अवैध रायफल के साथ गिरफ्तार आरोपी को सजा:सहरसा कोर्ट ने स्पीडी ट्रायल में सुनाई 3 साल की कैद, 5 हजार जुर्माना

अवैध रायफल के साथ गिरफ्तार आरोपी को सजा:सहरसा कोर्ट ने स्पीडी ट्रायल में सुनाई 3 साल की कैद, 5 हजार जुर्माना

सहरसा व्यवहार न्यायालय के न्यायिक दण्डाधिकारी (प्रथम श्रेणी) हसन तबरेज की अदालत ने आर्म्स एक्ट के एक मामले में त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए एक आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह मामला बीते 29 मई 2025 की देर रात का है। चिड़ैया थानाध्यक्ष (सब इंस्पेक्टर) इंदल कुमार गुप्ता पुलिस बल के साथ रात्रि गश्ती पर थे। इसी दौरान उन्हें गुप्त सूचना मिली कि ग्राम सौथी निवासी जवाहर चौधरी (30 वर्ष) अवैध हथियार लेकर कबीरपुर की ओर जा रहा है, जिसका इरादा किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देना है। वैलिड डॉक्यूमेंट पेश नहीं कर सका आरोपी सूचना के सत्यापन पर पुलिस बल ने त्वरित घेराबंदी की। कबीरपुर से करीब 300 मीटर पहले पुल के पास पुलिस को देखकर आरोपी जवाहर चौधरी भागने लगा, जिसे सशस्त्र बल के सहयोग से खदेड़कर पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उसके दाहिने कंधे पर टंगी एक लोहा-लकड़ी से बनी देशी रायफल (स्लिंग लगा), एक मैगजीन और 8 MM KF अंकित 02 अदद जिंदा कारतूस बरामद किए गए। आरोपी हथियार से संबंधित कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस ने स्वतंत्र साक्षियों की मौजूदगी में जब्ती सूची बनाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में चिड़ैया थाना कांड सं० 25/25 दर्ज किया गया। 3 साल की सजा और जुर्माने का फैसला मामले के अनुसंधानकर्ता सब इंस्पेक्टर गोविन्द नारायण झा ने तत्परता से घटना से जुड़े सभी तकनीकी व भौतिक साक्ष्य जुटाए और समय सीमा के भीतर अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। अदालत में त्वरित विचारण के तहत अभियोजन पदाधिकारी बिजय कुमार ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी दलीलें रखीं। गवाहों के बयान और जब्ती सूची के आधार पर अपराध सिद्ध किया गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के उपरांत न्यायालय ने जवाहर चौधरी को धारा 25(1-बी)ए आर्म्स एक्ट का दोषी पाते हुए 3 वर्ष की सजा और जुर्माने का फैसला सुनाया। सहरसा व्यवहार न्यायालय के न्यायिक दण्डाधिकारी (प्रथम श्रेणी) हसन तबरेज की अदालत ने आर्म्स एक्ट के एक मामले में त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए एक आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 5,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह मामला बीते 29 मई 2025 की देर रात का है। चिड़ैया थानाध्यक्ष (सब इंस्पेक्टर) इंदल कुमार गुप्ता पुलिस बल के साथ रात्रि गश्ती पर थे। इसी दौरान उन्हें गुप्त सूचना मिली कि ग्राम सौथी निवासी जवाहर चौधरी (30 वर्ष) अवैध हथियार लेकर कबीरपुर की ओर जा रहा है, जिसका इरादा किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देना है। वैलिड डॉक्यूमेंट पेश नहीं कर सका आरोपी सूचना के सत्यापन पर पुलिस बल ने त्वरित घेराबंदी की। कबीरपुर से करीब 300 मीटर पहले पुल के पास पुलिस को देखकर आरोपी जवाहर चौधरी भागने लगा, जिसे सशस्त्र बल के सहयोग से खदेड़कर पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उसके दाहिने कंधे पर टंगी एक लोहा-लकड़ी से बनी देशी रायफल (स्लिंग लगा), एक मैगजीन और 8 MM KF अंकित 02 अदद जिंदा कारतूस बरामद किए गए। आरोपी हथियार से संबंधित कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। पुलिस ने स्वतंत्र साक्षियों की मौजूदगी में जब्ती सूची बनाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में चिड़ैया थाना कांड सं० 25/25 दर्ज किया गया। 3 साल की सजा और जुर्माने का फैसला मामले के अनुसंधानकर्ता सब इंस्पेक्टर गोविन्द नारायण झा ने तत्परता से घटना से जुड़े सभी तकनीकी व भौतिक साक्ष्य जुटाए और समय सीमा के भीतर अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। अदालत में त्वरित विचारण के तहत अभियोजन पदाधिकारी बिजय कुमार ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी दलीलें रखीं। गवाहों के बयान और जब्ती सूची के आधार पर अपराध सिद्ध किया गया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के उपरांत न्यायालय ने जवाहर चौधरी को धारा 25(1-बी)ए आर्म्स एक्ट का दोषी पाते हुए 3 वर्ष की सजा और जुर्माने का फैसला सुनाया।  

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