैर-कानूनी सैन्य कार्रवाई के कारण बनी। उन्होंने कहा कि ईरान और ओमान का मकसद समुद्री स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। साथ ही दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान भी जरूरी है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाना जरूरी है।

दोनों देश बातचीत जारी रखने पर सहमत

बघाई ने कहा कि बातचीत धीमी जरूर हुई है, लेकिन रुकी नहीं है। ईरान और ओमान लगातार एक-दूसरे के साथ विचार साझा कर रहे हैं। दोनों देश अपने हितों और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक समझौता तैयार करना चाहते हैं। हाल ही में दोनों देशों ने कई हफ्तों की तकनीकी बातचीत के बाद समुद्री कॉरिडोर के लिए एक संयुक्त शिपिंग रूट मैप भी तैयार किया है। यह प्रक्रिया ईरान-अमेरिका मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग से भी जुड़ी है। ईरान लगातार कहता रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने का फैसला अमेरिका द्वारा अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने पर निर्भर करेगा।

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