रामपुर में जेल के फांसीघर की जमीन खरीद-फरोख्त से जुड़े मुकदमे में बुधवार की दोपहर तीन बजे आरोप तय नहीं हो सके। सपा नेता आजम खां रामपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में पेश हुए। हालांकि, इस मामले के अन्य आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे। सभी आरोपियों की गैर-मौजूदगी के कारण आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अब इस मामले में 6 अक्टूबर को सुनवाई होगी। यह मामला गंज कोतवाली में 20 सितंबर 2019 को तत्कालीन नायब तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा ने दर्ज कराया था। एफआईआर में कुल 37 लोगों को नामजद किया गया था। आरोप है कि जेल के फांसीघर की सरकारी जमीन को बेचा गया। प्रशासन की रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकारी जमीन बेची नहीं जा सकती। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर जमीन बेच दी गई और खरीदने वालों ने उस पर मकान भी बना लिए। सभी आरोपियों का कोर्ट में मौजूद होना जरूरी पुलिस की जांच के बाद मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने खरीदने वालों के बयानों के आधार पर आजम खां का नाम भी धारा 120बी के तहत शामिल किया। पुलिस के मुताबिक, खरीदने वालों ने पूछताछ में बताया था कि उन्होंने आजम खां के कहने पर जमीन खरीदी थी। आजम खां की मां और बेटे का नाम भी इस मुकदमे में आया था। मां की मौत के बाद उनका नाम हटा दिया गया, जबकि आजम खां और उनके बेटे का नाम आरोप पत्र में शामिल रहा। बुधवार को कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया ही मुख्य मुद्दा थी। आजम खां के वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि आरोप तय करने के लिए सभी आरोपियों का कोर्ट में मौजूद होना जरूरी है। अन्य आरोपियों के मौजूद न होने के कारण यह कार्रवाई नहीं हो सकी।

