मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए स्थानीय उद्योगों को तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 के दूसरे दिन शनिवार को हुई दो राउंडटेबल बैठकों में चिप पैकेजिंग, टेस्टिंग, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन और युवाओं के कौशल विकास पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम तैयार करने के लिए सरकार, उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। दूसरी राउंडटेबल बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सेमीकंडक्टर उद्योग की सप्लाई चेन से जोड़ने पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता एमएसएमई विभाग के सचिव जॉन किंग्सले ने की। चर्चा में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग, स्पेशलिटी केमिकल्स, औद्योगिक गैसों और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का प्रदेश में ही उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी गईं। विशेषज्ञों ने कहा कि स्थानीय इकाइयों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और नए बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराना जरूरी है। एमएसएमई की लागत घटाने और उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने के लिए साझा टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सुविधाएं विकसित करने का सुझाव भी दिया गया। इससे छोटी औद्योगिक इकाइयों को जरूरी तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आईटीआई-पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों को मिलेगी इंडस्ट्री ट्रेनिंग पहली राउंडटेबल बैठक में अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर फोकस रहा। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक अंशुमन राज की अध्यक्षता में हुई चर्चा में उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाएं विकसित करने पर विचार किया गया। आईआईटी खड़गपुर के प्रो. शीलेंद्र कुमार और आईआईटी इंदौर के प्रो. मुकेश कुमार ने स्थानीय तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने, अनुसंधान को व्यावहारिक उत्पादों में बदलने और उद्योगों के साथ शैक्षणिक संस्थानों का समन्वय मजबूत करने से जुड़े सुझाव रखे। चर्चा में आईटीआई, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल, सिग्नल मापन, टेस्टिंग और पैकेजिंग जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाने की जरूरत भी बताई गई। मल्टीलेयर पीसीबी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में प्रशिक्षण उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए आईआईटी इंदौर और अन्य तकनीकी संस्थानों के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने पर चर्चा हुई। इनमें मल्टीलेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) का निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही स्टार्टअप्स को तकनीकी संसाधन, अनुसंधान सहयोग और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध कराने पर भी विचार किया गया। रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार अनुसंधान परियोजनाएं तैयार करने तथा संस्थानों को जरूरी उपकरण और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी सामने आईं। निवेश और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद समिट में हुई चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें बड़े उद्योगों के साथ स्थानीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स की भी भागीदारी बढ़े। तकनीकी सुविधाओं, वित्तीय मदद और बाजार तक पहुंच मजबूत होने से स्थानीय इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है। साथ ही, युवाओं के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और कुशल रोजगार के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।

