मनीष कुमार सिंह
अजमेर। जिस घर में चार दिन पहले मातम पसरा था, वहां अचानक खुशियां लौट आई। परिवार ने जिसे नाथू रैगर समझकर अंतिम विदाई दे दी, वह चार दिन बाद मजदूरी करता हुआ जिंदा मिल गया। अब परिवार व पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि जिस शव का नाथू समझकर अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था? इस हैरान करने वाले मामले ने पुलिस की कार्यशैली और शव की शिनाख्त प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार गत 20 सितंबर को पुष्कर में सरकारी अस्पताल के पीछे एक युवक का शव मिला था। उसकी तलाशी में नाथू पुत्र शंकर रैगर के नाम की अस्पताल की पर्ची मिली। उस पर दर्ज मोबाइल नंबर पर पुलिस ने संपर्क किया तो नाथू की पत्नी ने बताया कि उसकी पति से दो-तीन साल से अनबन है और उसका कोई सरोकार नहीं है। 21 सितंबर को नाथू का भाई और पुत्र पुष्कर थाने पहुंचे और मोर्चरी में रखे शव की पहचान नाथू के रूप में की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौप दिया गया।
चेहरा दिखाए बिना सौंपा शव
नाथू की पत्नी मनभर देवी ने बताया कि 20 सितंबर की सुबह अजमेर जिले के पुष्कर थाने से पति की मौत की सूचना मिली। पुलिस ने कहा कि लावारिस शव की जेब में नाथू, उसका और गांव का नाम व मोबाइल नंबर वाली पर्ची मिली है। वह बेटे त्रिलोक और ग्रामीणों के साथ अस्पताल पहुंची। उसके अनुसार पुलिस ने चेहरा नहीं दिखाया और कहा कि शव सड़ गया है तथा दुर्गंध आ रही है। परिजन शव ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।
अंतिम संस्कार के बाद खुला राज
परिजन ने 21 सितंबर को नाथू का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार में शोक था। तीसरे की बैठक के बाद घर में बारहवें की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान परिजन को नाथू के जिंदा होने और मजदूरी करने की जानकारी मिली। वे मौके पर पहुंचे और नाथू को साथ लेकर घर लौट आए। घर में मातम की जगह खुशी छा गई, जबकि पुलिस के सामने शव की पहचान की गुत्थी खड़ी हो गई।
पहले भी कई दिन घर से रहता था दूर
पड़ताल में सामने आया कि भवन निर्माण श्रमिक नाथू पहले भी कई-कई दिन बाहर रहता था। लंबे समय तक गैरमौजूदगी के कारण परिवार को इसकी आदत थी। इसी वजह से परिजन ने शव की पहचान नाथू के रूप में कर दी। अब नाथू के जिंदा मिलने के बाद वास्तविक पहचान पुलिस के लिए चुनौती बन गई है।
फिर कौन था मृतक…
अब पुलिस के सामने सवाल है कि शव के पास नाथू के नाम की पर्ची कैसे पहुंची और मृतक आखिर कौन था। क्या शिनाख्त में चूक हुई या इसके पीछे कोई और वजह है।
डीएनए से खुलेगी गुत्थी
परिजन ने शव की शिनाख्त की, पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया। चार दिन बाद नाथू के जिंदा होने की सूचना मिली। डीएनए जांच के लिए सैंपल सुरक्षित रखा है। जांच की जा रही है कि मृतक के पास नाथू के नाम की पर्ची कैसे पहुंची और वह कौन था। डीएनए से पहचान की गुत्थी सुलझने की उम्मीद है।
-अशोक बिस्सु, थानाप्रभारी, पुष्कर

