पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के आज पटना जिले के ग्रामीण और सुदूर इलाकों से सैकड़ों भूमिहीन महिलाएं सचिवालय पहुंची। महिलाएं राज्य सरकार की ओर से घोषित आवासीय जमीन पर अपना अधिकार और मालिकाना हक दिए जाने की मांग को लेकर पहुंची थीं। कई महिलाएं अपने साथ जरूरी दस्तावेज भी लेकर आई थीं और जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही थीं। महिलाओं का कहना था कि वे लंबे समय से अपने घर के लिए जमीन की मांग कर रही हैं। कई परिवारों के पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है। ऐसे में वे दूसरे लोगों की जमीन या सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से आवासीय जमीन देने की घोषणा के बाद इन परिवारों को उम्मीद जगी है कि अब उनका अपना घर हो सकेगा। प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात, 20 दिन में जमीन देने का भरोसा सचिवालय के भीतर महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल की अधिकारियों से मुलाकात हुई। प्रतिनिधिमंडल ने भूमिहीन परिवारों को जल्द से जल्द जमीन का आवंटन करने और उन्हें मालिकाना हक देने की मांग रखी। अधिकारियों की ओर से प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया कि पात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन पूरा होने के बाद अगले 20 दिनों के भीतर चिन्हित परिवारों को जमीन का आवंटन किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार को सचिवालय में तत्काल जमीन के कागजात नहीं बांटे जा रहे हैं। फिलहाल लाभार्थियों के दस्तावेज और पात्रता की जांच की जा रही है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार जमीन आवंटन और कब्जा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने किया था बड़ा ऐलान भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन देने की यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 अगस्त को की गई घोषणा के बाद तेज हुई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के अत्यंत गरीब, बेसहारा और भूमिहीन परिवारों को स्थायी आशियाना उपलब्ध कराने के लिए 2 डिसमिल से 3 डिसमिल तक आवासीय जमीन मुफ्त देने की घोषणा की थी। सरकार का उद्देश्य ऐसे परिवारों को जमीन उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन तक नहीं है। जमीन मिलने के बाद इन परिवारों को सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकेगी। अभियान बसेरा-2 के तहत तैयार हुई सूची भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के ‘अभियान बसेरा-2’ से भी जुड़ी है। इस अभियान के तहत लंबे समय से राज्य के विभिन्न जिलों में भूमिहीन परिवारों को चिन्हित करने और उन्हें आवासीय जमीन उपलब्ध कराने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सरकारी स्तर पर किए गए सर्वे के आधार पर ऐसे परिवारों की सूची तैयार की गई है, जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है। इसी सूची के आधार पर पात्र परिवारों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के बाद पात्र लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जमीन नहीं होने से आवास योजना का लाभ भी अटकता है भूमिहीन परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिर्फ रहने की जगह की नहीं है। अपनी जमीन नहीं होने के कारण कई परिवार सरकारी आवास योजनाओं का लाभ मिलने के बाद भी घर नहीं बना पाते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण समेत अन्य आवासीय योजनाओं के तहत पक्का मकान बनाने के लिए जमीन की जरूरत होती है। यही वजह है कि सरकार पहले भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। जमीन का अधिकार मिलने के बाद संबंधित परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। वर्षों से किराए और झोपड़ी में रहने की मजबूरी महिलाओं ने बताया कि भूमिहीन होने के कारण उनका जीवन लगातार अस्थिर बना हुआ है। कुछ परिवार किराए के मकान में रहते हैं तो कई परिवार अस्थायी झोपड़ी बनाकर अपना जीवन गुजार रहे हैं। बारिश, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान इन परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है। महिलाओं का कहना था कि उनके लिए 2 डिसमिल जमीन सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य और स्थायी घर की उम्मीद है। जमीन मिलने के बाद वे सरकारी सहायता से पक्का मकान बनाना चाहती हैं। पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के आज पटना जिले के ग्रामीण और सुदूर इलाकों से सैकड़ों भूमिहीन महिलाएं सचिवालय पहुंची। महिलाएं राज्य सरकार की ओर से घोषित आवासीय जमीन पर अपना अधिकार और मालिकाना हक दिए जाने की मांग को लेकर पहुंची थीं। कई महिलाएं अपने साथ जरूरी दस्तावेज भी लेकर आई थीं और जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही थीं। महिलाओं का कहना था कि वे लंबे समय से अपने घर के लिए जमीन की मांग कर रही हैं। कई परिवारों के पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है। ऐसे में वे दूसरे लोगों की जमीन या सड़क किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं। सरकार की ओर से आवासीय जमीन देने की घोषणा के बाद इन परिवारों को उम्मीद जगी है कि अब उनका अपना घर हो सकेगा। प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात, 20 दिन में जमीन देने का भरोसा सचिवालय के भीतर महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल की अधिकारियों से मुलाकात हुई। प्रतिनिधिमंडल ने भूमिहीन परिवारों को जल्द से जल्द जमीन का आवंटन करने और उन्हें मालिकाना हक देने की मांग रखी। अधिकारियों की ओर से प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया गया कि पात्र लाभार्थियों के दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन पूरा होने के बाद अगले 20 दिनों के भीतर चिन्हित परिवारों को जमीन का आवंटन किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार को सचिवालय में तत्काल जमीन के कागजात नहीं बांटे जा रहे हैं। फिलहाल लाभार्थियों के दस्तावेज और पात्रता की जांच की जा रही है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार जमीन आवंटन और कब्जा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी। 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने किया था बड़ा ऐलान भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन देने की यह पूरी कवायद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की 15 अगस्त को की गई घोषणा के बाद तेज हुई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के अत्यंत गरीब, बेसहारा और भूमिहीन परिवारों को स्थायी आशियाना उपलब्ध कराने के लिए 2 डिसमिल से 3 डिसमिल तक आवासीय जमीन मुफ्त देने की घोषणा की थी। सरकार का उद्देश्य ऐसे परिवारों को जमीन उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन तक नहीं है। जमीन मिलने के बाद इन परिवारों को सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा सकेगी। अभियान बसेरा-2 के तहत तैयार हुई सूची भूमिहीन परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के ‘अभियान बसेरा-2’ से भी जुड़ी है। इस अभियान के तहत लंबे समय से राज्य के विभिन्न जिलों में भूमिहीन परिवारों को चिन्हित करने और उन्हें आवासीय जमीन उपलब्ध कराने के लिए सर्वे किया जा रहा है। सरकारी स्तर पर किए गए सर्वे के आधार पर ऐसे परिवारों की सूची तैयार की गई है, जिनके पास रहने के लिए अपनी जमीन नहीं है। इसी सूची के आधार पर पात्र परिवारों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के बाद पात्र लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जमीन नहीं होने से आवास योजना का लाभ भी अटकता है भूमिहीन परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या सिर्फ रहने की जगह की नहीं है। अपनी जमीन नहीं होने के कारण कई परिवार सरकारी आवास योजनाओं का लाभ मिलने के बाद भी घर नहीं बना पाते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण समेत अन्य आवासीय योजनाओं के तहत पक्का मकान बनाने के लिए जमीन की जरूरत होती है। यही वजह है कि सरकार पहले भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। जमीन का अधिकार मिलने के बाद संबंधित परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। वर्षों से किराए और झोपड़ी में रहने की मजबूरी महिलाओं ने बताया कि भूमिहीन होने के कारण उनका जीवन लगातार अस्थिर बना हुआ है। कुछ परिवार किराए के मकान में रहते हैं तो कई परिवार अस्थायी झोपड़ी बनाकर अपना जीवन गुजार रहे हैं। बारिश, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान इन परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है। महिलाओं का कहना था कि उनके लिए 2 डिसमिल जमीन सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए सुरक्षित भविष्य और स्थायी घर की उम्मीद है। जमीन मिलने के बाद वे सरकारी सहायता से पक्का मकान बनाना चाहती हैं।

