‘अगर स्पाइडरमैन का नाम अस्लम शेख होता और पाकिस्तान से होता’, ‘बटवारा 1947’ के फ्लॉप होने पर राजकुमार संतोषी का छलका दर्द

‘अगर स्पाइडरमैन का नाम अस्लम शेख होता और पाकिस्तान से होता’, ‘बटवारा 1947’ के फ्लॉप होने पर राजकुमार संतोषी का छलका दर्द

Rajkumar Santoshi On Batwara 1947: राजकुमार संतोषी और सनी देओल की चर्चित जोड़ी ने लंबे समय बाद फिल्म ‘बटवारा 1947’ के साथ पर्दे पर वापसी की है। फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन रिलीज के बाद बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इसी बीच निर्देशक राजकुमार संतोषी ने फिल्म की असफलता और सनी देओल के किरदार को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म बनाने के दौरान एक सवाल उनके मन में जरूर आया था कि क्या दर्शक सनी देओल को उनकी पारंपरिक छवि से बिल्कुल अलग भूमिका में स्वीकार करेंगे।

सनी देओल की छवि से अलग था किरदार

सनी देओल ने ‘बटवारा 1947’ में सिकंदर मिर्जा नाम के मुस्लिम व्यक्ति का किरदार निभाया है। यह भूमिका उनके अब तक के चर्चित किरदारों से काफी अलग है। ‘गदर’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों में सनी को देशभक्ति, एक्शन और मजबूत तेवर वाले किरदारों के लिए खूब पसंद किया गया है। ऐसे में संतोषी के लिए उन्हें एक शांत और कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज उठाने वाले किरदार में पेश करना एक बड़ा रचनात्मक फैसला था।

राजकुमार संतोषी के मुताबिक, फिल्म की कहानी की जरूरत को देखते हुए यह भूमिका सनी के लिए बिल्कुल सही थी। उनका मानना है कि किसी अभिनेता की पहचान को केवल उसके पुराने किरदारों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। सनी देओल के जरिए वह फिल्म का संदेश ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना चाहते थे।

क्या मुस्लिम किरदार बना फिल्म की कमजोरी?

फिल्म के कमजोर बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सनी देओल की बदली हुई स्क्रीन इमेज दर्शकों को पसंद नहीं आई। संतोषी ने माना कि शूटिंग और कास्टिंग के दौरान टीम ने इस पहलू पर विचार जरूर किया था। आखिरकार उन्होंने जोखिम लेने का फैसला किया, क्योंकि उनका उद्देश्य सिर्फ सनी की लोकप्रिय छवि को भुनाना नहीं, बल्कि एक जरूरी सामाजिक संदेश को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाना था।

निर्देशक ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी लोकप्रिय सुपरहीरो का नाम और उसकी पहचान अलग होती, तो क्या दर्शक केवल उसकी पहचान देखकर उसे स्वीकार करने से इनकार कर देते? उनके इस तर्क का इशारा उन लोगों की तरफ था, जो अभिनेता की पुरानी छवि के कारण नए किरदार को लेकर पहले से राय बना लेते हैं।

सनी देओल को पसंद आई थी कहानी

राजकुमार संतोषी ने बताया कि सनी देओल के साथ उनकी दोस्ती पुरानी है और दोनों पहले भी सफल फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। हालांकि, इस फिल्म के लिए सनी को चुनने की वजह केवल व्यक्तिगत रिश्ता नहीं था। संतोषी के अनुसार, कहानी ऐसी थी जिसे वह मुख्यधारा के दर्शकों तक बड़े स्तर पर पहुंचाना चाहते थे और इसके लिए सनी जैसा लोकप्रिय चेहरा बेहद प्रभावी साबित हो सकता था।

फिल्म की कहानी और भूमिका सनी को भी पसंद आई थी। उन्होंने सिकंदर मिर्जा के किरदार को चुनौती के तौर पर लिया और अपनी स्थापित छवि से अलग जाकर अभिनय किया।

‘बटवारा 1947’ से थी बड़ी उम्मीद

‘बटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। फिल्म में सनी देओल के साथ करण देओल और अन्य कलाकार भी नजर आए हैं। संतोषी और सनी की जोड़ी इससे पहले ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी यादगार फिल्मों में दर्शकों का मनोरंजन कर चुकी है। यही वजह थी कि इस फिल्म को लेकर भी काफी उत्सुकता थी।

हालांकि, बॉक्स ऑफिस के आंकड़े फिलहाल फिल्म के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में राजकुमार संतोषी की प्रतिक्रिया ने फिल्म की असफलता के साथ-साथ सनी देओल की बदली हुई भूमिका पर भी नई बहस छेड़ दी है।

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