नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने शनिवार को कहा कि निर्यात पर पाबंदियां, प्रतिबंध और आयात शुल्क अब आर्थिक नीतियों के साधन बन चुके हैं और कभी-कभी इनका इस्तेमाल हथियार की तरह भी किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध ऊर्जा और खाद्य बाजारों को अस्त-व्यस्त कर देते हैं, जबकि समुद्री रास्ते और रणनीतिक भौगोलिक मार्ग आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील बन जाते हैं। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में ए वर्ल्ड प्राइस्ड फॉर रिस्क विषय पर उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा का एक बड़ा आयातक देश है, और किसी भी महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में लंबे समय तक आने वाली रुकावट अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डाल सकती है।
इसलिए भारत ने सुरक्षा के कई स्तरों को मिलाकर अपनी रणनीति तैयार की है। उन्होंने कहा, ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की बाधाएं इस बात की साफ याद दिलाती हैं कि भूगोल किस तरह आर्थिक जोखिम में बदल सकता है। किसी देश का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि निर्यात प्रतिबंध, आर्थिक पाबंदियां और शुल्क अब आर्थिक नीतियों के साधन बन गए हैं, और कई बार तो इन्हें एक हथियार की तरह आजमाया जाता है।
अमेरिका पूर्व में कई वजहों से भारत सहित कई देशों पर शुल्क लगाने की घोषणा कर चुका है। हाल में अमेरिका ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026 लागू किया है, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने का अधिकार देता है। मिश्रा ने बताया कि भारत ने भारी भंडारण क्षमता तैयार की है, जहां संभव हो घरेलू उत्पादन बढ़ाया है और खरीदारी के स्रोतों में विविधता लाई गई है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत जिन देशों से कच्चा तेल खरीदता है, उनकी संख्या 27 से बढ़कर 43 हो गई है, जो अपने आप में एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, यही बात स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ने पर भी लागू होती है। नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, भंडारण और उससे जुड़ी तकनीकों में घरेलू क्षमता बढ़ाना केवल पर्यावरण के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि बाहरी झटकों के असर को कम करने के लिए भी आवश्यक है।
मिश्रा ने कहा कि एक और उदाहरण महत्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक औद्योगिक कच्चे माल का है, जहां कार्यक्षमता और मजबूती के बीच का अंतर महत्वपूर्ण हो जाता है। मिश्रा ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के जरिए घरेलू स्तर पर खोज, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को मजबूत करने के कदम उठाए हैं।

