भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि आज वित्तीय प्रणाली की मजबूती भविष्य के खतरों से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क रहने पर जोर दिया। उन्होंने यहां कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नीति निर्माताओं के लिए पांच प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता का लक्ष्य झटकों को रोकने पर नहीं, बल्कि वित्तीय प्रणाली को इस तरह मजबूत बनाने पर होना चाहिए कि वह इनके असर को झेल सके और उन्हें सीमित रख सके।
मल्होत्रा ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के मजबूत बही-खातों के दम पर टिकी वित्तीय प्रणाली की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा, आज की मजबूती का मतलब कल की सुरक्षा नहीं हो सकता। हम आने वाली कमजोरियों को लेकर सतर्क रहने और अपनी वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आंतरिक या बाहरी वित्तीय झटकों को रोका नहीं जा सकता। ऐसे में हमारा मकसद एक ऐसी वित्तीय प्रणाली तैयार करना होना चाहिए जो भारी दबाव के बीच भी सेवाएं देने में सक्षम हो। मल्होत्रा ने नई तरह के व्यवस्थागत जोखिमों की ओर भी इशारा किया।
उन्होंने कहा कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि किसी बैंक या वित्तीय क्षेत्र के भीतर से ही शुरू हो, बल्कि यह किसी वैश्विक घटना, साइबर हमले या तकनीकी विफलता से पैदा हो सकता है और कई रास्तों से वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने नेटवर्क पर निर्भरता और संकट के एक जगह से दूसरी जगह फैलने के रास्तों को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत पर जोर दिया। आरबीआई गवर्नर ने बेहतर और बारीक आंकड़ों के जरिए निगरानी तथा आकलन व्यवस्था में सुधार की वकालत भी की।
मल्होत्रा ने कहा कि मजबूती पूरे तंत्र के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि एक मजबूत बैंकिंग प्रणाली जरूरी तो है, लेकिन अकेले यही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि मजबूती केवल बैंकों में ही नहीं, बल्कि गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों, वित्तीय बाजारों, भुगतान प्रणालियों, प्रौद्योगिकी ढांचा प्रदाताओं, महत्वपूर्ण तीसरे पक्षों और सीमा-पार वित्तीय नेटवर्कों में भी होनी चाहिए।

