ईटानगर, पांच अक्टूबर अरुणाचल प्रदेश के दो प्रमुख पत्रकार संगठनों ने सोमवार को दावा किया कि राज्य के कई पत्रकारों ने शिकायत की है कि अपर सियांग जलविद्युत परियोजना संबंधी उनकी वीडियो सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट या तो भारत में दिखाई नहीं दे रही हैं या उनके खातों पर ही पाबंदी लगा दी गई है। अरुणाचल प्रेस क्लब (एपीसी) और ‘अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (एपीयूडब्ल्यूजे) ने इस पर ‘‘गंभीर चिंता’’ जताते हुए संयुक्त बयान जारी किया और मांग रखी कि किसी परियोजना की रिपोर्टिंग के कारण रोकी गई वैध पत्रकारिता सामग्री को तत्काल बहाल किया जाए। दोनों संगठनों ने अधिकारियों से ‘‘पत्रकारों या समाचार संगठनों पर लगाई गई हर पाबंदी का स्पष्टीकरण’’ देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रेस का दायित्व हर पक्ष को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ सामने लाना है। संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘पत्रकारिता को महज इसलिए बाधित नहीं किया जा सकता क्योंकि जमीनी रिपोर्ट असहज करने वाली, आलोचनात्मक या आधिकारिक आख्यान के विपरीत हैं।’’
दोनों पत्रकार संगठनों ने कहा कि यह परियोजना जनहित से जुड़ी है, जिसमें विकास, पर्यावरण, विस्थापन, स्वदेशी लोगों के अधिकार, राष्ट्रीय हित और सियांग नदी के तट पर रहने वाले समुदायों का भविष्य शामिल हैं। बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे समय में जब इस परियोजना को लेकर व्यापक बहस, विरोध-प्रदर्शन और सरकार तथा प्रभावित समुदायों के बीच बातचीत जारी है, ऐसे में वैध पत्रकारिता रिपोर्टिंग को रोकना नागरिकों को उस जानकारी से वंचित करने का जोखिम पैदा करता है, जो जागरूक जनसंवाद के लिए जरूरी है।’’
एपीसी और एपीयूडब्ल्यूजे ने मांग की कि यदि किसी प्राधिकरण ने परियोजना से जुड़ी वैध खबरों को रोकने या सीमित करने का निर्देश दिया है, तो वह इस कार्रवाई का कानूनी आधार और ठोस कारण तत्काल स्पष्ट करे।
सियांग क्षेत्र में इस जलविद्युत परियोजना का विरोध कर रहे लोग सियांग नदी पर प्रस्तावित परियोजना की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) से जुड़ी गतिविधियों और सर्वेक्षण कार्य को तत्काल रोकने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रस्तावित परियोजना से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को भी हटाने की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि 11,000 मेगावाट की ‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’ से आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी, युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे तथा राज्य और देश की जल एवं ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

